@Ashok_Kashmir सिख बाबा तो अपने जन्मदिन पर तलवार से केक काट रहा। अखबार में फोटू भी आई। कैप्शन आया कि तलवार से खुले आम यों इस्तेमाल कानून के खिलाफ़ है। हम कहे कि सब जेब में पड़ा हो तो कौन पूछता है?
@Ashok_Kashmir जिन्हें ईरान का भूगोल,इतिहास, ईराक - ईरान युद्ध, दुनिया में अमेरिकी हस्तक्षेप और उनके परिणामों का ज्ञान नहीं ऐसे सब वि��ेषज्ञ अमेरिकी जीत तय मानते थे। उन्हें पता नहीं था कि शाह के ईरान और आज में क्या फ़र्क है? अलग - थलग ईरान सालों से क्या कर रहा था ये शायद अब समझे होंगे लोग।
@ravish_journo यू पी में तो सारे ऐसे तत्व योगी जी के प्रशासन के कारण थर - थर काँप रहे थे। ऐसा बंगाल चुनाव के दौरान बताया गया था । अब क्या हो गया अचानक?
@gadhway_nilesh@Ashok_Kashmir गाज़ा क्या ईरान के कब्ज़ में था? वह शुरू से ही इज़राइल के आतंकवाद का आधार रहा है। ईरान का नुकसान बहुत हुआ है लेकिन मज़बूर अमेरिका है संधि के ल���ए। युद्धबंदी अमेरिका ने यों ही नही लागू की थी। कुछ पढ़ लिख कर बात किया करो।
@Ashok_Kashmir कुछ नहीं निकलने वाला है। भाजपा पहुंचते ही सब शुरू हो जाते हैं। पहले कुछ नहीं बोले जब आप की ओर से राज्यसभा में गए थे। इतने ईमानदार थे तो न जाते। अभी भी कौन सा रिज़ाइन किया होगा? बने क्यों हुए हैं? दल बदला है तो सीट भी छोड़ो। अब तुम्हारा क्या हक है उस सीट पर? भाजपा से सी लो।
@AadeshRawal यह मत भूलिए कि कम्युनिस्ट पार्टी को निबटाने के लिए ममता बनर्जी ने ही भा ज पा से गठजोड़ किया था। उस समय बंगाल में भा ज पा का कोई नामलेवा नहीं था। पराजय के बाद वो इंडिया गठबंधन को याद कर रही हैं लेकिन बंगाल को भा ज पा के हवाले करने की दोषी वही हैं।
@Ashok_Kashmir इनके लिए कुछ भी बड़ी बात नहीं है। ये भी नहीं सोच रहे कि छात्रों के अलावा ये मामला परीक्षा की पवित्रता और सरकार की प्रतिष्ठा से भी जुड़ा हुआ है। वैसे ये श्रीमान ऐसे वक्तव्य जब तब देते रहते हैं।
@Ashok_Kashmir वैस इम्तिहान भी न देना चाहें तो दूसरा आपकी जगह परीक्षा दे देगा। पैसे तो अधिक लगेंंगे ही। अगर परीक्षा देने वाला फंस गया और जेल गया तो पैसा वापस। लंबा खेला है और जो चाहोगे वही मिलेगा अगर खीसा में पीसा है तो। सुना है कि साक्षात्कार तक सब कुछ मैनेज हो जाता है।
@Ashok_Kashmir संभव ही नहीं है���। इम्तेहान लेने वालों को पैसे कमाने हैं और इम्तिहान लेने वालों पैसे के दम पर नौकरी पानी हैं। पढ़ना - लिखना नहीं है। वो बेकार का काम है। तो किसी को पैसा लेना है और किसी को पैसा देना है। लेकिन मैने सुना है कि ये काम बड़ी ईमानदारी से होता है। नो सलेक्शन पैसा वापस।