बीएसपी पार्टी में ASP को मिलना जरूरी है
लेकिन भविष्य में कभी ये अलग हो तो सिर्फ ASP ही अलग हो
जिससे बीएसपी पार्टी या पार्टी के सिंबल पर कोई प्रभाव न पड़े
@Mayawati
ब���पा और सपा को 50+50% पर गठबंधन में यूपी चुनाव में उम्मीदवार उतारने चाहिए
सभी शहरी सीट सपा के हिस्से में जाए तो अच्छा होगा
15 % से ज्यादा सीट सामान्य में नहीं दी जाय
@Mayawati
@yadavakhilesh
दो भाई के झगड़े का फायदा अक्सर पड़ोसी उठता है
विशाल आबादी वाले अपने भारत देश में ’बहुजन समाज’ अर्थात् बहुजनों के मसीहा भारतरत्न बोधिसत्व परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को आज उनकी जयंती पर प्रातः मेरे द्वारा शत्-शत् नमन, पुष्पां��लि एवं अपार श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ ही बी.एस.पी. के लोगों द्वारा पूरे देश भर में ख़ुद व अपने परिवार सहित उन्हें पूरी मिशनरी भावना के साथ भावभीनी श्रद्धांजलि एवं श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के लिये सभी लोगों का तहेदिल से आभार, शुक्रिया एवं धन्यवाद।
सर्वविदित है कि बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का पूरा ज���वन देश के ग़रीबों उपेक्षितों, शोषितों तथा जातिवाद एवं सामंतवाद से पीड़ित महिलाओं आदि समेत ’बहुजन समाज’ की सुरक्षा, सम्मान व उत्थान के लिये अत्यन्त ही कड़े संघर्ष में बीता, और अन्ततः जिसकी गारण्टी उन्होंने संविधान में सुनिश्चित करने का ऐतिहासिक कार्य किया और अमर हो गये और जिसके लिये देश हमेशा उनका कृतज्ञ रहेगा।
किन्तु काश, देश की केन्द्र व यहाँ राज्यों की सत्ता में रहने वाली पार्टियाँ बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के अति-मानवतावादी, सर्वजन-हितैषी व बहुजन-कल्याणकारी संविधान के पवित्र उद्देश्यों को प्राप्त करने में सही से सफल हो पातीं तो भारत अभी तक स्वावलम्बी/आत्मनिर्भर व विकसित देश बनकर यहाँ के करोड़ों बहुजनों की अपार ग़रीबी, बेरोज़गारी, जातिवादी द्वेष, शोषण व जुल्म-ज़���यादती आदि से मुक्त समता एवं न्याय-युक्त जीवन लोगों को ज़रूर दे पाता।
अगर ऐसा नहीं हो पाया है तो क्यों? इसका जवाब ढूंढने पर देश में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर का ’सामाजिक परिवर्तन व आर्थिक मुक्ति’ का कारवाँ चुनावी सफलता भी हासिल करके अपनी मंज़िल की ओर ज़रूर आगे बढ़ेगा। जय भीम, जय भारत
देश के संसद में आज केन्द्र सरकार द्वारा लाये ग���े बजट में विभिन्न योजनाओं, परियोजनाओं, वादों और आश्वासनों के सम्बन्ध में भविष्य में इनके परिणामों को लेकर यही लगता है कि इनके नाम तो बड़े-बड़े हैं, किन्तु जमीनी स्तर पर इनके दर्शन छोटे ना हो तो बेहतर होगा। इसीलिए सर्वसमाज के हित में केवल ��ातें ना हो बल्किी इनपर सही नीयत से अमल भी जरूरी
वैसे तो केन्द्र सरकार का बजट सत्ताधारी पार्टी की नीति व नीयत में चाल, चरित्र व चेहरे का आईना होता है, जिसमें यह झलक मिलती है कि सरकार की सोच वास्तव में गरीब व बहुजन-हितैषी होकर व्यापक देशहित की है या फिर पूँजीवादी सोच की पोषक बड़े-बड़े पूँजीपति व धन्नासेठ समर्थक है।
इतना ही नहीं बल्कि खासकर अपने भारत देश के सन्दर्भ में इस बात का भी विशेष महत्व ह�� कि सरकार की नीति दीर्घकाल में आत्मनिर्भरता की अगर है तो उसके लिए सरकारी क्षेत्र को कितना महत्व देकर परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के कल्याणकारी संविधान के पवित्र मंशा के हिसाब से क्या कार्य किया गया है।
