‘Bihar with Nitish’ is a citizen engagement platform to build awareness & promote participation in CM Shri @NitishKumar’s initiatives to build a #NewBihar. 🇮🇳
जाड़े की शाम में हमारे बिहार के पारंपरिक नाश्तों का कोई जोर नहीं है!
लिट्टी-चोखा, मखाना खीर, शुद्ध घी से तैयार अनरसा, दाल-पिट्ठा, खाजा, तिलकुट, लाई, गाजर का हलवा, चूड़ा-घुघनी...
यह सूची बहुत लंबी है। आपको क्या पसंद है?
#BihariCuisine#TasteOfBihar#WinterSnacks #TraditionalFood #BlissfulBihar
@TourismBiharGov@officecmbihar
#रोजगार_मतलब_नीतीश_सरकार 👨💼👩💼
12वीं पास युवक-युवतियों के लिए सरकारी नौकरी पाने का यह एक सुनहरा मौका है!
बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित होने वाली द्वितीय इंटर स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के तहत रिक्तियों की संख्या बढ़ा कर 24,492 कर दी गई है। इनमें 35% स��टें बिहार की मूल निवासी महिला अभ्यर्थियों के लिए आरक्षित होंगी।
#RojgarMatlabNitishSarkar #BSSC #Bihar
बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री स्व॰ सुशील कुमार मोदी जी की जयंती के अवसर पर पटना के राजेंद्र नगर स्थित सुशील मोदी स्मृति पार्क में आयोजित जयंती समारोह में उनकी प्रतिमा का अनावरण किया तथा उनकी प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
वरिष्ठ नागरिकों के हित में बड़ी पहल।
माननीय मुख्यमंत्री श्री @NitishKumar ने सात निश्चय-3 के सातवें निश्चय ‘सबका सम्मान-जीवन आसान’ (Ease of Living) के तहत जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को जरूरत के समय उनके घर पर ही आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था करने के निर्देश दिये हैं। इसके तहत घर पर नर्सिंग सहायता, पैथोलॉजी जांच, ब्लड प्रेशर जांच और ईसीजी जांच, फिजियोथेरेपी और आपातकालीन चिकित्सकीय सहायता शामिल होंगी।
आज छपी खबरें 👇
#SeniorCitizens #EaseOfLiving #BiharGovernment
नया वर्ष, नई उम्मीदें लेकर आया है। नीतीश ज�� के संकल्पों ने प्रदेश को जो दिशा दी है, वह इस वर्ष नए आयाम पर पहुंचेगी। अपना बिहार शीर्ष के राज्यों में शुमार होगा...
@NitishKumar
#Bihar #NitishKumar
#JDU #JanataDalUnited
नववर्ष 2026 के पहले दिन पटना शहर के विभिन्न इलाकों का भ्रमण किया। इस दौरान जे॰पी॰ गंगा पथ तथा राजधानी वाटिका (ईको पार्क) में भ्रमण कर वहां लोगों का अभिवादन स्वीकार किया तथा उन्हें भी नववर्ष की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
आज राजवंशी नगर स्थित लोकनायक जयप्रकाश नारायण सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के भवन के निर्माण कार्य का निरीक्षण किया तथा निर्माण कार्य को तेजी से पूर्ण करने का निर्देश दिया। निरीक्षण के दौरान वहां उपस्थित मरीजों एवं उनके परिवारजनों से स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली।
वर्ष 2012 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण अस्पताल, राजवंशीनगर, पटना को हड्डी रोग के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया, जहां पर हड्डी रोग से संबंधित सभी प्रकार के इलाज की अच्छी व्यवस्था सुनिश्चित हो सके। इस अस्पताल परिसर में ही 215 करोड़ रुपए की लागत से 400 बेड के अति विशिष्ट अस्पताल भवन के निर्माण की स्वीकृति दी गई।
इस अति विशिष्ट अस्पताल में समुचित इलाज के लिए 66 चिकित्सकों सहित कुल 140 पदों का सृजन किया गया है। इस अस्पताल भवन के निर्माण से यहां इलाज के लिए आने वाले हड्डी रोग के मरीजों को काफी सुविधा होगी।
आज पटना के राजेन्द्र नगर में 21 एकड़ के भू-खण्ड पर नवनिर्मित डॉ॰ ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम साईंस सिटी के विभिन्न भागों का निरीक्षण किया। इस दौरान वहां उपस्थित बच्चों से मुलाकात की और उनका उत्साहवर्द्धन किया।
डॉ॰ ए॰पी॰जे॰ अब्दुल कलाम साइंस सिटी का भवन बहुत अच्छा बना है। इस साइंस सिटी क��� विशिष्ट आइडियाज के साथ बनाया गया है। यह साइंस सिटी विज्ञान और नवाचार का एक ऐसा आधुनिक केन्द्र है जो सभी आयु वर्ग के लोगों को आकर्षित कर रहा है।
देश में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को जानने-समझने के लिए यह आकर्षक और अनूठा केन्द्र है। युवा वर्ग के बीच विज्ञान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से इस साईंस सिटी का निर्माण किया गया है। यहां आने वाले छात्र-छात्राओं को विज्ञान की मूलभूत बातें, ��तिविधियों और विज्ञान के सिद्धांतों को सरलता से समझने में सुविधा होगी तथा विज्ञान में उनकी रूचि बढ़ेगी।
आभार बिहार 🙏
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उत��साह के साथ भाग लेकर मतदान का नया रिकार्ड बनाने के लिए प्रदेश की सभी जागरूक जनता, खासकर माताओं-बहनों का कोटि-कोटि अभिनंदन।
📊 आज @ECISVEEP द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 66.91% मतदान हुआ, जो अब तक का सर्वाधिक आंकड़ा है।
पहला चरण: 65.08%
दूसरा चरण: 68.76%
कुल मतदान: 66.91%
पुरुष मतदान: 62.8%
महिला मतदान: 71.6%
जदयू एवं एनडीए के सभी कार्यकर्ता साथियों को भी हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने इस चुनाव को शां��िपूर्ण एवं सुचारु ढंग से सफल बनाने के लिए अथक परिश्रम किया। हमें विश्वास है, बिहार को विकास की नई ऊंचाई पर पहुंचाने का NDA का संकल्प पूरा होगा।
#VoterTurnout #BiharElections #BiharElection2025
@NitishKumar @Jduonline
बिहार में वर्ष 2005 से पहले महिलाओं के उत्थान के लिए कोई काम नहीं होता था। महिलाएं घर की चहारदीवारी से बाहर नहीं निकल पाती थीं। शाम 6 बजे के बाद सड़कों पर महिलाओं का निकलना बिल्कुल असुरक्षित था।सत्ता संरक्षित अपराधी इतने बेखौफ हो चुके थे कि लड़कियां स्कूल-कॉलेज जाने में भी डरती थीं। अगर कोई बेटी स्कूल जाती थी तो उनके माता-पिता तब तक परेशान रहते थे, जब ���क बेटी वापस घर नहीं लौट जाती थी। लड़कियों की शिक्षा के लिए कोई विशेष इंतजाम नहीं था तथा बहुत कम संख्या में बेटियां पढ़ पाती थीं। राज्य के अधिकांश हिस्सों में खासकर ग्रामीण इलाकों की होनहार बच्चियां प्रारंभिक शिक्षा के बाद आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं। सरकार को राज्य की आधी आबादी की कोई चिंता नहीं थी और न ही उन्हें समाज में उचित प्रतिनिधित्व तथा मान-सम्मान मिलता था।
24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नई सरकार का गठन हुआ, तब से हमलोग महिला शिक्षा एवं उनके विकास के लिए लगातार काम कर रहे हैं। महिलाओं को रोजगार देने एवं उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। अब राज्य की महिलाएं ��पनी मेहनत से न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही हैं बल्कि वे प्रदेश की प्रगति में भी अपना योगदान दे रही हैं।
हमलोगों ने सबसे पहले वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं एवं वर्ष 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। अब तक 4 चुनाव हो चुके हैं, बड़ी संख्या में महिलाएं मुखिया, सरपंच, पंच, जिला परिषद अध्यक्ष, पंचायत समिति सदस्य, वार्ड सदस्य, नगर नि��म मेयर, नगर परिषद तथा नगर पंचायत अध्यक्ष पदों पर चुनकर आ रही हैं। इससे समाज में बहुत बड़ा परिवर्तन आया है। जो महिलाएं आमतौर पर घरों में सिमटी रहती थीं, अब वे इन सभी कामों में अपनी सीधी सहभागिता सुनिश्चित कर रही हैं। यह एक बहुत ही प्रभावी सामाजिक परिवर्तन है।
इसके साथ ही वर्ष 2013 से ही पुलिस बहाली में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तथा महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए बिहार पुलिस में महिला सिपाहियों की बड़ी संख्या में नियुक्ति की गई। बिहार पुलिस में महिलाओं की भागीदारी आज देश में किसी भी राज्य से ज्यादा है।
वर्ष 2016 से हमलोगों ने सभी सरकारी नौकरियों में राज्य की महिलाओं को 35 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान कर दिया। इसके अलावा प्राथमिक शिक्षक नियुक्ति में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। इससे सभी सरकारी क��षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। इसके अलावा राज्य के इंजीनियरिंग एवं मेडिकल कॉलेजों में नामांकन में भी लड़कियों को 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
लड़कियों की शिक्षा के लिए भी हमलोगों ने कई काम किए हैं। कन्या उत्थान योज��ा के तहत राज्य में बेटी के जन्म से लेकर उनके स्नातक तक की शिक्षा के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बेटी के जन्म पर उनके माता-पिता को दो हजार रुपए, बेटी की उम्र एक वर्ष पूरा होने पर आधार निबंधन के बाद माता-पिता को एक हजार रुपए तथा बच्ची की उम्र दो वर्ष पूरा होने पर वैक्सीनेशन के लिए माता-पिता को दो हजार रुपए दिए जाते हैं। इस प्रकार से बेटी के जन्म से लेकर उनके दो वर्ष की उम्र तक हर माता-पिता को 5 ह��ार रुपए दिए जाते हैं। इसके बाद जब बच्ची आंगनबाड़ी केंद्र या विद्यालय जाना शुरू करती है, तो उसके पोषण का भी उचित ध्यान रखा जाता है। बेटियों के पोषाहार तथा पोशाक के लिए राशि दी जाती है। पहली कक्षा से ही बेटियों को पोशाक राशि के लिए पैसे तथा मुफ्त में किताबें दी जाती हैं। लड़कियों को 9वीं कक्षा से साइकिल खरीदने के लिए 3 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इसके साथ ही बेटियों की शिक्षा के लिए प्रत्येक पंचा���त में 10+2 उच्च विद्यालयों का निर्माण कराया गया है, ताकि बेटियां अपने घर से नजदीक पढ़ाई कर सकें। मैट्रिक पास करने पर उन्हें 10 हजार रुपए, इंटर की परीक्षा पास करने पर 25 हजार रुपए और स्नातक पास बेटियों को ��गे की पढ़ाई के लिए 50 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इस प्रकार से राज्य में बेटियों के जन्म से लेकर स्नातक तक की पढ़ाई पूरी होने तक कुल 94,100 रुपए दिए जा रहे हैं। इन सभी योजनाओं के कारण बेटियों की शिक्षा स्तर में व्यापक बदलाव आया है और उनका आत्मविश्वास बढ़ा है।
