@KraantiKumar अच्छा,
तो आप क्या चाहते हैं, ये भी खुलकर बताइए।
जो मीडिया नहीं दिखाता वो आप दिखाते हैं, तो मीडिया गलत है लेकिन सिर्फ आप का व्याख्यान सर्वोत्तम है।
क्या देश चलाना चाहते हो !!
@M__RKhan ये पारंपरिक शस्त्र पूजन ���हलाता है। इसमें छुपाने जैसा कुछ नहीं है। ये हिन्दू संप्रदाय के अधिकार समाजों में अनिवार्य पूजन है। ये किसी युद्ध की तैयारी नहीं, बल्कि युद्ध में उपयोग होने वाले अस्त्र शस्त्रों की सफाई और पूजन है।
@RebornManish Reborn साहेब, ये जो आखिरी की चार लाइंस लिख रहे हैं आप, उसमें एक दो कैटेगरी और जोड़ देते तो मैं आपके लिखने से शत प्रतिशत सहमत होता।
झूठे इतिहासकार जैसा शब्द होता है क्या ? इसी शब्द पर यदि भारत की बात की जाती है तो प्रश्नचिन्ह लग जाता है।
लेफ्टिस्ट भी लिखना चाहिए था। खैर....
@RebornManish क्या पाकिस्तान का इतिहास स्वयं उत्पन्न होने का है ? हि��दुस्तान का टुकड़ा नहीं है क्या?
रिबॉर्न साहब, क्या कंगाली की हालत में पहुंचे देश को युद्ध से फायदा या नुकसान होगा?
क्या भारत को आर्थिक क्षति नहीं होगी?
फिर रुपए और डॉलर को किस नजरिए से तौलेंगे?
@KraantiKumar अब ये बात और है कि हम घर स��� निकले अपने पिताजी से पैसे लेकर पढ़ाई के लिए,,, लेकिन वहां पिताजी को ही बेवकूफ बनाकर पढ़ाई के अलावा नेता बनने का करियर चुन लिया, पिता के सपनों को किनारे कर दिया।
@ajitanjum अंजुम जी, बू आए या खुश बू आए,,,,,
बात, ये है कि अजीत अंजुम जी की जो वास्तविक पहचान है, वो सार्वजनिक तौर पर छुपानी ही असंवैधानिक है। चाहे वो किसी भी संप्रदाय से है। अगर ये तर्�� सम्मत नहीं है तो, पूरे सरकारी सिस्टम जो कि सदियों से चलता आ रहा है, उसे ही बदलना चाहिए।
@niraj_kr10@Sudanshutrivedi नीरज भाई, कितना रोजगार पिछली सरकारें दें पाई हैं??
हम भी उन्ही सरकारों के समय पर पढ़कर निकले, बड़ी मुश्किल से रेलवे की वेकैंसी निकलती थी, और परीक्षा होने के बाद रिजल्ट 3 साल बाद आता था, सिर्फ upsc और psc के अलावा बैंक्स और पोलिस राजस्व में आंखे थक जाती थीं वेकैंसी के लिए।