सवर्ण समाज की बेटी भगाओ और ₹2, लाख का इनाम पाओ
MP की BJPडॉक्टर मोहन यादव सरकार की घोषणा है कि SC और सवर्ण समाज की बेटी या बेटे के साथ शादी करो और ₹2 लाख का इनाम ले जाओ
इस योजना में ST और OBC का कहीं जिक्र नहीं।
आखिरकार डॉक्टर मोहन यादव ने अपनी जाति के लड़की-लड़कों को सुरक्षित
एक बार सवर्ण समाज जरूर सुने और इस संदेश को आगे बढ़ाए... 🙏
कोई पार्टी या पार्टी का अध्यक्ष तय नहीं करेगा; जो तय करेगा वो सवर्ण समाज तय करेगा हमे कहाँ जाना है
सवर्ण समाज का साथ और क्षत्रिय की जुबान है एक बार कमान से निकला तीर दोबारा लौटकर नही आता....
राजस्थान तो झांकी है, दिल्ली हिलानी बाकी है ✊
ये वही महिपाल सिंह मकराना है जो पुरूषोत्तम रूपाला के एक बयान को लेकर देश व्यापी क्षत्रिय समाज का आंदोलन खड़ा कर दिया था और BJP के 400 सीटो का सपना 240 पर लाकर पटक दिया था
ये वही महिपाल सिंह मकराना है जो #UGC के खिलाफ 23 दिन कि पदयात्रा से दो राज्यो के उपचुनाव बिहार बांकीपुर, मध्यप्रदेश दतिया का BJP को हार का मुंह देखना पड़ा सवर्ण बाहुल्य सीटे थी दोनो
UGC ROLLBACK नही तो @BJP4India
को वोट सवर्ण समाज नही देगा
सवर्ण एकता जिंदाबाद ✊🚩
#mahipalsinghmakrana
दलित नेता केवल दलितो का नेता इसीलिए होता है क्योंकि दलित नेता केवल हमेसा अपने ही दलित वर्ग की बात करता है, मात्र अपने ही दलित वर्ग की आवाज उठाता है! और बाकी बर्ग का वो पतन होते देखना चाहता है! कोई एक दलित नेता का नाम बता जो किसी ओबीसी या सामान्यवर्ग के लिए कोई आवाज़ उठाया हो? शून्य मिलेंगे।
वहीं ओबीसी नेता या सामान्यवर्ग के नेता पूरे सामाज के नेता इसीलिए होते है क्योंकि ये अपना वर्ग छोड़कर बाकी सब अन्य वर्गों की आवाज उठाते है, उनके लिये कार्य करते है, खासकर सामान्वर्ग के नेता तो अपने ही वर्ग का पतन करके दूसरे वर्ग के दिन रात कार्य कर करते है!
इसीलिए सामान्यवर्ग या ओबीसी वर्ग के नेता पूरे समाज के नेता बन जाते है ना कि केवल अपने वर्ग के क्योंकि वो अपना वर्ग छोड़कर यहां तक अपने वर्ग का पतन करके बाकी सभी अन्य वर्गों की आवाज उठाते है उनकी लड़ाई लड़ते है।
सामान्यवर्ग का नेता पूरे समाज का नेता और दलित नेता केवल दलितो का नेता क्यों होता है ये समझना बहुत सिंपल है इसे समझना कोई क्वांटम फिजिक्स समझने जैसा नही है
जब केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन था तो इनके ऊपर स्याही फेंकने या इनको गाली देने वाले सब बीजेपी और RSS के लोग थे,
लेकिन आज जब झारखंड की कांग्रेस और जेएमएम के खिलाफ इनका भाषण चल रहा है तो भी इन पर स्याही फेंकने वाले बीजेपी और RSS के लोग हैं।
दोगलापन वामपंथियों की पहचान है।
अपने हक़ के लिए लड़ो
लड़ नहीं सकते तो लिखो।
लिख नहीं सकते तो बोलो।
बोल नहीं सकते तो साथ दो।
साथ भी नहीं दे सकते तो जो लिख बोल और लड़ रहे है उनका सहयोग करो।
ये भी ना कर सको तो उनका मनोबल ना गिराये क्योकि वो आपके हिस्से की लड़ाई लड़ रहे है।
#studentmovement#studentmovement
#StudentProtestJharkhand
This is how Hindus are treated in Jharkhand
Chatra Jharkhand जिले के tandwa प्रखंड के बड़गांव में इमरोज के द्वारा 13 साल की बच्ची का २ दिन तक अपहरण एवं रेप की घटना के बाद ग्रामीणों के द्वारा इमरोज़ की हत्या कर दी गई ।
जिसके बाद पुलिस ने मॉब लांचिंग का मामला बताकर 53 लोगो को नामजद एव 150 लोगो को अज्ञात बताकर FIR कर दिया गया
जिसके बाद गांव के सभी ग्रामीण पुरुषों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया । महिलाये अकेली है
जिसके बाद मुस्लिम लड़के उनके साथ बदतमीजी कर रहे है ,रेप की धमकी दे रहे है
Cc @AmitShah@PMOIndia@narendramodi
जातिवाद समाप्त करना था, जातियाँ नहीं
पहले ये केवल अक्ल के अंधे थे, अब, ये अक्ल के अंधे और गाँठ के पूरे हैं
अर्थात् समाज का विनाश करने के लिए पूर्ण रूप से लैस, वही कर रहे हैं.