और इसी क्रम में संसद में आज पेश बजट को भी देखा जाना चाहिए कि कहीं यह बजट भी आया और गया की तरह परम्परागत रूप से मायूस करने वाला तो नहीं है। और साथ ही यह प्रश्न छोड़ दिया है कि पिछले वर्ष के बजट में सरकार द्वारा ��िये गये दावे, वादे और आशायें क्या आज पूरी की गई है या एक रस्म को निभा कर रह गयी है। तथा क्या तुलनात्मक रूप में लोगों के जीवन में कोई परिवर्तन आया है। वास्तव में जीडीपी से अधिक लोगों के जीवन में बहु-अपेक्षित विकास व बहु-प्रतीक्षित गुणात्मक परिवर्तन है जो सीधे तौर पर व्यापक जनहित व देशहित से जुडे़ हैं और जिनका आकलन वर्तमान बजट की वाहवाही से पहले जरूर कर लेना है। सरकार भी इस पर कुछ रोशनी डाले तो य�� लोगों के अच्छे दिन के लिए अच्छी बात है वरना यह जिम्मेदारी कौन निभाता है।
देश में ’सामाजिक परिवर्तन’ के महान संतों में जाने-माने संतगुरु श्री रविदास जी को आज उनकी जयन्ती पर शत्-शत् नमन व अपार श्रद्धा सुमन अर्पित करने के साथ ही देश व दुनिया में रहने वाले उनके करोड़ों अनुयाइयों को इसकी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
संतगुरु श्री रविदास जी ’मन चंगा तो कठौती में गंगा’ अर्थात् मन को शुद���ध व पाक-साफ रखकर ही इंसान सच्चे सुख की प्राप्ति कर सकता है तथा समाज व देश का भी भला कर सकता है, जैसा इंसानियत भरा संदेश देने के साथ-साथ अपना सारा जीवन इन्सानियत का संदेश देने में गुज़ारा और इस क्रम में ख़ासकर जाति भेद व द्वेष आदि के खि़लाफ आजीवन कड़ा संघर्ष करते रहकर अमर हो ग��।
उनका संदेश धर्म की पवित्रता को समाज सेवा व जनचेतना के लिए इंसान एवं इंसानियत की भलाई के लिए है, किसी स्वार्थ ख़ासकर संकीर्ण राजनीतिक एवं चुनावी स्वार्थ की पूर्ति के लिए नहीं, जिसे भुला दिये जाने के कारण ही अमन-चैन, आपसी सौहार्द, भाईचारे तथा सुख-समृद्धि का वातावरण काफी कुछ प्रभावित है।
संतगुरु श्री रविदास जी का उपदेश मानकर उनके करोड़ों ग़रीबों, शोषितों, पीडि़तों आदि का काफी कुछ भला हो सकत�� है, जिस पर समुचित ध्यान देने की ज़रूरत है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी द्वारा देश के सरकारी व निजी विश्वविद्यालयों मे जातिवादी घटनाओं को रोकने के लिए जो नये नियम लागू किये गये है, जिससे सामाजिक तनाव का वातावरण पैदा हो गया है। ऐसे वर्तमान हालात के मद्देनजर रखते हुये माननीय सुप्रीम कोर्ट का यूजीसी के नये नियम पर रोक लगाने का आज का फैसला उचित
जबकि देश में, इस मामले में सामाजिक तनाव आदि का वातावरण पैदा ही नहीं होता अगर यूजीसी नये नियम को लागू करने से पहले सभी पक्ष को विश्वास में ले लेती और जाॅच कमेटी आदि में भी अपरकास्ट समाज को नेचुरल जस्टिस के अन्तर्गत उचित प्रतिनिधित्व दे देती।
मा. राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जी द्वारा संसद के संयुक्त अधिवेशन के सम्बोधन के साथ ही संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो गया है, जो देश की ज्वलन्त समस्याओं के त्वरित समाधान तथा देश को वाकई में आत्मनिभर्रता की ओर अग्रसर कराने हेतु नई उम्मीद जगाने वाला परिष्कृत नहीं होने से ��ह सम्बोधन लोगों को पारम्परिक ज़्यादा तथा आमजन उपयोगी कम लगता है।
ठीक ऐसे समय में जब ख़ासकर विश्व की सबसे बड़ी शक्ति अमेरिका ’अमेरिका फ्रस्ट’ के अभियान में लगा हुआ है और जिस कारण पूरी दुनिया में हर प्रकार की उथल-पुथल मची हुई है, भारत का भी इससे काफी कुछ प्रभावित होना स्वाभाविक ही है, जिसके उपायों की उम्मीद के रूप में सरकार द्वारा निजी क्षेत्र पर अत्यधिक भरोसा भारतीय परिवेश में कितना कारगर स��बित होगा, इस पर लोगों की आशंकायें एवं चिन्तायें बरक़रार होने के कारण सरकारों को अपने ऊपर भरपूर आत्मविश्वास दिखाने की ज़्यादा ज़रूरत लगती है।
सरकार राजनीतिक तौर पर जितनी तीव्रता के साथ संसद में व संसद के बाहर भी अपने विरोधियों को अपना निशाना बनाती रहती है, लोगों के आत्म-विश्वास को मज़बूत बनाने के लिये आत्मनिर्भरता एवं विदेश नीति सहित देश व जनहित के मामलों में भी सरकार को उतनी ही प्रखरता की लोगों को प्रतीक्षा है, जिसकी झलक संसद के बजट सत्र में अगर देश को मिले तो यह उचित ��ोगा।