वर्ष 2005 से पूर्व महिलाओं को प्रसव के दौरान सरकार के स्तर पर कोई स्वास्थ्य सुविधा नहीं मिल पाती थी। हमलोगों ने जननी बाल सुरक्षा योजना के तह�� गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली राशि को डी०बी०टी० के माध्यम से प्रसव के 48 घंटे के अंदर सीधे उनके खाते में भेजना शुरू कर दिया। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए 1,400 रुपए तथा शहरी क्षेत्र की महिलाओं को 1,000 रुपए दिए जाते हैं। इससे एक ओर जहां राज्य के ग्रामीण और शहरी इलाकों में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर मातृ-शिशु मृत्यु दर में भी लगातार कमी आ रही है। वर्ष 2005 में शिशु मृत्यु दर जहां प्रति एक हजार पर 61 थी, वहीं अब घटकर मात्र 27 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से भी बेहतर है। वहीं मातृ मृत्यु दर जहां वर्ष 2004-06 में प्रति लाख 312 थी, जो अब घटकर मात्र 118 हो गई है। टीकाकरण का आच्छादन 18 प्रतिशत से बढ़कर 90 प्रतिशत से भी अधिक हो चुका है।
राज्य में पहले स्वयं सहायता समूह की संख्या नहीं के बराबर थी। वर्ष 2006 में हमलोगों ने विश्व बैंक से ऋण लेकर स्वयं सहायता समूह का गठन किया, जिसे जीविका नाम दिया गया। राज्य में स्वयं सहायता समूहों की संख्या लगभग 11 लाख हो गई है, जिससे जुड़कर अब तक 1 करोड़ 40 लाख जीविका दीदियां आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। आज बिहार में जीविका दीदियों द्वारा अनेक काम जैसे जैविक खेती, कृषि विपणन व्यवसाय, मछली पालन, मधुमक्खी पालन एवं उद्यमिता विकास से जुड़े काम कराए जा रहे हैं। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ रही है तथा वे अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख रही हैं। राज्य के सभी अस्पतालों में मरीजों एवं उनके परिजनों तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति आवासीय विद्यालयों में दीदी की रसोई चलाई जा रही है। दीदी की रसोई में लोगों को सस्ती दर पर अच्छा खाना मिल रहा है, जिसकी देश भर में सराहना हो रही है। अब दीदी की रसोई का विस्तार राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों एवं सरकारी अस्पतालों में किया जा रहा है।
अब राज्य के शहरी क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूहों का गठन किया जा रहा है तथा इनकी संख्या 36 हजार से अधिक हो गई है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में अब तक 3 लाख 85 हजार से अधिक महिलाएं जीविका से जुड़ कर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं। इसके साथ ही, महिला उद्यमी योजना के तहत महिलाओं को अपना उद्यम करने के लिए 10 लाख रुपए तक की सहायता राशि दी जा रही है।
हमलोगों ने हाल ही में राज्य में मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना की शुरुआत की है। इस��े तहत राज्य के सभी परिवारों की एक महिला को अपनी पसंद का रोजगार शुरू करने के लिए 10 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। मुझे बहुत खुशी है कि महज डेढ़ महीने के अंदर 1 करोड़ 41 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपए डी०बी०टी० के माध्यम से भेज दिए गए हैं। ये राशि महिलाओं को अपनी पसंद का रोजगार करने के लिए दिए गए हैं, यह राशि उनसे कभी भी वापस नहीं ली जाएगी। साथ ही इस राशि से जो महिलाएं अच्छा रोजगार करेंगी उन्हें आगे 2 लाख रूपए की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी। ये सब काम हमलोग महिलाओं के उत्थान और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कर रहे हैं।
आप सबको पता है कि सामाजिक कुरीतियों व कुप्रथाओं से महिलाएं ज्यादा प्रभावित होती हैं। इसे लेकर हमलोगों ने समाज सुधार अभियान के तहत राज्य में शराबबंदी के साथ-साथ बाल विवाह एवं दहेज प्रथा को समाप्त करने पर जोर दिया। राज्य में महिलाओं की मांग पर ही शराबबंदी लागू की गई है। समाज में इसका बहुत अच्छा असर है तथा सभी जगह शांति का माहौल है। राज्य के चतुर्मुखी विकास से महिलाओं को काफी फायदा हुआ है।
इस प्रकार से महिलाओं की तरक्की एवं उन्हें आत्मनिर्भर तथा सशक्त बनाने के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ऐसे ही राज्य की महिलाओं के उत्थान के लिए काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
जय बिहार!
वर्ष 2005 से पहले राज्य में आपदा से बचाव के लिए कोई काम नहीं होता था। बाढ़, सुखाड़, अगलगी, भूकंप आदि से बचाव के लिए कोई ठोस इंतजाम नहीं किए जाते थे। उत्तर बिहार के लोग बाढ़ से, तो दक्षिण-पश्चिम ��िहार के लोग सूखे से परेशान रहते थे, लेकिन तत्कालीन सरकार को इसकी तनिक भी चिंता नहीं होती थी। प्राकृतिक आपदा से बचाव के लिए संसाधनों का घोर अभाव था। आपदा के नाम पर सरकारी खजाने में जमकर लूट-खसोट होती थी। बाढ़ पीड़ितों को जो थोड़ा बहुत मिलता था, उसके लिए भी उन्हें महीनों तक मशक्कत करनी पड़ती थी। सत्ता में बैठे लोग बाढ़ पीड़ित लोगों तक राहत-सामग्री पहुंचाने के नाम पर करोड़ों रुपए डकार गए थे। तब ��ाढ़ राहत घोटाले की चर्चा देश भर के अखबारों की सुर्खियां बनती थीं।
24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नई सरकार का गठन हुआ, तो हमलोगों ने प्राथमिकता के आधार पर आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में कई काम किए। सबसे पहले राज्य में हमलोगों ने अलग से आपदा प्रबंधन विभाग बनाया, ताकि आपदा से जुड़े हर तरह के काम एक ही छत के नीचे हो सके। वर्ष 2010 में आपदाओं के लिए मानक संचालन ��्रक्रिया (SOP) का सूत्रण किया गया, जिसमें बाढ़ एवं सुखाड़ की पूर्व तैयारियों, राहत एवं बचाव तथा बाढ़ एवं सुखाड़ के पश्चात् की जाने वाली कार्रवाइयों का स्पष्ट उल्लेख है। आपदा के वक्त बिना देर किए प्रभावित लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की ताकि आपदा की घड़ी में लोगों को त्वरित राहत मिल सके। संकट के समय जरूरतमंद लोगों को तुरंत सूखा राहत सामग्री जैसे- चूड़ा, गुड़, आटा, चावल, दाल, चना, पीने के लिए पानी का पैकेट, जरूरी दवाइयां, तिरपाल, स्वच्छता किट, बाल्टी, साबुन, मोमबत्ती, माचिस और कपड़े जैसी बुनियादी घरेलू सामान पहुंचाने का इंतजाम किया गया। इसके साथ ही बाढ़ पीड़ित परिवारों को हमलोगों ने तत्काल एक क्विंटल अनाज देना शुरू किया। उस वक्त कुछ लोग ‘क्विंटलिया बाबा‘ कहने लगे थे। साथ ही प्रभावित लोगों के लिए सामुदायिक रसोई की भी व्यवस्था की जाती है।
हमलोग 2007 से ही बाढ़ पीड़ितों की क��िनाइयों को देखते हुए आनुग्रहिक अनुदान देना शुरू किया, जो अब बढ़कर 7,000 रुपए हो चुका है, जो सीधे बाढ़ प्रभावित लोगों के खाते में डी०बी०टी० के माध्यम से भेज दी जाती है। हमलोगों का यह मानना है कि राज्य के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है। ऐसे में आपदा की घड़ी में लोगों को किसी प्रकार की दिक्कत का सामना नहीं करना पड़े, इसका हमलोग पूरा ख्याल रखते हैं।
प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए सुरक्षित स्थान पर राहत शिविर बनाकर उनके लिए रसोई की व्यवस्था की जाती है, जह���ं खाने-पीने की पूरी व्यवस्था रहती है। राहत कैंपों में साफ-सफाई एवं भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। बाढ़ पीड़ितों के लिए सुबह का नाश्ता, दिन एवं रात्रि का पौष्टिक भोजन, बच्चों के लिए दूध, महिलाओं के लिए सैनेटरी नैपकिन आदि की व्यवस्था भी की जाती है। राहत शिविरों में बाढ़ पीड़ितों के स्वास्थ्य की देखभाल हेतु चिकित्सकों के नेतृत्व में चिकित्सा शिविर लगाकर बाढ़ पीड़ितों के स्वास��थ्य का पूरा ख्याल रखा जाता है। छोटे बच्चों के लिए राहत शिविरों में आंगनबाड़ी केन्द्रों का भी संचालन कराया जाता है।
बाढ़ राहत शिविरों में शरण लेने वाले लोगों के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से वस्त्र तथा बर्तन के साथ-साथ साबुन, तेल, कंघी आदि की व्यवस्था की जाती है। साथ ही बाढ़ अवधि में आबादी निष्क्रमण के दौरान नाव पर, अस्पताल में अथवा राहत शिविरों में जन्म लेने वाले प्रत्येक नवजात बच्चे के लिए 10 हजार रूपए एवं प्रत्येक नवजात बच्ची के लिए 15 हजार रूपए की राशि प्रदान की जाती है।
बाढ़ के दौरान बड़ी संख्या में पशु भी प्रभावित होते हैं। बाढ़ राहत शिविरों के समीप पशु राहत शिविरों का भी संचालन किया जाता है, जहां पशुओं के लिए चारा, पानी एवं चिकित्सा की उपयुक्त व्यवस्था रहती है। पशु शिविरों के अतिरिक्त बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चलंत पशु चिकित्सा दल की भी प्रतिनियुक्ति की जाती है।
बरसात की आहट के साथ ही उत्तर बिहार में नेपाल से सटे हिमालय से निकलने वाली नदियों कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और महानंदा नदी पर संबंधित विभागों के अधिकारियों को समुचित संसाधन उपलब्ध कराकर सतर्कता बरतने के निर्देश जारी कर दिए जाते हैं, ताकि अचानक इन नदियों में अधिक पानी आने पर संपत्ति, जान-माल और कृषि को होने वाले नुकसान कम किया जा सके। इसी प्रकार से सूखा प्रभावित दक्षिण-पश्चिम बिहार विशेषकर गया, नवादा, रोहतास और औरंगाबाद में कम वर्षापात की स्थिति को भांपते हुए जल संकट की स्थिति से निपटने के उपाय किए गए हैं। ��सी तरह से अग्निकांड और भूकंप आने पर बचाव के लिए भी कई वैज्ञानिक उपाय किए गए।
आपदा से बचाव के लिए हमलोगों ने वर्ष 2007 में आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 की धारा 14 के तहत बिहार राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (BSDMA) का गठन किया। इसका मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन के लिए एक समग्र, सक्रिय और प्रौद्योगिकी-संचालित रणनीति विकसित कर एक सुरक्षित और आपदा प्रतिरोधी बिहार का निर्माण करना था। हमलोगों ने राज्य में बाढ़ ��े आपदा के समय लोगों के जानमाल की सुरक्षा के लिए कई उपाय किए हैं। वर्ष 2010 में नेशनल डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (NDRF) की तर्ज पर राज्य में अपने स्तर से स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स (SDRF) का गठन किया। एस०डी०आर०एफ० राज्य में बाढ़, भूकंप, आग और अन्य प्राकृतिक व मानव-जनित आपदाओं के दौरान खोज, बचाव और राहत कार्यों में अपनी अहम भूमिका निभा रही है।
