🙏जय श्री राम राम जी की🙏Like,Retweet,DM ही करे🙏किसी भी प्रकार का Comment, Tag, Quote Tweet ना करे🙏अगर कर दिए है तो नष्ट कर दे🙏सम्मान बनाए रखे🙏धन्यवाद🙏🕉🙏
*देश को किसी से भी परेशानी नहीं है, यदि है तो:- बीच वाले से !!🤔*
*पूरे हिन्दू बनो*
*या*
*पूरे मुसलमान बनो*
*ये जो बीच का*
*हिजड़े बनें बैठे हो*
*इसी वजह से परेशान हैं:- हिन्दुस्तान..🐷✍️*
*कृपया सभी हिंदू/सनातनी इस विषय पर जागरूक हों और सम��्त परिवार, समाज को भी करें...*
🙏जय श्रीराम 🙏
🙏जय श्री राम राम जी ���ी🙏
क्षमा मांगने वाले से बड़ा कोई साहसी नहीं होता
क्षमा करने वाले से बड़ा कोई दानी नही होता
यह तो एकमात्र आपके विचारों का भेदभाव है
वैसै दो शुभचिन्तको मे अपना-पराया नही होता
हम महान दानीयो मे आते है*
आप श्रमा माँगने का साहस तो करो
हम क्षमादान दिए जाते है
किसी की निंदा
किसी कि त्रुटि
किसी को अपमानित
आदि करने मे तनिक भी सहयोग नही दे सकते
उसकी अनउपस्थित मे तो असंभव है
स्पेस मे उपस्थित हो या ना हो स्पेस के विषय से निर्भर है
जहाँ अभ्रद्र व्यवहार भाषा की श���का हो तब तो असंभव है
लज्जित करने से उचित मार्गदर्शन करे
क्षमा करे🙏
धन्यवाद
जो पुरुष* अपने स्वयं के कहे वचनों से वचन भ्रष्ट हो जाए
���नातन धर्म मे🤔ऐसे पुरूष* के लिए कोई श्लोक वाक्य दंड आदि है क्या🙄
उसके प्रति एक कन्या को कैसा व्यवहार करना चाहिए
घर्मपत्नी को उसके प्रति केसा व्यवहार करना चाहिए
🙏कृपया अतिशीघ्र डीएम करें🙏
अन्यथा उसे श्राप* दे देंगें😇☺
🙏जय श्री राम राम जी की🙏
यह चित्र बिहार के सीतामढ़ी बिहार का है
जहाँ पर एक श्री माँ जी - श्री पिताजी को
स्वयं के पुत्र संतान के तन
चिकित्सालय से लेने के लिए धन भिक्षा माग कर करनी पड़ रही है
��र्तमान मे सीतामढ़ी बिहार की स्थिति
श्रमा करे
अत्यंत दयनीय है🥺
केसे सहयोग करे🙏🥺
🙏 जय श्री राम राम जी की🙏
क्षमा करे!
ऐसे गभीर अति आवश्यक विषयों पर कोई स्पे��� क्यूँ नही चलता🤔🙄?
🙏 Jai Shri Ram Ram Ji Ki🙏
Excuse me!
Why is there no space on such very important topics🙄🤔?
किसी की निंदा
किसी कि त्रुटि
किसी को अपमानित
आदि करने मे तनिक भी सहयोग नही दे सकते
उसकी अनउपस्थित मे तो असंभव है
स्पेस मे उपस्थित हो या ना हो स्पेस के विषय से निर्भर है
जहाँ अभ्रद्र व्यवहार भाषा की शंका हो तब तो असंभव है
लज्जित करने से उचित मार्गदर्शन करे
क्षमा कर��🙏
धन्यवाद
🙏जय श्री राम राम जी की🙏
कन्या नारी स्त्री महिला ना जाने कितनी स्वयं की प्रतिभाओं को छुपाकर आशाओं को दबा कर
समाज से असमंजस मे रहकर
जिनक�� प्रति आश्रित है
उनकी इच्छा पुर्ती के लिए
इसी संगीत के अर्थ के मर्म को अत्यंत भावविभोर हो एकांत मे विचारती है
प्ररन्तु अपने समझ नही पाते🥺