इस क्रम में भारत का करीब 20 साल बाद यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापारिक समझौता बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के साथ-साथ आमजन के हित व कल्याण में भी अवश्य होना चाहिये।
महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री तथा महाराष्ट्र की राजनीति के दिग्गज नेताओं में से एक नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता श्री अजित पवार जी का आज बारामती में विमान हादसा में हुई मौत अति-दुखद। उनके परिवार तथा उनकी पार्टी के लोगों के प्रति मेरी गहरी संवेदना। कुदरत उन सबको इस दुख को सहन करने की शक्ति दे।
1.देश की उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिवादी भेदभाव के निराकरण/समाधान हेतु विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूजीसी, द्वारा सरकारी कॉलेज एवं निजी यूनिवर्सिटियों में भी ’इक्विटी कमेटी’ (समता समिति) बनाने के नये नियम के कुछ प्रावधानों को सामान्य वर्ग के केवल जातिवादी मानसिकता के ही लोगों द्वारा इसे अपने विरुद्ध भेदभाव व षडयंत्रकारी मानकर इसका जो विरोध किया जा रहा है, तो यह कतई भी उचित नहीं है।
2. जबकि पार्टी का यह भी मानना है कि इस प्रकार के नियमों को लागू करने के पहले अगर सभी को विश्वास में ले लिया जाता तो यह बेहतर होता और देश में फि��� सामाजिक तनाव का कारण भी नहीं बनता। इस ओर भी सरकारों व सभी संस्थानों को ज़रूर ध्यान देना चाहिये।
3. साथ ही, ऐसे मामलों में दलितों व पिछड़ों को भी, इन वर्गों के स्वार्थी व बिकाऊ नेताओं के भड़काऊ बयानों के बहकावे में भी क़तई नहीं आना चाहिये, जिनकी आड़ में ये लोग आएदिन घिनौनी राजनीति करते रहते हैं अर्थात् इन वर्गों के लोग ज़रूर सावधान रहें, यह भी अपील।
समस्त देशवासियों तथा दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय नागरिकों एवं उनके परिवार वालों को भी आज 77वें गणतंत्र दिवस की दिली मुबारकबाद/हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
वैसे आज के दिन अपने बेहतरीन संविधान पर गर्व करने के साथ-साथ इसका विशेष महत्व तभी है जब सरकारों ���े बड़��-बड़े दावों और लुभावने वादों आदि के भूलभलैयों से अलग हटकर, यह ईमानदार ऑकलन किया जाये कि क्या केन्द्र व राज्य सरकारों की केवल छलावापूर्ण बातें हैं या फिर संविधान की सर्वसमाज हितैषी सच्ची मंशा के हिसाब से देश ने राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में अपेक्षित विकास करके लोगों का जीवन स्तर में कुछ बहु-अपेक्षित सुधार किया है? ऐसा करके ही देश की ज्वलन्त समस्याओं से मुक्ति का मार्ग प���रशस्त हो सकता है।
इसके साथ ही, गणतंत्र दिवस पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ठ सेवा के लिये जिन लोगों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण व पद्मश्री तथा सर्वोच्च वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है उन सबको तथा उनके परिवार वालों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
इतना ही नहीं बल्कि देश में ’बहुजन समाज’ के करोड़ों ग़रीबों, शोषितों-पीड़ितों एवं उपेक्षितों को अपने पैरों पर खड़ा करके उन्हें आत्म-सम्���ान व स्वाभिमान का जीवन दिलाने के संघर्ष ��ेतु अपना पूरा जीवन समर्पित करने वाले बहुजन समाज पार्टी के जन्मदाता एवं संस्थापक मान्यवर श्री कांशीराम जी को, देश भर में उनके करोड़ों अनुयाइयों की चाहत के अनुसार अब बिना और देरी किये, भारतरत्न से सम्मानित किया जाए तो यह उचित होगा, जिसकी माँग बी.एस.पी. लगातार करती आ रही है।
