एक समय था ,जब अंबेडकर जयंती संसद भवन के लॉन तक ही सिमटा नजर आता था लेकिन पिछले कुछ सालों में ये नजारा बदला है अब बाबा साहब का अंतर्राष्ट्रीयकरण हो चुका है अब वे विश्व रत्न हैं। मध्य प्रदेश के महू से लेकर अमेरिका तक में अब अंबेडकर की विचारधार जोर पकड़ रही है.
Jersey City, America
बह��त चौंकाने वाली खबर है🚨
महाराष्ट्र में हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा 149 सीटों पर लड़ कर 132 सीटें जीत लेती थी
बाद में पता चलता है की महाराष्ट्र में शाम 5 बजे के बाद 65 लाख से ज़्यादा मतदान हुआ था।
अब बिहार में भाजपा 101 सीटों पर चुनाव लड़ कर 91 सीटों पर आगे चल रही है।
ना ये भाजपा की जीत है ना ही नीतीश कुमार की जीत है।
और ना ही तेजस्वी यादव या कांग्रेस की हार है।
ये निष्पक्ष चुनाव नहीं है, य�� सरासर बेईमानी है।
बड़ी खबर🚨
थोड़ी देर पहले जेडीयू ने पोस्ट किया था कि नीतीश कुमार बिहार के मुख्यमंत्री थे, हैं और रहेंगे।
अभी डिलीट कर दिया गया है , आगे बहुत कुछ हो सकता है। पूरे चुनाव में भाजपा ने एक बार भी नीतीश कुमार क�� नाम पर हामी नहीं भरी थी।
भाजपा क्या नीतीश कुमार के साथ खेला कर सकती है?
@TejashwiYdvRJD हा सर जरूर लेकिन धीमी गिनती के कारण रूझानों में राजद को जानबूझकर पीछे दिखाया जा रहा है ये सब विरोधियों की चाल है।हमे धैर्य बनाएं रखने की आवश्यकता है।
The shoe attack on the Chief Justice of India wasn’t about religion but humiliation. It was a well-planned attack, targeting him only because he belongs to the Dalit community. The attacker’s words clearly show his intent was to insult, not protest.
जस्टिस गवई कई बार कह चुके हैं कि संपन्न दलितों को आरक्षण का लाभ नहीं मिलना चाहिए लेकिन
जस्टिस गवई पर हुआ जातिवादी हमला दिखाता है कि मनुवादियों के लिए दलित व्यक्ति हमेशा दलित ही रहता है।
चाहे आप कितने ही बड़े पद पर चले जायें, आपकी जातीय हैसियत कभी नहीं बदलती, आपके संपन्न हो जाने से आपके साथ जातिवाद होना बंद नहीं हो जाता।
हम उम्मीद करते हैं कि अब इस हमले के बाद उन्हें ये समझ आयेगा कि आरक्षण क्यों ज़रूरी है?
जस्टिस गवई को अब क्रीमी लेयर से जुड़ी सभी याचिकाएं तुरंत रिजेक्ट कर देनी चाहिए।
The attack on the Chief Justice of India is an assault on the dignity of our judiciary and the spirit of our Constitution.
Such hatred has no place in our nation and must be condemned.
Naming it a “Gen-Z Revolution”
He described the youth uprising and unrest in Leh as “kind of Gen-Z revolution”, while appealing for non-violence and asking government to be sensitive to Ladakh’s situation.
#viral#GMMTVFANIVALxGeminiFourth
My message of peaceful path failed today”
After violence broke out during the Leh protest, Wangchuk posted on X:
> “VERY SAD EVENTS IN LEH
My message of peaceful path failed today. I appeal to youth to please stop this nonsense. This only damages our cause.”
#SonamWangchuk#leh
More than 100 volunteers led by renowned innovator and climate activist #SonamWangchuk started on a foot march from Leh to the national capital to urge the Centre to resume the stalled dialogue with the leadership of Ladakh on their four-point agenda.
