सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए !
मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कही भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए
500 में सिर्फ 11 अंक हासिल करने वाला व्यक्ति अब गणित का शिक्षक बनेगा!
सोचिए, जो खुद गणित में 500 में 11 अंक ला पाया, वह देश के बच्चों को क्या पढ़ाएगा? ऐसे फैसले देश की शिक्षा व्यवस्था ही नहीं, बल्कि देश की प्रतिभा और आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ हैं।
नगीना सांसद चंद्रशेखर को मसीहा मानने वाले उसके किसी भी गलत कृत्य का विरोध नहीं करेंगे...
किंतु सामान्य वर्ग वाले अपनो में तथा आपकी लड़ाई लड़ने वालों में 100 कमियां निकाल देंगे...
संगठित रहकर लड़ाई लड़ेंगे तो अवश्य जीतेंगे, महिपाल मकराना जैसे असंख्य योद्धाओं का साथ दो।
#UGC_Rollback
डॉ नेहा दास जी को नेशनल मीडिया पर सामान्य वर्ग का पक्ष रखते देख अतिशय प्रसन्नता हो रही है, ये एक संकेत है की हम अपने ‘जातिगत आरक्षण मुक्त भारत’ की मुहिम में पॉजिटिव वे पर है,
मेरे हिसाब से X पर इस मुहिम को इन्होंने रंग दिया है -
अजीत भारती,
अनुराधा तिवारी
शुभम् शुक्ला
डॉ नेहा दास
शुभम् शर्मा
अनिल मिश्रा
अलंकार अग्निहोत्री
The Brahmin Voice
जबकि ग्राउंड पर सवर्ण आर्मी प्रमुख सर्वेश पाण्डे और RSP चीफ पंकज धरवैया ने खूब मेहनत की,
आज संख्या इतनी हो गई है की सबका नाम लिखना बहुत मुश्किल है, लेकिन इन लोगों का योगदान अपने आप में महत्वपूर्ण है,
बंधुओ हर किसी को @neha_laldas जी की बात सुननी चाहिए।
ये वे तथ्य और तर्क हैं जिन्हें हमें सबके सामने रखना चाहिए।
आख़िरकार आरक्षण पर बहस मुख्यधारा की मीडिया में आ गई है।
हर GC वॉरियर को बधाई; जिस मुद्दे को पहले सोशल मीडिया पर भी नज़रअंदाज़ कर दिया जाता था,
उस पर अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।👏 https://t.co/9LHby31Nt4…
हाँ भाई, और क्या उम्मीद थी ??
जब हॉस्पिटल में डॉक्टर, नर्स, वार्ड बॉय, स्टाफ, स्वीपर… सब जगह 60-70% आरक्षण ठूंस दिया जाए, तो स्ट्रेचर कहाँ से आएगा ?
मरीज को अपनी पीठ पर लाद के ले जाना ही अब “आत्मनिर्भर भारत” का मॉडल बन गया है।
मेरिट को पूरी तरह खत्म कर दो, फिर उसी सिस्टम से उम्मीद करो कि वो इमरजेंसी में तेज़ और संवेदनशील रहेगा।
जो आदमी काबिलियत से नहीं, कोटे से कुर्सी पर बैठा है, वो मरीज की चीख सुनकर स्ट्रेचर ढूंढेगा? फाइल घुमाएगा या चाय पीता रहेगा।
यह कोई नई बात नहीं है। सालों से यही चल रहा है। “सामाजिक न्याय” के नाम पर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल को लैब बना दिया।
रिजल्ट देख लो परिजन ही खुद को स्ट्रेचर बना के मरीज ढो रहे हैं।
जब सिस्टम खुद कहता है कि काबिलियत से ज्यादा जाति और कोटा जरूरी है, तो मरीज की जान की कीमत भी उसी तराजू पर तौली जाएगी।
और जो लोग इस सड़ांध को “सद्भाव” और “समावेश” कह के बचा रहे हैं, वही असल में इस मरे हुए जमीर के रखवाले हैं।
मनहूसों पैसों की खातिर अपने आराध्यों का अपमान करवाने वाले राजनीतिक दल!लों
और कितना गिरोगे
राजनीति के लिए भगवान का अपमान करने वालों
महादेव ही तुम्हारा न्याय करेंगे अब