नीतीश के निशांत समय के साथ परिपक्व होते जा रहें हैँ और मेरा व्यक्तिगत आकलन है कि निशांत जी एक अच्छे इंसान है और वो बिहार के लिए अच्छी सोच रखते है परंतु नीतीश जी के बाद जदयू में वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है और उनके ही निशाने पर निशांत है..उनके पार्टी के लोग ही इनकी छवि को धूमिल करना चाहते हैं.. मैंने भी शुरू में इन्हें गलत माना था लेकिन मेरा आवधारणा बदल गया समय के साथ....!!
सवर्ण समाज से पहली चूक तब हुई थी, जब 2018 में मो*दी जी ने सुप्रीम कोर्ट का जजमेंट पार्लियामेंट से पलट दिया था
जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने SC/ST एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी पर रोक लगा दिया था और एंटीसिपेटरी बैल allow कर दिया था
इस लैंडमार्क जजमेंट के सपोर्ट में सवर्ण समाज सड़कों पर न उतरकर बहुत बड़ी भूल किया था
महामानव के इस दुस्साहसिक कदम के बाद हम लोगों ने इसे 2019 में 303 सीटें देकर, इसके अहंकार को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया,
महामाव यह मानकर बैठ गए कि जैसे यादव वर्ग लालू, मुलायम का गुलाम है जाटव मायावती का गुलाम है, ठीक वैसे ही सवर्ण समाज मो*दी जी का गुलाम हो चुका हैं
बस इसी भ्रम में महामानव ने यूजीसी गाइडलाइंस बना डाला महामानव को लगा कि 2018 की तरह सामान्य वर्ग कोई शिकायत नहीं करेगा और बड़ी आसानी से इस UGC एक्ट को लागू कर दिया जाएगा
परंतु सवर्ण समाज के द्वारा सड़कों पर इतने बड़े जन आंदोलन के खड़े होने से महामानव स्तब्ध और आश्चर्यचकित है
इस बार छोड़ दिया तो सवर्ण समाज के बच्चों से शिक्षा का अधिकार छिन जायेगा,
सवर्णों का भविष्य खत्म हो जाएगा
कल बिहार सरकार ने कई उद्यमियों के साथ राज्य में निवेश बढ़ाने के लिए एमओयू किये। इन समझौतों में वैसे तो ज्यादातर स्टील कंपनियां हैं। मगर सबसे बड़ा करार जो है वह राज्य में परमाणु बिजली घर लगाने को लेकर है, 22,500 करोड़ का।
हैदराबाद की एक कंपनी जिसका नाम ग्लोबल रिन्यूएबल एडवांस क्लीन एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड है। इस कंपनी का कभी नाम नहीं सुना था, तो सहज ही यह जानने की इच्छा हुई कि यह कौन सी कंपनी है, जो बिहार में 22,500 करोड़ का निवेश परमाणु बिजली घर के लिए करने को तैयार है। सर्च किया तो पता चला कि हैदराबाद की इस कंपनी की स्थापना 25 फरवरी, 2026 में हुई है और इसे परमाणु बिजली घर क्या किसी भी तरह के उद्यम लगाने का अब तक अनुभव नहीं है. इसकी आधिकारिक पूंजी सिर्फ दस लाख की है. हैरत की बात है कि महज पांच महीने पहले बनी, दस लाख की पूंजी वाली कंपनी ने बिहार सरकार के साथ 22,500 करोड़ निवेश का समझौता किया है। वह भी परमाणु बिजली घर लगाने का, जिसके लिए काफी अनुभव की जरूरत होती है. उम्मीद है कि बिहार सरकार के उद्योग विभाग ने इस बारे में पड़ताल कर ली होगी।