इसी प्रकार से हमलोगों ने वर्ष 2011 में सूखा प्रबंधन नीति बनाई, जिसमें कृषि और जल संसाधन विभाग के समन्वय के कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए। वर्ष 2012 में लागू किए गए दूसरे कृषि रोड मैप में सूखा-रोधी फसलों और जल-संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया गया। इसके साथ ही ��ल-संरक्षण और सिंचाई परियोजनाओं के तहत वर्ष 2019 में राज्य में ‘जल-जीवन-हरियाली अभियान‘ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य सूखे से निपटने के लिए वर्षा जल संग्रहण, तालाब पुनर्जीवन, पौधारोपण और भू-जलस्तर को बढ़ाना है। राज्य में बड़ी संख्या में जल संरचनाओं जैसे तालाब, आहर, पईन, कुएं और सोख्ता का जीर्णोद्धार एवं निर्माण कराया गया है। इससे भू-जल स्तर में काफी सुधार हुआ है। सूखा प्रभावित जिलों में मिनी ल���फ्ट सिंचाई परियोजनाएं और सौर पंप सेट भी लगाए जा रहे हैं, ताकि राज्य में ‘हर खेत तक सिंचाई का पानी' पहुंचाया जा सके, फसलों की अच्छी पैदावार हो सके और किसानों की आमदनी बढ़े। कृषकों के लिए डेडिकेटेड कृषि फीडर की व्यवस्था की गई है ताकि किसानों को सिंचाई हेतु अनवरत बिजली मिलती रहे।
बाढ़ की समस्या के निदान के लिए तथा सिंचाई सुविधाओं के विकास के लिए लगातार काम किया जा रहा है। मार्च 2025 तक कुल 370 किलोम��टर नए तटबंध बनाकर लगभग 14 लाख हेक्टेयर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को सुरक्षित किया गया है। इसके अतिरिक्त लगभग 600 किलोमीटर तटबंधों का उच्चीकरण एवं सुदृढ़ीकरण कराया गया है। अब त��बंध टूटने की घटनाएं कम हुई हैं, जिससे बाढ़ की समस्या से लोगों को राहत मिली है। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना, कमला बराज परियोजना, टाल क्षेत्र विकास योजना, अधूरी पड़ी दुर्गावती सिंचाई परियोजना तथा नदियों से गाद निकासी योजना के क्रियान्वयन से लोगों को न सिर्फ बाढ़ की समस्या से निजात मिली है अपितु किसानों को सिंचाई की व्यापक सुविधा उपलब्ध हुई है।
इस प्रकार से राज्यवासियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से बचाने के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। आगे भी हमलोग इसी तरह काम करते रहेंगे और बाढ़ का स्थाई समाधान सुनिश्चित करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा भी करते हैं।
जय बिहार!
वर्ष 2005 से पहले के वो दिन आप सबको याद होंगे, जब बिहार में बेरोजगारी चरम पर थी। नौकरी और रोजगार के अभाव में राज्य के युवा जहां-तहां भटक रहे थे। युवा वर्ग के सामने नौकरी और ���ोजगार को लेकर अंधकार छाया हुआ था। तत्कालीन सरकार की युवाओं को नौकरी और रोजगार देने को लेकर नीति और नीयत दोनों ही स्पष्ट नहीं थी। उस वक्त किसी भी विभाग में कोई बहाली नहीं निकलती थी। कुछ पदों पर बहाली निकलती भी थी तो सत्ता पोषित लोग उसका सौदा करने में लग जाते थे। नौकरी के बदले जमीन लिखवा ली जाती थी। आलम ये था कि राज्य के युवा रोजगार की खोज में दर-दर भटकने और दूसरे राज्यों में पलायन को मजबूर थे। उ��� वक्त राज्य की शासन प्रणाली इतनी खराब हो चुकी थी कि बिहार के युवा जब दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए जाते थे, तो उन्हें हेय दृष्टि से देखा जाता था, उन्हें कई तरह की यातनाएं झेलनी पड़ती थी। राज्य के बाहर युवाओं की बिहार और बिहारी के नाम पर खिल्ली उड़ायी जाती थी। राज्य के बाहर लोग अपनी पहचान छिपाने को विवश थे, क्योंकि उस वक्त बिहारी कहला��ा अपमान का विषय बन गया था। कितने युवा नौकरी की आस में बैठे रह गये और उनकी नौकरी करने की उम्र निकल गई। आज कल फिर वही लोग सरकारी नौकरी और रोजगार देने के नाम पर राज्य के युवाओं को गुमराह कर रहे हैं और भ्रम फैला रहे हैं। आप सबको मैं बताना चाहता हूं कि ये लोग सिर्फ झूठ बोलते हैं, उनके पास युवाओं को नौकरी और रोजगार को लेकर न तो कोई नीति है और न ही कोई ठोस आधार है।
24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नयी सरकार का गठन हुआ, तो हमलोगों ने युवाओं के लिए सरकारी नौकरी और रोजगार मुहैया कराने को लेकर एक ठोस नीति बनायी। इसके लिए सबसे पहले हमलोगों ने राज्य के अलग-अलग विभागों में खाली पड़े पदों पर बहाली का निर्णय लिया। वर्ष 2005 से 2020 के बीच राज्य में 8 लाख से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी और लाखों लोगों को रोजगार दिया गया। राज्य में और ज्यादा युवाओं को नौकरी और रोजगार देने के लिए हमलोगों ने रोडमैप तैयार किया और वर्ष 2020 म���ं सात निश्चय-2 के तहत 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी और 10 लाख लोगों को रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जब युवाओं को नौकरी और रोजगार के लिए चौतरफा काम शुरू हुआ, तो इसके सुखद परिणाम आने शुरू हो गये तथा आपको जानकर आश्चर्य होगा कि इन पांच वर्षों (वर्ष 2020 से 2025) में 10 लाख के बजाय 40 लाख लोगों को रोजगार दिया जा चुका है, जबकि 10 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी भी दे दी गयी है। ऐसे में अब तक 50 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी एवं रोजगार दे दिया गया है।
अब हमलोगों ने अगले 5 वर्षों (वर्ष 2025-2030) में 1 करोड़ युवाओं को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए विभिन्न विभागों में बड़ी संख्या में नए पद सृजित किये जाएंगे। युवाओं को रोजगार पाने योग्य बनाने हेतु व��भिन्न तकनीकी संस्थानों में बड़े पैमाने पर कौशल विकास के लिए प्रशिक्षण का इंतजाम किया गया है। राज्य में उद्योगों की स्थापना एवं निवेश की व्यवस्था कर रोजगार के अवसर पैदा किये जायेंगे। नई उद्योग नीति के तहत राज्य में उद्योग-धंधे लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसे लेकर विशेष औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन पैकेज की भी व्यवस्था की गयी है, ताकि प्रदेश में बड़ी संख्या में रोजगार का सृजन हो ���के। एन0डी0ए0 की डबल इंजन की सरकार की दुगुनी ताकत से राज्य में बड़े पैमाने पर उद्योग लगाये जायेंगे। उद्योगों की स्थापना के लिये हर जिले में जमीन अधिग्रहण कर लैंड बैंक बनाये जा रहे हैं, जिससे आसानी से जमीन उपलब्ध हो सकेगी। बिहार में अब उद्योगों की स्थापना के लिये सभी गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचनायें जैसे- अच्छे सड़क मार्ग, रेलवे एवं हवाई मार्ग से अच्छी सम्पर्कता, निर्बाध विद्युत आपूर्ति एवं विधि व्यवस्था की स्थिति काफी बेहतर है। राज्य में कानून का राज स्थापित है। साथ ही हमलोग यह भी सुनिश्चित करेंगे कि राज्य के युवाओं को रोजगार के लिए किसी मजबूरी में राज्य से बाहर नहीं जाना पड़े।
संविदा पर कार्यरत कर्मियों को उच्चस्तरीय समिति की अनुशंसाओं के आलोक में पहले से ही 60 साल तक की उम्र का कार्यकाल, सरकारी नौकरी में कार्य अनुभव के आधार पर अधिमानता, मानदेय में नियमित वृद्धि की सुविधायें दी जा रही हैं। इन संविदाकर्मियों यथा- विकास मित्र, टोला सेवक, तालिमी मरकज, डाटा इन्ट्री ऑपरेटर एवं अन्य सभी के लिये क्षमतावर्द्धन की व्यवस्था कर उनके अनुभव के आधार पर उन्हें सरकारी कर्मी के अनुरूप सारी सुविधायें दी जायेगी।
बिहार के युवाओं को अधिक से अधिक अवसर उपलब्ध कराने, उन्हें प्रशिक्षित करने तथा सशक्त एवं सक्��म बनाने के उद्देश्य से बिहार युवा आयोग का गठन किया गया है। इसके साथ ही युवाओं के सर्वांगीण विकास के लिये हमलोग राज्य में खेल को भी लगातार बढ़ावा दे रहे हैं ��था विभिन्न खेलों में मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ योजना के तहत 454 खिलाड़ियों को विभिन्न स्तर की सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। हाल के दिनों में बिहार ने कई खेलों का सफल आयोजन भी कराया है। महिला हॉकी एषिया कप 2025, पुरूष हॉकी एषिया कप 2025, सेपक टाकरा विष्व कप 2025 तथा खेलो इंडिया यूथ गेम्स-2025 की सफल मेजबानी बिहार की खेल उपलब्धियों का प्रमाण है। खेल और खिलाड़ियों के विकास को प्राथमिक���ा देते हुए कई अच्छी योजनाएं चलायी जा रही हैं। इसी कड़ी में बिहार खेल छात्रवृति योजना की शुरुआत की गयी है, जिससे राज्य के 725 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को आर्थिक सहायता राशि दी गयी है। इसके तहत बुनियादी स्तर 500 खिलाड़ियों को प्रति वर्ष 3 लाख रुपये, विकासात्मक स्तर पर 200 खिलाड़ियों को प्रति वर्ष 5 लाख रुपये और विशिष्ट स्तर पर 25 खिलाड़ियों को प्रति वर्ष अधिकतम 20 लाख रुपये तक की छात्रवृति दी जा रही है। इससे खिलाड़ियों को प्रशिक्षण तथा खेल प्रतियोगिताओं के लिए वित्तीय सहायता मिल रही है। राज्य में खेल को बढ़ावा देने के लिए पंचायत से लेकर राज्य स्तर तक खेल सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। इसके तहत राज्य के सभी पंचायतों में खेल के मैदान बनवाए जा रहे हैं। इसका मूल मकसद ��्रामीण प्रतिभाओं को मंच देना और ग्रामीण क्षेत्रों में खेल संस्कृति को बढ़ावा देना है। राज्य में अब तक 3,000 से अधिक पंचायतों में खेल मैदान बन चुके हैं।
इस प्रकार से राज्य में अधिक से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी और रोजगार के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। झूठे, भ्रामक एवं काल्पनिक वादे कर लोगों को गुमराह करने वालों के झांसे में न आयें। आगे भी हमलोग ही राज्य के युवाओं को नौक���ी और रोजगार देंगे क्योंकि, हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
जय बिहार!