https://t.co/AzyQ2X2suO
1. बीजेपी के श्री अमित शाह द्वारा संसद में दलित व अन्य उपेक्षित वर्गों के मसीहा परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के बारे में जिन शब्दों का इस्तेमाल किया गया है उससे इन वर्गों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुँची है। ऐसे में उन शब्दों को वापस लेकर इनको पश्चाताप भी जरूर करना चाहिए।
1. देश की जेलों में भी क्रूर जातिवादी भेदभाव के तहत कैदियों से जातियों के आधार पर उनमें काम का बंटवारा कराने को अनुचित व असंवैधानिक करार देकर इस व्यवस्था में ज़रूरी बदलाव करने का माननीय सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भरपूर स्वागत। 1/2
राजेन्द्र कुमार टेलरिंग का कार्य करते है। 4 लड़के पढ़ रहे है।
1.पहला लड़का हमीरपुर से आईआईटी कर रहा है।
2.दूसरा लड़का खड़कपुर से आईआईटी कर रहा है।
3.तीसरे लड़के का नम्बर आईआईटी धनबाद आया लेकिन 17 हजार फीस न होने की वजह से ए��मिशन नही ले पाया। बाद में तारीख निकलने पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने आर्टिकल 142 में अपनी शक्तियों का प्रयोग करके आईआईटी को आदेश दिया है कि इसका एडमिशन लिया जाए।
अब अगर;
"डॉक्टर अम्बेडकर न होते इन तीनो में से एक भी एडमिशन न ले पाता क्योंकि जब 17 हजार के कारण एडमिशन नही हुआ तो लाखों फीस कैसे भर पाते वो भी एससी कोटे से। इसलिए हर स्तर डॉक्टर अम्बेडकर का ही योगदान है कि एक टे���रिंग करने ��ाले के तीन बच्चे एक साथ आईआईटी कर रहे है"
निर्णय स्वागत योग्य है लेकिन इसका ध्यान रखना चाहिए कि जिस एससी को अंतिम रूप से एससी कोटे से धनबाद में शीट मिली उसपर कोई प्रभाव न पड़े। कभी धनबाद आईआईटी अंतिम सेलेक्टिड एससी को बाहर कर दे। क्योंकि उसकी क्या गलती, उसने तय समय सीमा में शुल्क भरकर एडमिशन लिया था। इस केस को।विशेष मानना चाहिए।
मेरी शुभकामनाये तीनो के साथ है। बशर्ते सफल होने पर एक बार पीछ��� मुड़कर देख ले कि "आरक्षण व फीस में छूट" न होती तो क्या यह हो पाता। "आरक्षण व फीस छूट" किसके कारण हुई, यह एक बार जरूर सोचना।
अब असली मुद्दे पर आते है। इसमे तो 17 हजार जा रहे थे। लेकिन एससी के काफी व्यक्ति जो बहनजी हाय हाय करते रहते है वो 2007 से 2012 के मध्य यह 1 रुपया न देकर भी कोर्स कर लिए लेकिन फिर भी हाय हाय करते रहते है।
बहनजी ने पहली सरकार बनते ही सबसे पहली ��ोषणा यह करी की;
"बीटेक, एमबीए, एमसीए, बीएड, से लेकर कोई भी कोर्स हो उसमे एससी के बच्चे की जीरो शुल्क पर एडमिशन देना है। एक रुपया नही लेना है। यह हालत हो गई थी कि प्राइवेट संस्थान दलित बस्तियो में खोजते हुए फिर रहे थे कोई बच्चा इंटर कर रहा है तो उसे फलाना कोर्स करवा दीजिएगा, सिर्फ नाम लिखवा लीजिये, फीस नही देनी है उल्टा बहनजी स्कोलरशिप भेजेगी"
यह 2007 से 2012 में मध्य हुआ। फिर अखिलेश आये। उन्होंने शुर�� के 2 साल इसे नही छेडा, फिर कलाकारी शुरू कर दी।
अब यह हाल है कि;
"पहले लाखो फीस भरो। सरकार बाद में वापस करेगी और उसमे भी 50% से ऊपर की आ नही रही"
लेकिन फिर भी बहनजी हाय हाय करना है। मजेदार बात यह है कि वर्गीकरण समर्थक जातियो के लिए तब बहनजी का कार्यकाल बुरा था लेकिन अब पहले शुल्क न देने की वजह से कोर्स नही कर पा रहे बै तब भी "सरकार" हाय हाय करने की जगह बहनजी हाय हाय कर रहे है।
��िकास कुमार जाटव
@Mayawati
@AnandAkash_BSP
@BhimArmyChief
1. हरियाणा में हो रहे विधानसभा आमचुनाव के दौरान भी कांग्रेस द्वारा दलितों की लगातार की जा रही उपेक्षा व तिरस्कार से यह साबित है कि पार्टी में जब अभी सब कुछ ठीक नहीं है, गलत है तो आगे क्या होगा? ऐसे में दलित समाज के लोग कांग्रेस व बीजेपी आदि को अपना वोट देकर इसे खराब न करें। 1/3
2. वैसे भी हमेशा आरक्षण विरोधी रही कांग्रेस के नेता ��ब आरक्षण को समय आने पर खत्म करने की बात करते हैं। अतः दलित अपना वोट एकतरफा तौर पर बीएसपी को ही दें क्योंकि यही पार्टी उनके हित व कल्याण की सुरक्षा तथा संवैधानिक हक दिलाकर उन्हें शासक वर्ग बनाने के लिए ��गातार संघर्षरत है। 2/3