लेकिन बिहार के एक नागरिक के तौर पर मेरी यह आशंका है कि क्या सचमुच ऐसी कंपनी को बिहार में परमाणु बिजली घर लगाने दिया जाना चाहिए। एक तो बिहार में कहीं भी परमाणु बिजली घर लगाने जैसे प्रयोग से बचना चाहिए क्योंकि यह काफी खतरनाक होते हैं। अगर कोई हादसा हुआ तो आसपास की बड़ी आबादी तबाह होती है और विकिरण का खतरा तो रहता ही है. हमें चेरनोबुल और फुकुशिमा के परमाणु हादसों को याद रखना चाहिए।
देश में परमाणु बिजली घर लगाने का अनुभव ज्यादातर सरकारी कंपनियों के पास है। इसमें एनपीसीआईएल, भेल और भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड प्रमुख हैं। इसके अलावा रोस्टोम, फ्रामाटोम, डब्लूईसी, जीई-हिटाची जैसी विदेशी कंपनियां हैं, जो इस काम के लिए अनुभवी मानी जाती हैं।
ऐसी किसी अनुभवी कंपनी से इसलिए करार करना चाहिए, क्योंकि उनके पास पेशेवरों की बेहतरीन टीम होती है, जो किसी भी संभावित संकट को पहले से भांप सकती है। उसे परमाणु संबंधित अंतर्राष्ट्रीय करार का अनुभव होता है। उसे रेडियेशन मॉनिटरिंग और इमरजेंसी रेस्पांस की जानकारी और अनुभव होता है।
क्या महज दस लाख की पूंजी वाली और पांच महीने के अनुभव वाली कंपनी यह सब कर पायेगी? क्या सरकार को परमाणु बिजली घर जैसे संवेदनशील उद्यम की स्थापना के लिए एमओयू करना चाहिए या इसके लिए दूसरी व्यवस्था अपनानी चाहिए? और क्या सरकार इस कंपनी को आगे कर आने वाले दिनों में किसी बड़ी कंपनी की बैकडोर एंट्री की योजना बना रही है? यह सब गंभीर सवाल हैं? मगर फिलहाल तो यह कहा जा सकता है कि यह समझौता संदेहास्पद लग रहा है…
#mou #NuclearEnergy #Bihar
परमादरणीय @nitin_gadkari जी, यदि आप एक डैश के डैश हो, तो आपको चुनौती देता हूँ राहुल गाँधी का यह वीडियो तीन घंटे में डिलीट करवाने का। मेरे जैसे लोगों को तो आपने 157 पेज का फाइल भेजा है, पर यदि साहस है तो upto E20 तक लिखे इस ढक्कन वाले नेता पर केस कर के दिखाओ।
इतनी छोटी उम्र में इंजेक्शन लगाते हुए कैमरे में कैद किया कौन सा इंजेक्शन हो सकता है मेरा तो दिमाग घूम रहा है।
नशा है या और कुछ ?
बताओ कैसे पता लगाया जा सकता है??
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SBI ने Junior Associates की बैकलॉग भर्ती निकाली है। ध्यान देनें वाली बात यह है कि इसमें General Category के लिए एक भी पद नहीं है, जबकि OBC (नाममात्र 112), SC और ST के लिए बैकलॉग सीटे हैं।
इस देश में General अभ्यर्थी सिर्फ परीक्षा देने, टैक्स भरने और कटऑफ बढ़ाने के लिए रह गए हैं क्या?
"Equal Opportunity" अब सिर्फ भाषणों में बची है।
जहां बीजेपी की सरकार होगी, वहां के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगूंगी,
लेकिन जहां विपक्ष की सरकार होगी, वहां पर इस्तीफा नहीं मांगूंगी - वामपंथी नेहा बोरा