बिहार में वर्ष 2005 से पहले की सरकार ने पिछड़े, अति पिछड़े, अनुसूचित जाति-जनजाति, दलित-महादलित, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और समाज के वंचित तबकों के ��त्थान के लिये कोई काम नहीं किया। न तो उन्हें उचित मान-सम्मान दिया गया और ना ही शासन में उन्हें किसी तरह की कोई महत्वपूर्ण भागीदारी दी गयी। इन सभी वर्गों के बच्चे-बच्चियों में शिक्षा का घोर अभाव था, लेकिन उस वक्त जिन लोगों की सरकार थी उन्होंने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। समाज के इन तबकों के लोगों में गरीबी और बेरोजगारी लगातार बढ़ती जा रही थी लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जाता था। चुन���व के वक्त जब वोट लेने की बारी आती थी, तो झूठे वादे कर और डरा धमका कर लाठी के बल पर इनका वोट ले लिया जाता था तथा सरकार बनने के बाद सत्ता में बैठे लोग खुद को मालिक समझने लगते थे और राजनीति में सिर्फ अपने परिवार के लोगों को आगे बढ़ाने में लगे रहते थे।
24 नवंबर 2005 को राज्य में जब नयी सरकार का गठन हुआ, तो हमलोगों ने न्याय के साथ विकास के सिद्धांत पर चलते हुये समाज के सभी वर्गों के लोगों के उत्थान एवं हर तब���े के लोगों की तरक्की के लिये काम करना शुरू किया। हमलोगों ने पूरे बिहार को अपना परिवार मानकर सभी तबकों के विकास के लिए काम किया है। समाज में पिछड़े, वंचित एवं निचले ��ायदान पर खड़े लोगों के उत्थान के लिए विशेष कार्य किये गये हैं। इन परिवारों के बच्चे-बच्चियों के लिए अच्छी शिक्षा, युवाओं के लिए नौकरी और रोजगार तथा समाज में उनके मान और सम्मान का पूरा ख्याल रखा गया।
मुझे वो दिन याद है- जब वर्ष 1993 में मंडल कमीशन की तर्ज पर बिहार में अतिपिछड़ों और पिछड़ों को एक वर्ग में डालने की साजिश हो रही थी। तब मैंने स्पष्ट तौर पर इसका विरोध किया और बिल्कुल स्पष्ट शब्दों में कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर जी के द्वारा बिहार में जो आरक्षण नीति लागू की गयी है, उसमें अगर कोई छेड़-छाड़ होगी और उसमें यदि कोई परिवर्तन करने की कोशिश होगी तो हर स्तर पर इसका विरोध किया जायेगा।
बाद में वर्ष 2006 में हमलोगों ने पंचायती राज संस्थाओं एवं नगर निकाय चुनावों में अति पिछड़ा वर्ग के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया। वहीं वर्ष 2016 में राज्य की न्यायिक सेवा में सीधी नियुक्ति में अत्���ंत पिछड़ा वर्ग के लिए 21 प्रतिशत तथा पिछड़े वर्ग के लिए 12 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया। इसके साथ ही वर्ष 2007-08 में पिछड़े वर्ग एवं अत्यंत पिछड़े वर्ग के लोगों के विकास के लिए पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण वि��ाग का गठन किया गया। वित्तीय वर्ष 2008-09 में पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग का वार्षिक योजना बजट मात्र 42.17 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 2025-26 में 1900 करोड़ रुपये हो गया है। अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में जननायक कर्पूरी ठाकुर छात्रावास का निर्माण कराया गया है, जहां रह कर लगभग 4,500 छात्र निःशुल्क शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। इसके अलावा वर्ष 2018 से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा-अति पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों का निर्माण, छात्रावास अनुदान एवं मुफ्त अनाज तथा युवक-युवतियों को सिविल सेवा प्रोत्साहन, ग्राम परिवहन एवं उद्यमी योजना का लाभ दिया जा रहा है।
हमलोगों की सरकार ने राज्य में मुख्यमंत्री ग्राम परिवहन योजना के तहत अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के 33 हजार 644 तथा अति पिछड़े वर्ग के 11 ह��ार 360 युवाओं को रोजगार हेतु वाहन खरीदने के लिए अनुदान वितरित किया है। वहीं, सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना के तहत वर्ष 2018 से बिहार लोक सेवा आयोग एवं संघ लोक सेवा आयोग की प्रारंभिक परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी हेतु क्रमशः 50 हजार रुपये एवं एक लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इसके तहत राज्य में अब तक अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के 4,113 अभ्यर्थियों तथा अति प���छड़ा वर्ग के 6,170 अभ्यर्थियों को प्रोत्साहन राशि दी जा चुकी है। इसी प्रकार से वर्ष 2018 में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के युवक युवतियों के लिए मुख्यमंत्री उद्यमी योजना शुरू की गयी और वर्ष 2020 में जननायक कर्पूरी ठाकुर जी की जयंती पर हुए निर्णय के बाद अति पिछड़ा वर्ग के युवक-युवतियों को भी मुख्यमंत्री उद्यमी योजना का लाभ दिया जा रहा है। इसके तहत उन्हें अपना उद्यम लगाने के लिए 10 लाख रुपये तक की सहायता राशि दी जा रही है, जिसमें 5 लाख रुपये अनुदान और शेष 5 लाख रुपये ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री उद्यमी योजना के तहत अब तक 40,462 युवक-युवतियों को लाभ दिया जा चुका है, जिसमें अनुसूचित जाति- जनजाति वर्ग के 13,664 अति पिछड़ा वर्ग के 9,855 और अपर कास्ट एवं पिछड़ा वर्ग के 8,324 युवा शामिल हैं।
वर्ष 2005 से पूर्व राज्य में 8वीं और 10वीं कक्षा तक कम क्षमता के मात्र 66 अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आवासीय विद्��ालय थे, जिनके भवनों की स्थिति अत्यंत ही दयनीय थी। इन सभी आवासीय विद्यालयों को 10+2 में उत्क्रमित किया गया और प्रत्येक की क्षमता 720 कर दी गयी। इन पुराने आवासीय विद्यालयों में से 45 आवासीय विद्यालयों का नया भवन बना दिया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ष 2021 में 70 नये आवासीय विद्यालयों के निर्माण का फैसला लिया गया, जिसमें से अधिकांश का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। राज्य में अब आवासीय विद्यालयों की कुल आवासन क्षमता 84,240 हो गयी है। इसी प्रकार से वर्ष 2021 में राज्य के सभी जिलों में पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग की छात्राओं के लिए संचालित आवासीय विद्यालयों को भी 10+2 में उत्क्रमित किया गया। फिलहाल राज्य के सभी जिलों में एक-एक और पटना जिले में दो पिछड़ा एवं अति पिछड़ा वर्ग आवासीय विद्यालय संचालित हो रहे हैं।
वर्ष 2023 में राज्य में जाति आधारित गणना करायी गयी, जिसमें लोगों की आर्थिक स्थिति की भी जानकारी ली गयी। इसमें 94 लाख गरीब परिवार पाये गये, जिसमें अपर कास्ट, पिछड़ा-अतिपिछड़ा, महादलित एवं मुस्लिम समुदाय के लोग भी शामिल हैं। इन लोगों के रोजगार हेतु लघु उद्यमी योजना के तहत 2 लाख रुपये की दर से सहायता राशि दी जा रह��� है।
इसके साथ ही अनुसूचित जाति/जनजाति, पिछड़ा एवं अतिपिछड़ा वर्गों में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृति योजना भी चलायी जा रही हैं। पिछड़ा वर्ग एवं अति पिछड़ा वर्ग प्रवेशिकोत्तर छात्रवृति योजना के तहत कक्षा 1 से 10 तक की छात्राओं को प्रतिवर्ष कुल 7,200 रुपये दिये जाते हैं। वहीं कक्षा 11 से लेकर उच्च शिक्षा तक अध्ययनरत पिछड़ा वर्ग एवं अत्यंत पिछड़ा वर्ग के छात्र-छात्राओं को 2,000 रुपये से 4 लाख रुपये तक की छात्रवृति की सुविधा मिल रही है। जबकि छात्रावासों में रह कर पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को 1000 रुपये प्रतिमाह दिये जा रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 226.78 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गयी है। इसी तरह से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति मेधावृत्ति योजना के तहत इन वर्गों के विद्यार्थियों को प्रथम श्रेणी से मैट्रिक पास करने पर 10,000 रुपये एवं द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण होने पर 8,000 रुपये दिये जाते हैं। यह प्रोत्साहन राशि विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाएगी। साथ ही छात्रावासों में रह पढ़ाई करने वाले छात्र-छात्राओं को 1,000 रुपये दिये जा रहे हैं। इस वर्ष के बजट में इस राशि को दोगुना कर 2,000 रुपये का प्रावधान किया गया है। इस वर्ष के बजट में अनुसूचित जाति वर्ग के कल्याण के लिए 19,648.86 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है, जबकि अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 1,735.04 करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं।
हमलोगों ने वर्ष 2008 में ही महादलित समुदाय के लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए महादलित विकास मिशन की स्थापना की और राज्य भर में विकास मित्रों की नियुक्ति की गयी, जो सरकार की विकास योजनाओं का लाभ समाज के वंचित वर्गों तक आज भी पहुंचा रहे हैं। फिलहाल राज्य में लगभग 10 हजार विकास मित्र कार्यरत हैं। अभी हाल ही में विकास मित्रों का मानदेय 13,700 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया गया है तथा टैबलेट खरीदने के लिए एकमुश्त 25,000 रुपये दिये गये हैं। इसके अलावा परिवहन भत्ते में 600 रुपये की वृद्धि की गई है, जो 1,900 रुपये से बढ़कर 2,500 रुपये प्रतिमाह हो गया है। साथ ही स्टेशनरी भत्ते में भी 600 रुपये की वृद्धि की गयी है, जो 900 रुपये से बढ़कर 1,500 रुपये प्रतिमाह हो गया है। इसके साथ ही शिक्षा सेवकों को स्मार्टफोन खरीदने हेतु 10,000 रुपये की राशि दी गयी है और शिक्षण सामग्री खरीदने की राशि को 3,405 रुपये से बढ़ाकर 6,000 प्रति केंद्र प्रतिव��्ष किया गया है। इसी प्रकार से वर्ष 2009 में जनजाति समाज के विकास हेतु ��मेकित थरूहट विकास के कार्यक्रम चलाये गये। इसके तहत आवासीय विद्यालयों एवं छात्रावासों का निर्माण कराया गया तथा जनजाति समुदाय के युवाओं को रोजगार हेतु प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही, वर्ष 2014 में अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए ’स्वाभिमान बटालियन’ का गठन किया गया, जिसका मुख्यालय पश्चिमी चंपारण में है।
राज्य में पिछड़ा, अति पिछड़ा, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, दलित-महादलित, आर्थिक रूप से ��मजोर वर्ग और समाज के वंचित तबकों की तरक्की के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ही काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
जय बिहार!
