ओबीसी आरक्षण का लाभ माली, सुथार,सुनार,कुम्हार,मुस्लिम,तेली,ढोली,,देवासी,नाई,दर्जी,बंजारा,छीपा,जोगी,
टाक,कलबी,धोबी,साद आदि अनेक कारीगर जातियों तक ना के बराबर पहुँचा है , इसलिए ज़रूरी है कि ओबीसी का वर्गीकरण हो ।
@MohitBharatYBP@grok राजस्थान ��ें ओबीसी क्रीमी लेयर की सीमा-
- क्लास I सिंचित भूमि (दोहरी फसल): 15.12 एकड़
- क्लास II सिंचित भूमि (एकल फसल): 22.68 एकड़
- यदि परिवार के पास इन सीमाओं से अधिक सिंचित भूमि है, तो व्यक्ति को क्रीमी लेयर माना जाता है और वह ओबीसी आरक्षण लाभों के लिए अयोग्य होता है।
@GovindDotasra जब स्पष्ट है की क्रीमी लेयर पद की श्रेणी से तय होता है ना कि पे लेवल से, 2021 में जाके परिपत्र कैसे आया ? सातवां पे कमीशन तो 2016 में लग गया था
@TheTribhuvan जब ��्पष्ट है की क्रीमी लेयर पद को श्रेणी से तय होता है ना कि पे लेवल से, 2021 में जाके परिपत्र कैसे आया ? सातवां पे कमीशन तो 2016 में लग गया था
@sharatjpr तुमने कभी इस बात पर स्टोरी करी कि कितने लोग ओबीसी और EWS के सर्टिफिकेट बनवा के नौकरी करते हैं ? सिर्फ राजनीतिक चुगली को पत्रकारिता कहते हो !
@sharatjpr तुमने कभी इस बात पर स्टोरी करी कि कितने लोग ओबीसी और EWS के सर्टिफिकेट बनवा के नौकरी करते हैं ? सिर्फ राजनीतिक चुगली को पत्रकारिता कहते हो !
@PremSChoudhary जाटों के बच्च��ं का ही हक खा रहे हैं ये लोग आप समर्थन भी कर रहे हो ! ये फर्जी सर्टिफिकेट वाले की जगह किसी गरीब जाट का बेटा बेटी अफ़सर बनते
@hanumanbeniwal@narendramodi@AmitShah राजस्थान के जाटों को रोहिणी कमीशन की रिपोर्ट के आधार पर सक्षम माना गया है इसलिए इनको अलग श्रेणी में वर्गीकृत किया जाना चाहिए
@Khalbaali पे लेवल से कोई मतलब नहीं है सिर्फ नौकरी की श्रेणी देखी जाती है अगर लेवल 1 में 40 की उम्र से पहले प्रमोशन हो गया है तो वो क्रीमी लेयर माना जाएगा
@Viveksbarmeri पे लेवल से कोई मतलब नहीं है सिर्फ नौकरी की श्रेणी देखी जाती है अगर लेवल 1 में 40 की उम्र से पहले प्रमोशन हो गया है तो वो क्रीमी लेयर माना जाएगा
डिग्गी कल्याण धणी के आशीर्वाद से और दादा-दादी एवं आप सम्मानीयो के आशीर्वाद से लोक सेवा के लिए दूसरी पीढी तैयार। बेटी अल्का सिंह ने पुलिस उप निरीक्षक के बाद आर ए एस में सामान्य मेरिट में 291 वां स्थान पहले प्रयास में ही प्राप्त किया। शाबाश बेटी- keep it up.
दादा- दादी का आशीर्वाद