उत्तर प्रदेश में ही नहीं बल्कि देश के अन्य राज्यों में भी किसी भी ���र्म के पर्व, त्योहार, पूजापाठ, स्नान आदि में राजनीतिक लोगों का हस्तक्षेप एवं प्रभाव पिछले कुछ वर्षों से काफी बढ़ गया है, जो नये-नये विवाद, तनाव व संघर्ष आदि का कारण बन रहा है, यह सही नहीं है तथा इन सबको लेकर लोगों में दुख एवं चिन्ता की लहर स्वाभाविक है।
वास्तव में संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थ के लिये धर्म को राजनीति तथा राजनीति को धर्म से जोड़ने के कई ख़तरे हमेश�� बने रहते हैं तथा प्रयागराज में स्नान आदि को लेकर चल रहा विवाद, एक-दूसरे का अनादर व आरोप-प्रत्यारोप इसका ताजा़ उदाहरण है। इससे हर हाल में ज़रूर बचा जाना ही बेहतर।
वैसे भी देश का संविधान व क़ानून ईमानदारी से जनहित व जनकल्याणकारी कर्म को ही वास्तविक राष्ट्रीय धर्म मानकर राजनीति को धर्म से तथा धर्म को राजनीति से दूर रखता है, जिस पर सही नीयत व नीति से अमल हो, ताकि राजनेतागण अपना सही संवैधानिक दायित्व, बिना किसी द्वेष व पक्षपात के, सर्वसमाज के सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक हित में ईमानदारी व निष्ठापूर्वक निभा सकें, वर्तमान हालात में भी लोगों की यही अपेक्षा। अतः प्रयागराज में स्नान को लेकर चल रहा कड़वा विवाद आपसी सहमति से जितना जल्द सुलझ जाये उतना बेहतर।
इसके साथ ही, आज ’उत्तर प्रदेश दिवस’ की सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें।
देश में संसद व राज्य विधानमण्डलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर ��ंभीर चिन्ता का विषय रहा है और इसीलिये उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में इन दिनों चल रहे 86वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय सम्मेलन के दौरान विधानमण्डलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिन्ता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय, जिसपर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर अमल भी ज़रूर करना चाहिये।
भारतीय संसद व राज्यों के विधानमण्डल यहाँ देश की संवैधानिक व लो���तांत्रिक व्यवस्था के अहम स्तंभ हैं तथा सरकार/कार्यपालिका को देश व जनहित के प्रति उत्तरदायित्व बनाये रखने का एक सशक्त माध्यम है। संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शान्ति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है।
इसके अलावा, ’सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी माननीय इलाहाबाद हाईकोर्ट के लखनऊ बेंच द्वारा दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घण्टे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत।
वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की ख़बरें आ���ी रहती हैं, जिसपर सरकार को उचित संज्ञान लेकर ऐसी प्रवृति को सख़्ती से ज़रूर रोकना चाहिये।
वाराणसी में अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति को हटाये जाने की ख़बर ना केवल भारी चर्चाओं में है बल्कि इससे समाज के एक बड़े वर्ग में काफी र���ष व आक्रोश भी व्याप्त है। इस अति-दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिये ताकि लोगों की आस्था व भावनायें आहत ना हों।
दलित समाज की उद्धार करता एवं बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री सुश्री मायावती जी, आपको जन्मदिन की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं!
प्रकृति आपको स्वास्थ्य एवं दीर्घायु रखें
@Mayawati
देश के विभिन्न भागों/राज्यों में मनाये जा रहे विभिन्न त्योहारों में भी ख़ासकर पंजाब व उत्तर भारत में लोहड़ी, दक्षिण भारत में पोंगल, असम आदि में माघ बिहू तथा अन्यत्र मकर संक्रान्ति पर्व की सभी लोगों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें। सभी मेहनतकश लोगों को उनकी मेहनत का पूरा फल मिले और उनका जीवन ख़ुश व ख़ुशहाल हो, यही इस अवसर पर कु़दरत से कामना।