वर्ष 2005 से पहले बिहार में शिक्षा का हाल बहुत बुरा था। छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं जा पाते थे। सरका���ी स्कूलों के भवन जर्जर हो चुके थे। राज्य में प्रा��मिक विद्यालयों की संख्या बहुत कम थी। शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचे का घोर अभाव था। स्कूलों में बच्चों को बैठने के लिए बेंच-डेस्क उपलब्ध नहीं थे। सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की काफी कमी थी। 1990 से 2005 के बीच राज्य में शिक्षकों की नियुक्ति नाम मात्र की हुई थी। प्रदेश में छात्र-शिक्षक अनुपात बेहद खराब था। उस वक्त राज्य में 65 बच्चों पर मात्र एक शिक्षक होता था। लगभग 12.5 प्रतिशत बच्चे ऐसे थे, जो स्कूलों से पूरी तरह से बाहर थे, यानि शिक्षा से कटे हुए थे। इसमें सबसे ज्यादा बच्चे समाज के वंचित तबके महादलित और अल्पसंख्यक समुदाय के थे, जो स्कूल नहीं जा पाते थे। उस वक्त जो थोड़े-बहुत शिक्षक थे भी, तो उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल पाता था। बहुत कम संख्या में बच्चियां स्कूल जा पाती थीं। पांचवीं कक्षा के बाद बच्चियां आगे की पढ़ाई नहीं कर पाती थीं। राज्य में शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी थी��� सत्ता में बैठे लोगों ने शिक्षा को भद्दा मजाक बनाकर रख दिया था। 10वीं के बाद आगे की पढ़ाई के लिए राज्य में अच्छे कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान नहीं के बराबर थे। उच्च और तकनीकी शिक्षा के लिए अच्छे संस्थानों का घोर अभाव था। स���्र इतनी देर से चलता था कि छात्रों को स्नातक की पढ़ाई पूरी करने में 5 वर्ष तक लग जाते थे। उच्च और तकनीकी शिक्षा पाने के लिए राज्य के युवा देश के दूसरे राज्यों में जाने को मजबूर थे। उस वक्त सत्ता में बैठे लोगों ने राज्य में नये स्कूलों के निर्माण के बजाय ‘चरवाहा विद्यालय’ खोलकर शिक्षा के प्रति अपने कर्तव्यों एवं दायित्वों की इतिश्री समझ ली थी।
24 नवंबर 2005 को राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद हमल���गों ने प्राथमिकता के आधार क्रमवार शिक्षा-व्यवस्था में सुधार का काम शुरू किया। इसके लिए सबसे पहले हमलोगों ने शिक्षा के बजट में साल दर साल लगातार बढ़ोत्तरी की। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि राज्य में वर्ष 2005 में शिक्षा का कुल बजट मात्र 4366 करोड़ रुपये था। अब 2025-26 में शिक्षा विभाग का बजट 60,964.87 करोड़ हो गया है, जो राज्य के कुल बजट का लगभग 22 प्रतिशत है।
राज्य भर में युद्ध स्तर पर नये स्कूल भवनों के निर्म��ण कार्य के साथ ही पुराने स्कूल भवनों के जीर्णोद्धार का कार्य शुरू कराया। वर्ष 2005 में राज्य में जहां कुल 53 हजार 993 विद्यालय थे, वर्ष 2025 में यह संख्या बढ़कर 75 हजार 812 हो गयी है। फिलहाल प्रदेश में 97.61 प्रतिशत टोले सरकारी विद्यालयों के आच्छादित हो चुके हैं। सभी पंचायतों में उच्च विद्यालय की स���थापना और 12वीं तक की पढ़ाई शुरू की गई ताकि छात्राओं को पढ़ाई के लिए दूर नहीं जाना पड़े और उन्हें शिक्षा प्राप्त करने में सुविधा मिल सके। इस बीच शिक्षकों की संख्या भी लगातार बढ़ाई गई है। वर्ष 2024 में बिहार लोक सेवा आयोग के जरिए 2 लाख 38 हजार 744 शिक्षक नियुक्त किए गये एवं वर्ष 2025 में 36,947 प्रधान शिक्षकों के साथ ही 5,971 प्रधानाध्यापकों की नियुक्ति की गई। साथ ही वर्ष 2006 में स्थानीय निकायों के माध्यम से नियोजित 3,68,000 शिक्षकों को भी सक्षमता परीक्षा के जरिए नियमित किया जा रहा है। इस तरह से अब राज्य में सरकारी शिक्षकों की संख्या लगभग 6 लाख हो गई है। राज्य में इतनी बड़ी संख्या में शिक्षक नियुक्ति की चर्चा आज देशभर में की जा रही है। स्कूलों में बेंच-डेस्क का इंतजाम किया गया। अब विद्यालयों में हाईटेक शिक्षा व्यवस्था के लिए ‘उन्नयन बिहार योजना’ लागू की गयी। आज राज्य में 10+2 तक के अधिकांश विद्यालयों में कंप्यूटर लैब, ई-लाइब्रेरी और प्रयोगशाला आदि की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए प्रखंड एवं पंचायत स्तर पर अत्याधुनिक पुस्तकालय खोले गये हैं, जहां छात्रों को कॉपी-किताब और अन्य पठन-पाठन सामग्रियों के साथ ही हाईस्पीड इंटरनेट की सुविधा भी मुहैया करायी जा रही है।
पहले विद्यालयों में लड़कियों की संख्या काफी कम थी। वर्ष 2006-07 में हमारी सरकार ने छात्र-छात्राओं के लिए पोशाक योजना की शुरुआत की। वहीं वर्ष 2008 में 9वीं वर्ग की छात्राओं के लिए साइकिल योजना शुरू की गयी, जिसकी सराहना दुनिया के कई देशों में हुई और दूसरे राज्यों ने भी साइकिल योजना को अपनाया। बाद में वर्ष 2010 ��े साइकिल योजना का लाभ लड़कों को भी दिया जाने लगा। इसके फलस्वरूप आज मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट में छात्राओं की संख्या छात्रों से भी अधिक हो गई है।
हमलोगों ने पहले एक सर्वे कराया, जिसमें पता चला कि जो 12.5 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं, उसमें सबसे अधिक समाज के निचले तबकों, महादलित वर्ग और मुस्लिम समुदाय के बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों को स्कूल लाने के लिए विशेष प्रयास किये गये। महादलित परिवा�� के बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने के लिए टोला सेवक तथा मुस्लिम समुदाय के बच्चे-बच्चियों को स्कूल लाने के लिए टोला सेवक (तालिमी मरकज) की नियुक्ति की गयी, जिन्हें अब शिक्षा सेवक कहा जाता है, जो इन बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने में मदद करते हैं। हमारी सरकार के इन प्रयासों के कारण आज लगभग शत प्रतिशत बच्चे विद्यालयों में पढ़ाई करने पहुंच रहे हैं।
शिक्षा-व्यवस्था में व्यापक सुधार करते हुए हमारी सरकार ने राज्य में एकेडमिक कैलेंडर लागू किया। अब बिल्कुल समय पर मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं हो रही हैं तथा समय से परीक्षा परिणाम भी आ रहे हैं। इसके साथ ही हमलोगों ने राज्य में उच्च एवं तकनीकी पर भी विशेष ध्यान दिया। वर्ष 2005 में राज्य में जहां मात्र 10 राजकीय विश्वविद्यालय थे आज उसकी संख्या बढ़कर 21 हो गई है, जबकि 4 केंद्रीय विश्वविद्यालय और 8 नये निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना ���ुई है। हमलोगों ने राज्य के सभी प्रखंड मुख्यालयों में चरणबद्ध तरीके से डिग्री कॉलेज की स्थापना का भी निर्णय लिया है, जिस पर तेजी से काम चल रहा है। इसके अलावा राज्य सरकार के प्रयास एवं सहयोग से प्रदेश में कई राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना भी की गई है। इसमें चाणक्य राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना के बिहटा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT), प��ना में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (NIFT), बोधगया में भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM), भागलपुर में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (IIIT) प्रमुख हैं। उच्च शिक्षण संस्थानों में व्याख्याताओं की बहाली के लिए ��मलोगों ने वर्ष 2017 में बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग का गठन किया।
वर्ष 2005 से पहले राज्य में इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों की बहुत कम थी। आज सभी 38 जिलों में इंजीनियरिंग कॉलेज संचालित हो रहे हैं। पॉलिटेक्निक संस्थानों की संख्या 13 से बढ़कर 46 हो गयी है तथा आईटीआई की संख्या 23 से बढ़कर 152 हो गई है। मेडिकल की शिक्षा के लिए पटना में एम्स और आई॰जी॰आई॰एम॰एस॰ के अलावा राज्य में सरकारी चिकित्सा मह���विद्यालयों की संख्या 12 है। इसके अतिरिक्त दरभंगा एम्स को मिलाकर राज्य में कुल 21 नये सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय निर्माणाधीन हैं, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जायेगा। इस प्रकार राज्य में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल संख्या 35 हो जायेगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 9 निजी चिकित्सा महाविद्यालय भी खोले जा रहे हैं। वर्ष 2005 से पहले बिहार के बच्चे इंजीनियरिंग एवं मेडिकल की पढ़ाई के लिए राज्य क�� बाहर जाया करते थे क्योंकि उस समय प्रदेश के सरकारी अभियंत्रण महाविद्यालयों में मात्र 460 सीटें थीं। अब सीटों की संख्या बढ़कर 14469 हो गई है। ऐसे में यहां के छात्रों को उच्च, तकनीकी और मेडिकल शिक्षा के लिए अब मजबूरी में बाहर जाने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि अन्य राज्यों से छात्र यहां आकर पढ़ाई कर रहे हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में हमलोगों के इन्हीं प्रयासों के कारण आज राज्य क�� साक्षरता दर लगभग 80 प्रतिशत हो गई है तथा महिलाओं की साक्षरता दर जो वर्ष 2001 में मात्र 33.57 प्रतिशत थी, अब यह बढ़कर 73.91 प्रतिशत हो गई है।
राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में यह आमूलचूल परिवर्तन सिर्फ आंकड़ों की बात नहीं, बल्कि यह शिक्षा के प्रति हमलोगों की प्राथमिकता, प्रतिबद्धता और सकारात्मक पहल की तस्वीर है। बिहार में शिक्षा अब वास्तव में हर बच्चे का अधिकार है। मुझे खुशी इस बात की है कि हमलोगों ने व���गत 20 वर्षों में अपने राज्य और समाज को शिक्षित बनाने में काफी हद तक कामयाबी हासिल की है।
राज्य के बच्चे-बच्चियों और युवाओं को अच्छी शिक्षा देने के लिए हमलोगों ने जो काम किए हैं, उसे आपलोग याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ही काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
जय बिहार!
आज बाबूबरही, खजौली, हरलाखी, सुरसंड, रून्नी सैदपुर, पारू एवं महुआ विधानसभा क्षेत��रों में एन०डी०ए० प्रत्याशियों के पक्ष में रोड शो तथा उच्च विद्यालय का खेल मैदान, जंदाहा में चुनावी जनसभा को संबोधित किया। इस रोड शो एवं चुनावी जनसभा में एन॰डी॰ए॰ प्रत्याशियों को भारी मतों से विजयी बनाने की उपस्थित जनसमूह से अपील की।
रोड शो एवं चुनावी जनसभा में खराब मौसम के बावजूद बड़ी संख्या में महिलाओं सहित सभी वर्गों के लोगों की उपस्थिति रही। मतदाताओं से मिल रहे इस अपार समर्थन के लिए उनका हृदय से धन्यवाद और आभार।
हमने समाज के सभी वर्गों के लोगों के हित में कार्य किया है। राज्य में प्रेम, भाईचारा और शांति का वातावरण स्थापित हुआ है। पिछले 20 वर्षों से हम निरंतर विकास के कार्यों में जुटे हैं। हमारा लक्ष्य है कि बिहार देश के सर्वाधिक विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल ह��। (1/3)
वर्ष 2005 से पहले के वो दिन आप सबको याद होंगे, जब राज्य में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से चरमरायी हुई थीं। स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई काम नहीं होता था। छोटी-मोटी बीमारियों के इलाज के लिए भी लोगों को मजबूरी में राज्य के बाहर जाना पड़ता था। उस वक्त डॉक्टर और नर्सों की संख्य��� बहुत कम थी। स्वास्थ्य केन्द्र लगभग बंद ही रहते थे। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के नाम पर सिर्फ एक से दो कमरों के जर्जर भवन होते थे। उन अस्पतालों में न डॉक्टर होते थे, न नर्स और न ही इलाज की कोई व्यवस्था होती थी। अस्पतालों में दवा की उपलब्धता नगण्य थी। जर्जर अस्पताल भवनों में लोग जानवर बांध देते थे। अस्पताल के बेड पर मरीज की जगह कुत्ते लेटे हुए पाये जाते थे, तब ऐसी कई तस्वीरें देखने को मिलती थी। स्वास्थ्य-व्यवस्था की स्थिति बहुत भयावह थी। उस दौर की बदहाल व्यवस्था में बिहार का पूरा हेल्थ सिस्टम आईसीयू में अपनी अंतिम सांसें ��िन रहा था।
मुझे याद है- जब मैं सांसद था तो एक बार मेरी मां की तबीयत खराब हो गई थी और तब मैं अपनी मां को लेकर पटना के पीएमसीएच स्थित आईजीआईसी आया था, लेकिन वहां की व्यवस्था बहुत खराब थी। बाद में जब हमलोगों की सरकार बनी तो सबसे पहले हमलोगों ने वहां की व्यवस्था को दुरुस्त करवाया और आज भी मुझे कहीं कोई कमी दिखाई पड़ती है तो उसे मैं ठीक करवाता हूं।
उस वक्त स्वास्थ्य विभाग का कुल बजट मात्र 705 करोड़ रु��ये था। सरकारी अस्पतालों में एक्स-रे, पैथोलोजी आदि जांच की स��विधाएं उपलब्ध नहीं होती थीं। राज्य में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या मात्र 6 थी, वे भी 1990 के पूर्व ही बने थे और जर्जर हालत में थे। 1990 से 2005 के बीच राज्य में एक भी नया चिकित्सा महाविद्यालय नहीं बनाया गया था। यही कारण था कि वर्ष 2005 में और उससे पूर्व राज्य के सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए औसतन प्रतिमाह मात्र 39 मरीज ही आते थे यानि प्रतिदिन एक से दो ही मरीज सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंच पाते थे।
24 नवंबर 2005 को राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद हमलोगों ने प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतरी के लिए काम करना शुरू किया। स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार और उसमें सुधार के लिए विशेष अभियान चलाया गया। सबसे पहले वर्ष 2006 से हमलोगों ने अस्पतालों में निःशुल्क दवा का वितरण शुरू किया, जिसका शुभारंभ तत्कालीन माननीय उपराष्ट्रपति स्व॰ भैरो सिंह शेखावत जी द्वारा पटना स्थि�� गार्डिनर रोड अस्पताल से किया गया। राज्य भर के अस्पतालों में विभिन्न प्रकार की दवायें निःशुल्क उपलब्ध करायी गयीं और आज की तारीख में मरीजों को 500 से अधिक तरह की दवायें निःशुल्क उपलब्ध करायी जा रही हैं। साथ ही, सरकारी संस्थानों में अनेक बीमारियों की जांच के लिए निःशुल्क सुविधा मरीजों को उपलब्ध करायी जा रही है। आज राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और सदर अस्पतालों में सीटी स्कैन की सुविधा �����हैया करायी गयी है, जबकि राज्य के 7 चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पतालों में रियायती दर पर एमआरआई की सुविधा उपलब्ध है। वर्ष 2005 से पूर्व राज्य के किसी भी सरकारी अस्पताल में डायलिसिस की सुविधा नहीं थी, आज सभी 38 जिलों के स्वास्थ्य संस्थानों में लोक-निजी साझेदारी के तहत डायलिसिस केंद्र संचालित किये जा रहे हैं।
इसके अलावा राज्य के सभी जिलों में कैंसर स्क्रीनिंग की व्यवस्था की जा रही है, जबकि कुछ चिह्नित अस्पतालों में कीमोथेरेपी की व्यवस्था की गयी है। साथ ही, मुजफ्फरपुर में 425 करोड़ रुपये की लागत से होमी भाभा कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र बनाया जा रहा है।
राज्य के निर्धन मरीजों पर गंभीर बीमारियों के इलाज का बोझ नहीं पड़े, इसके लिए वर्ष 2006-07 में हमारी सरकार ने मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष की शुरुआत की। तब से लेकर अब तक करीब 2 लाख मरीजों को गंभीर बीमारियों की चिकित्सा हेतु 1550 करोड़ रुपये से अधिक की राशि अनुदान के रूप में दी गयी है।
वर्ष 2004-05 में स्वास्थ्य विभाग का बजट मात्र 705 करोड़ रुपये था, जो बढ़कर अब 20035 करोड़ रुपये से भी अधिक हो गया है। स्वास्थ्य सुविधाओं में विस्तार का ही परिणाम है कि आज राज्य में कई स्वास्थ्य सूचकांकों जैसे संस्थागत प्रसव, शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर और संपूर्ण टीकाकरण में अप्रत्याशित सुधार हुआ है।
वर्तमान में राज्य में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या 12 हो गयी है। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान को विस्तारित करते हुए नये मेडिकल कॉलेज की स्थापना एवं केंद्र सरकार द्वारा संचालित चिकित्सा महाविद्यालयों को भी जोड़ा जाय तो यह संख्या 15 हो गयी है। इसके अतिरिक्त राज्य में 20 नये सरकारी चिकित्सा महाविद्यालय निर्माणाधीन है, जिसे जल्द ��ी पूरा कर लिया जायेगा। इस प्रकार राज्य में सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों की कुल संख्या 35 हो जायेगी। इसके अतिरिक्त प्रदेश में 9 निजी चिकित्सा महाविद्यालय भी खोले जा रहे हैं। पटना स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के साथ-साथ दरभंगा में भी नये अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही पटना चिकित्सा महाविद्यालय एवं अस्पताल (PMCH) को 5462 बेड के अस्पताल के रूप ���ें पुनर्विकसित कर देश के सबसे बड़े अस्पताल के रूप में बनाया जा रहा है। अन्य पुराने 5 मेडिकल कॉलेज एवं अस्पतालों को भी 2500 बेड के अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है। पटना स्थित इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान को भी 3000 बेड के अस्पताल के रूप में विकसित किया जा रहा है।
राज्य में अब जिला अस्पतालों की संख्या बढ़कर 35 हो गई है, जबकि अनुमंडलीय अस्पतालों की संख्या 55 और स्वास्थ्य उपकेंद्रों की संख्या 10788 से भी अधिक हो गयी है। यही कारण है कि आज सरकारी अस्पतालों में प्रति महीने 11600 से भी अधिक मरीज अपना इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
राज्य के लोगों की सुविधा के लिए हमलोगों ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ही काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।
जय बिहार!
आप सभी को पता है वर्ष 2005 से पहले बिहार में बिजली की क्या हालत थी? पूरा प्रदेश अंधेरे में डूबा रहता था। राज्य के गांवों की बात तो दूर, राजधानी पटना में मुश्किल से लोगों को 7 से 8 घंटे ही बिजली मिल पाती थी। कभी-कभी रात में बिजली आने पर सोये हुये लोग जल्दी से उठकर पानी का मोटर चलाने के लिये दौड़ पड़ते थे क्योंकि लोगों को यह भरोसा नहीं रहता था कि बिजली फिर कितने घंटे बाद आयेगी। बिजली के खंभों पर जो तार थ��, वह भी बेहद जर्जर अवस्था में थे। ट्रांसफार्मर जले रहते थे। राज्य के ग्रामीण इलाकों में नहीं के बराबर बिजली की आपूर्ति होती थी। ऐसे में खंभों पर बिजली की तारों को लोग कपड़े सुखाने के उपयोग में लाते थे। थोड़ी-बहुत बिजली की आपूर्ति होती भी थी, तो इतना कम वोल्टेज होता था कि बल्ब भी ठीक से नहीं जल पाते थे।
वर्ष 2005 से पहले राज्य में बिजली की अधिकतम आपूर्ति 700 मेगावाट तक होती थी, जबकि राज्य में बिजली का उत्पादन नगण्य था। किसानों के लिए बिजली की कोई व्यवस्था नहीं थी। कृषि कार्य के लिए कोई डेडिकेटेड फीडर नहीं थे। बिजली के अभाव में उद्योग-धंधे दम तोड़ चुके थे एवं राज्य का आर्थ���क विकास पूरी तरह थम गया था।
बिजली आपूर्ति की बात तो दूर, राज्य के हजारों गांवों तक तो बिजली पहुंची ही नहीं थी। किसानों के खेत सूखे पड़े रहते थे, कारखाने बंद थे, और युवाओं के सपने अंधेरे में खो जाते थे। वो दौर केवल बिजली की कमी का नहीं था, वो दौर था बदइंतज़ामी का, लापरवाही का और ऐसी सरकार का, जिसने न कभी योजना बनाई, न नीयत दिखाई।
आपको जानकर आश्चर्य होगा कि वर्ष 2005 में राज्य में प्रति व्यक्ति बिजल�� की खपत मात्र 75 यूनिट थी तथा उपभोक्ताओं की संख्या मात्र 17 लाख 31 हजार थी। ऐसे में बिजली से सरकार को राजस्व भी बहुत ��म मिल पाता था। राज्य में सौर ऊर्जा की भी व्यवस्था नहीं थी तथा राज्यवासी पूरी तरह से लालटेन युग में जीने को मजबूर थे। राज्य में बिजली की स्थिति बदतर थी, ऊपर से तत्कालीन सरकार की प्रशासनिक अक्षमता के कारण बिजली की चोरी आम बात थी।
24 नवंबर 2005 को राज्य में जब हमलोगों की सरकार बनी तो बिजली व्यवस्था में सुधार के संकल्प के साथ अनेक कार्य किए गए। विद्युत आपूर्ति, बिजली का उत्पादन तथा पावर ट्रांसमिशन ��्रणाली आदि को प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया गया। ग्रामीण विद्युतीकरण की दिशा में कई कदम उठाये गये। हमारी सरकार बिजली-व्यवस्था में सुधार के लिए लगातार प्रयासरत रही। 15 अगस्त 2012 को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना के गांधी मैदान में मैंने कहा था कि ‘हम बिजली की स्थिति सुधारेंगे। अगर बिजली की स्थिति में हम सुधार नहीं लायेंगे तो 2015 के चुनाव में मैं वोट मांगने लोगों के बीच नहीं आऊंगा���। इसके लिए 31 अक्टूबर 2012 को तत्कालीन बिहार राज्य विद्युत बोर्ड को समाप्त कर 5 विद्युत कंपनियां बनायीं गयीं तथा बिजली के क्षेत्र में संरचनात्मक सुधार किये गये।
हमारी सरकार ने वर्ष 2015 में ‘हर घर बिजली‘ निश्चय की शुरुआत की, जिसके तहत निर्धारित समय के दो माह पूर्व ही अक्टूबर 2018 में सभी इच्छुक घरों को विद्युत कनेक्शन दे दिया गया। इस काम को पूरा करने के लिए बड़े पैमाने पर आधारभूत संरचनाओं का निर्माण किया गया। बड़ी संख्या में नये ग्रिड उपकेंद्र तथा नये विद्युत शक्ति उपकेंद्रों की स्थापना की गयी। साथ ही नये ट्रांसफार्मर एवं तार लगाये गये।
किसानों के खेत तक सस्ती बिजली पहुंचाने के लिए डेडीकेटेड कृषि फीडर का निर्माण कराया गया है। किसानों को अनुदानित दर पर मात्र 55 पैसे प्रति यूनिट की दर से सस्ती बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है तथा कृषि के लिए निःशुल्क विद्युत कनेक्शन दिये गये हैं। इसके लिए हमारी सरकार ने वर्ष 2024-25 में 4 हजार 395 करोड़ रूपये का अनुदान दिया है।
राज्य के सरकारी एवं निजी भवनों पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने की व्यवस्था की गयी है तथा राज्य भर में सोलर पावर प्लांट लगाये जा रहे हैं। आज शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में 24 घंटे ��िर्बाध बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित हो सकी है। अब राज्य में बिजली की अधिकतम आपूर्ति 700 मेगावाट से बढ़कर 8 हजार मेगावाट से भी ज्यादा हो गयी है तथा बिजली उत्पादन क्षमता 540 मेगावाट से बढ़कर 8 हजार 850 मेगावाट से भी अधिक हो गयी है। प्रति व्यक्ति ऊर्जा की खपत 5 गुणा से भी ज्यादा बढ़कर 363 यूनिट हो गयी है तथा विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या 12 गुणा से भी ज्यादा बढ़कर करीब सवा दो करोड़ हो गयी है। राज्य में फिलहाल ��्रिड उपकेंद्रों की संख्या चार गुणा बढ़कर 172 हो गयी है, जबकि विद्युत शक्ति उपकेंद्रों की संख्या तीन गुणा बढ़कर 1 हजार 260 हो गयी है। बिजली वितरण ट्रांसफार्मर की संख्या 10 गुणा बढ़कर 3 लाख 50 हजार हो गया है। विद्युत संचरण लाइन की कुल लंबाई 3 गुणा बढ़कर 20 हजार किलोमीटर से भी अधिक हो गयी है, जबकि 33 केवी वितरण लाइन की लंबाई 3 गुणा बढ़कर 19 हजार किलोमीटर हो गयी है।
राज्य के नागरिकों पर बिजली बिल का भार कम पड़े इसके लिए हमलोग शुरू से ही उपभोक्ताओं को अनुदानित दर पर बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिये वर्ष 2024-25 में बिजली उपभोक्ताओं को राज्य सरकार द्वारा 15 हजार 343 करोड़ रुपये का विद्युत अनुदान दिया गया है। इस अनुदान के अतिरिक्त अब तो हमारी सरकार राज्य के सभी घरेलू उपभोक्ताओं को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली दे रही है, जिसका फायदा हर बिहारवासी को मिल रहा है। हमलोगों ने यह भी तय किया है कि अगले तीन वर्षों में सभी घरेलू उपभोक्ताओं से सहमति लेकर उनके घर की छतों पर अथवा नजदीकी सार्वजनिक स्थल पर सौर ऊर्जा संयंत्र लगाकर लाभ दिया जाएगा।
हमारी सरकार ने बिजली के क्षेत्र में बिहार को आत्मनिर्भर बनाकर ‘ऊर्जस्वित बिहार‘ के संकल्प को पूरा किया है। इसे याद रखियेगा। आगे भी हमलोग ऐसे ही काम करते रहेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं। राज्य के चहुंमुखी विकास के लिए हम निरंतर कार्य करते रहेंगे। अब बिहार का भविष्य रोशनी से भरा है। हमलोगों ने बिजली के क्षेत्र में इतना काम कर दि���ा है कि अब लालटेन युग कभी नहीं लौटेगा।
वर्ष 2005 से पहले का वो दिन आप सब को याद होगा जब जर्जर सड़कें बिहार की पहचान बन गईं थीं। राज्य के किसी भी हिस्से में आने-जाने में ��ोगों को सोचना पड़ता था। थोड़ी दूरी का सफर तय करने में भी लोगों को घंटों लग जाते थे। सड़कों पर हिचकोले खाती गाड़ियां और मन में भय लेकर लोग सफर करने को मजबूर थे। सड़क में गड्ढा था या गड्ढे में सड़क, यह तय कर पाना मुश्किल था। किसी गांव में यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाती थी, तो इलाज के लिए अस्पताल तक पहुंचने से पहले कई लोग रास्ते में ही दम तोड़ देते थे। नदियों, नालों और नहरों पर पुल-पुलिया नही��� होने के कारण सीतामढ़ी, शिवहर जैसे राज्य के कई जिलों का संपर्क राजधानी पटना से टूट जाता था। नदी, नालों और नहरों पर पुल-पुलिया नहीं होने की वजह से गांवों-कस्बों के लोग पूरी बरसात में जल कैदी बन जाते थे। छात्र-छात्राएं बरसात के दिनों में महीनों तक स्कूल नहीं जा पाते थे। उस वक्त मैं तत्कालीन केंद्र सरकार में मंत्री था। जब भी बिहार आता था और अपने क्षेत्र में जनता से मिलने जाता था तो सड़कों के अभाव ���ें कई किलोमीटर तक पैदल ही चलना पड़ता था। ऐसा भी सुनने में आता है कि पहले जिन लोगों के हाथ में राज्य क�� सत्ता थी, वे कहते थे कि राज्य में अच्छी सड़कें बन जाएंगी तो पुलिस जल्दी गांवों में पहुंच जाएगी और अपराधी पकड़े जाएंगे। इसका मतलब ये कि वे खुद भी अपराध को संरक्षण देते थे।
वर्ष 2005 से पहले राज्य में बहुत कम सड़कें थीं और जो सड़कें थीं उनका बुरा हाल था। सड़कों के मेंटेनेंस की कोई उचित व्यवस्था नहीं थी। सड़कों के मेंटेनेंस के नाम पर खूब भ्रष्टाचार होता था। अलकतरा घोटाला भी उसी वक्त हुआ था। 2005 से प���ले गंगा नदी पर मात्र 4 पुल, कोसी नदी पर 2 पुल, गंडक नदी पर 4 पुल, सोन नदी पर 2 पुल थे जो 1990 के काफी पहले बने थे। वर्ष 2005 से पहले पूरे राज्य में मात्र 11 रेल ओवरब्रिज (आर॰ओ॰बी॰) थे, जिसके चलते कई जगहों पर घंटों जाम की स्थिति होती थी।
राज्य की ग्रामीण बसावटों को बारहमासी संपर्कता प्रदान करने की कोई ठोस योजना नहीं थी। तत्कालीन प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी की सरकार ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क य��जना लागू की थी, जिसमें एक हजार या उससे अधिक आबादी वाली बसावटों को ही जोड़ने की ��ोजना थी, लेकिन तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा इस पर ध्यान नहीं दिया गया। सड़कों के लिए भू-अर्जन नहीं किया गया, जिस कारण यह योजना भी आंशिक रूप से ही कार्यान्वित हो सकी।
24 नवंबर 2005 को राज्य में नई सरकार के गठन के बाद प्राथमिकता के आधार पर नई सड़कों का निर्माण कराया गया, पुरानी सड़कों का जीर्णोद्धार एवं चौड़ीकरण कराया गया तथा पुल एवं पुलियों का जाल बिछाया गया। बड़े पैमाने पर बने पथों के रख-रखाव के ल���ए एक विशिष्ट दीर्घकालीन अनुरक्षण नीति लागू की गई।
वर्ष 2005 में हमलोगों की सरकार बनने के बाद राज्य में लगभग 20 नए बड़े पुल बनाए गए। इसमें गंगा नदी पर भोजपुर में वीर कुंवर सिंह सेतु, पटना में जे॰पी॰ सेतु, मुंगेर में श्रीकृष्ण सिंह सेतु, पटना से राघोपुर दियारा को जोड़ने वाली कच्ची दरगाह-राघोपुर सिक्स लेन पुल, औंटा-सिमरियाधाम पुल के निर्माण के साथ ही बक्सर स्थित वीर कुंवर सिंह पुल पर अतिरिक्त 2 ले�� का निर्माण कराया गया। गंगा नदी पर 10 नए पुलों का निर्माण कार्य जारी है। वहीं कोसी नदी पर कोसी महासेतु समेत 3 नए पुलों का निर्माण कराया गया है तथा 3 अतिरिक्त पुलों का निर्माण कार्य जारी है। गंडक नदी पर 4 नए पुल बनाए गए हैं तथा 3 नए पुलों का निर्माण कार्य जारी है। सोन नदी पर 4 नए पुल बनाए गए हैं तथा 2 नए पुलों का निर्माण कार्य जारी है। इस तरह से राज्य में अलग-अलग नदियों पर फिलहाल 18 नए पुलों का निर्माण कराया जा रहा है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा।
इसके अलावा राज्य की छोटी नदियों और नहरों पर पुल-पुलियों के निर्माण के लिए वर्ष 2007-08 में मुख्यमंत्री सेतु निर्माण योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत अब तक 6 हजार से अधिक पुल-पुलियों का निर्माण कराया जा चुका है। इस योजना के तहत 2024 के बाद 649 नए पुल के निर्���ाण की स्वीकृत दी गई है। कई पुराने पुलों को 4 लेन से 6 लेन पुल में परिवर्तित किया जा रहा है। अब राज्य में रेल ओवरब्रिज की संख्या 11 से बढ़कर 87 हो गई है और 40 से अधिक नए रेल ओवरब्रिज बनाए जा रहे हैं।
राज्य में यातायात को सुगम बनाने के लिए कई बाईपास पथों का निर्माण कराया जा रहा है। साथ ही टोलों एवं बसावटों को संपर्कता प्रदान करने के लिए राज्य निधि से मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना लागू की गई है जिसके तहत 1,18,005 किलोमीटर लंबाई की सड़कों का निर्माण करा दिया गया है। बाकी बचे टोलों एवं बसावटों को जल्द से जल्द पक्की सड़क से जोड़ दिया जाएगा।
हमलोगों ने कई पथों एवं पुल-पुलियों का निर्माण कराकर वर्ष 2016 में राज्य के सुदूर क्षेत्रों से 6 घंटे में पटना पहुंचने के लक्ष्य को पूरा किया। इस लक्ष्य को पूरा कर 2018 में 5 घंटे में राज्य के किसी भी कोने से पटना पहुंचने का नया लक्ष्य निर्धारित किया गया। अब इसे भी पूरा क��� लिया गया है तथा इसे और घटाने के लिए नए एक्सप्रेस-वे, नए पुल, बाईपास, एलिवेटेड रोड एवं आरओबी के निर्माण पर तेजी के काम किया जा रहा है।
हमारी सरकार ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिए। आगे भी हमलोग ही काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं। (1/2)
वर्ष 2005 से पहले बिहार हर क्षेत्र में पिछड़ गया था। विकास के कार्य पू��ी तरह से ठप पड़ गए थे। आधारभूत संरचनाओं के विकास के लिए कोई काम नहीं होता था। नये भवनों का निर्माण तो दूर की बात थी, पहले से बने भवनों का रखरखाव और जीर्णोद्धार तक नहीं हो पाता था। उबड़-खाबड़ और टूटी-फूटी सड़कें बिहार के पिछड़ापन की पहचान बन गयी थीं। इतनी समृद्ध ऐतिहासिक विरासत वाला राज्य पूरी दुनिया में उपहास का पात्र बन गया था। राज्य के बाहर लोग अपनी पहचान छिपाते थे, क्योंकि उस वक्त बिहारी कहलाना अपमान का विषय हो गया था। देश के अन्य राज्यों के लोग बिहार को हेय दृष्टि से देखते थे।
वर्ष 2005 में राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद आधारभूत संरचनाओं के विकास के क्षेत्र में कई अभूतपूर्व कार्य किये गये। राज्य में नये भवनों के निर्माण के साथ-साथ ऐतिहासिक भवनों और पर्यटन स्थलो��� के विकास पर जोर दिया गया। राज्य में कई विश्वस्तरीय आधुनिक आधारभूत संरचनाओं का निर्माण कराया गया, जिसकी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सराहना भी हुई। इन परियोजनाओं के निर्माण से राज्य के लोगों को काफी फायदा हुआ है तथा राज्य की छवि बेहतर हुई है।
बीते 20 वर्षों में राज्य में कई विश्वस्तरीय पथों का निर्माण कराया गया, जबकि कई एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य जारी है। इसमें जे०पी० गंगा पथ, अ��ल पथ, पाटलि पथ, बिहटा-सरमेरा पथ, मीठापुर-महुली पथ, लोहिया पथ चक्र, बख्तियारपुर-रजौली पथ, पटना-गया-डोभी पटना-मुजफ्फरपुर फोर लेन, पटना-बख्तियारपुर-मोकामा पथ तथा ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर प्रमुख हैं। वाराणसी कोलकाता एक्सप्रेस-वे, आमस-दरभंगा एक्सप्रेस-वे, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेस-वे, गोरखपुर-सिलीगुड़ी एक्सप्रेस-वे और रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेस-वे का कार्य निर्माणाधीन है, जिसे तीव्र गति से पूरा किया जा रहा है।
इन एक्सप्रेस-वे और हाई स्पीड कॉरिडोर के बनने से राज्य में न सिर्फ आवागमन बेहद सुगम हो गया है बल्कि राज्य में आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आयी है। राज्य का तीव्र गति से वि��ास हो रहा है और लोगों की आमदनी बढ़ रही है।
इसके साथ ही हमारी सरकार ने राज्य में कई ऐतिहासिक भवनों का भी निर्माण कराया है। इनमें पटना का सम्राट अशोक कन्वेंशन केंद्र स्थित ज्ञान भवन, बापू सभागार तथा सभ्यता द्वार, बिहार संग्रहालय, अंजुमन इस्लामिया भवन, बापू टावर, सरदार पटेल भवन, बापू परीक्षा परिसर, हज भवन, पटना समाहरणालय, पटना सिटी का प्रकाश पुंज, ओपी शाह सामुदायिक भवन, गया का राज्य अतिथिगृह, महाबोधि कन्वेंशन केंद्र तथा बिपार्ड भवन, दरभंगा में तारामंडल, पश्चिम चंपारण में वाल्मीकि सभागार और दिल्ली में नया बिहार सदन प्रमुख है। ये सभी अत्याधुनिक भवन सिर्फ नई संरचनायें ही नहीं हैं बल्कि बदलते बिहार की पहचान हैं।
इसी तरह से पर्यटन और ईको टूरिज्म के क्षेत्र में भी हमारी सरकार लगातार शानदार कार्य कर रही है। इसमें मुख्य रूप से राजगीर में घोड़ा-कटोरा का विकास, जू-सफारी का निर्माण, राजगीर नेचर सफारी (ग्लास स्काई वॉक) का निर्माण, वेणुवन एवं पांडु पोखर का सौंदर्गीकरण, नवादा के ���कोलत जल प्रपात में पर्यटकीय सुविधाओं का विकास, राजगीर एवं मंदार में नये रोप-वे का निर्माण, पटना में बुद्ध स्मृति पार्क का निर्माण, मधुबनी में मिथिला हाट का निर्माण शामिल है। इन कार्यों ने बिहार पर्यटन को आज विश्व मानचित्र पर लाकर रख दिया है।
पटना के कंकड़बाग में पाटलिपुत्र स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, राजगीर खेल अकादमी एवं खेल विश्वविद्यालय, पटना मेट्रो परियोजना, पटना में विश्वस्तरीय डॉ० ए०��ी० जे० अब्दुल कलाम साइंस सिटी का निर्माण, वैशाली में बुद्ध सम्यक ��र्शन संग्रहालय का निर्माण तथा गया में विष्णुपद मंदिर के पास रबर डैम का निर्माण कराया गया है। जबकि पटना में बिहार संग्रहालय एवं पटना संग्रहालय को भूमिगत टनल से जोड़ने का काम तेजी से चल रहा है।
पिछले दो दशकों में बिहार राज्य में हवाई सेवाओं की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुयी है। राज्य में बुनियादी ढांचे को मजबूत करते हुये हवाई यातायात का विस्तार किया गया है। पटना में अत्याधुनिक नया एयरप��र्ट टर्मिनल बनाया गया है। साथ ही दरभंगा एवं पूर्णिया में हवाई अड्डे भी संचालित हो चुके हैं। इसके साथ-साथ बिहटा, रक्सौल तथा वीरपुर हवाई अड्डों का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया गया है एवं वाल्मीकिनगर, मधुबनी, मुंगेर, सहरसा तथा मुजफ्फरपुर हवाई अड्डों को विकसित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है।
राज्य में आधारभूत संरचनाओं की मजबूती के लिए हमारी सरकार बजट का भी पूरा इंतजाम कर रही है। आप स���को पता है वर्ष 2004-05 में राज्य का बजट लगभग 24 हजार करोड़ रुपये था। आज बिहार का बजट 3 लाख 16 हजार करोड़ रुपये भी अधिक हो गया है। हमलोग कुशल वित्तीय प्रबंधन करते हुए बढ़े हुए बजट का उपयोग राज्य के सर्वांगीण विकास में कर रहे हैं।
हमलोगों ने जो आपके लिए काम किए हैं, उसे याद रखिएगा। आगे भी हमलोग ही काम करेंगे। हमलोग जो कहते हैं, उसे पूरा करते हैं।