बाकी हिंदुओं तुम अपना ख़ुद देख लो
कोई सरकार तुम्हारे लिए कुछ नहीं करने वाली
जागो
वर्ना सबका नरसंह!र तय है
माँ और महादेव हमारी रक्षा करें 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
#यतिमाँप्रत्यंगिरागिरी
मदन राठौर - सवर्ण कहा जाएँगे ये हमारे ही लोग हैं। ये सबक़ किसको सिखायेंगे ,हमको सबक सिखायेंगे तो ख़ुद को सबक मिलेगा।
महिपाल सिंह मकराना - मदन राठौर के बयांन पर कहा वो उनके विचार है। सवर्णों के विचार थोड़ी हो सकते हैं। ये उनका व्यक्तित्व हो सकता है। स्वर्ण समाज कहां जाएगा? यह वक्त आने पर बता दिया जाएगा। सवर्ण कहा जायेगा। मेरा संघर्ष सवर्णों के लिए हर प्रदेश में #UGCRollBack रहेगा। हमारे पास तीसरा विकल्प होना चाहिए। हम बीजेपी के बंधुआ मजदूर नहीं है।
#MahipalSinghMakrana #KarniSena #UGCRollBack
मैं किसी और कारण से समर्थन देने नहीं आया।
मैंने कुछ छात्रों का इंटरव्यू देखा, उनकी आंखों में दर्द देखा, उनकी तकलीफ देखी और उनके आंखों में आंसू देखे।
मेरे लिए इतना काफी था...मैं नौजवानों को पसंद करता हूं।
: पीयूष मिश्रा, अभिनेता
बीजेपी ने 12 सालों में जनरल जाति के लिए कुछ नहीं किया, सिर्फ कुछ काले कानूनों के अलावा जिसमें जनरल वालों की जिंदगी बर्बाद हो जाए! @BJP4India
से जनरल जाति जितनी जल्दी दूर हो जाए उतना अच्छा है!
@mahipalmakrana_ जी को सुनें
जहां बीजेपी की सरकार होगी, वहां के शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगूंगी,
लेकिन जहां विपक्ष की सरकार होगी, वहां पर इस्तीफा नहीं मांगूंगी सिर्फ़ दुबारा एग्जाम की माँग करूँगी - वामपंथी नेहा बोरा
जातिगत भेदभाव बढ़ने का कारण है आरक्षण इस दलित लड़के को ही देख लो मीडिया को बता रहा है कि ये तो अपना इलाज उससे करवाएगा जिसके नाम मे गुप्ता शुक्ला सिंह लगा होगा ये बोल रहा है कि ये अपनी ही जाति के आरक्षण वाले डॉक्टर से इलाज नही कराएगा
आरक्षण हटाओ आंदोलन की कांवड़ यात्रा का प्रारंभ हो चुका है
यही सही समय है कि सामान्य वर्ग सभी की मुफ्त शिक्षा का मुद्दा उठाकर आरक्षण पर आंदोलन शुरू कर दे
महादेव
केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में स्पष्ट कर दिया है कि SC/ST कोटा में ‘क्रीमी लेयर’ की अवधारणा नहीं लागू होगी क्योंकि वह केवल OBC के लिए थी। तो मोदी जी, OBC रिजर्वेशन तो पहले था ही नहीं, फिर वो क्यों आया और आपकी पार्टी ने उसका समर्थन क्यों किया था?
दूसरी बात, आपके वकील ने कहा कि ‘आय के आधार पर’ SC/ST आरक्षण बिलकुल नहीं होगा क्योंकि उसका आधार केवल ‘आर्थिक पिछड़ापन’ ही नहीं, ‘ऐतिहासिक उत्पीड़न और अन्याय’ है। ‘केवल’ आर्थिक पिछड़ापन कहाँ, आप तो इनकम को कहीं भी आधार नहीं मानते!
जिस EWS का आप ढोल पीटते हैं, उसमें न तो फॉर्म के दाम कम हैं, न हॉस्टल की फीस, न कोर्स फीस… तो ये दो कौड़ी का राजनैतिक झुनझुने का सामान्य वर्ग करे क्या? @narendramodi यह बताएँ कि सामान्य वर्ग के टैक्स के पैसों से फंड हो रही SC/ST आरक्षण सब्सिडी का लाभ, सामान्य वर्ग के EWS को ही क्यों नहीं मिलता?
कोई तर्क है इसका कि आप जिसे सर्टिफाइड गरीब मानते हैं, वो प्रमाण पत्र उससे माँगते हैं, उसे सत्यापित करते हैं और उसे नौ लाख से सोलह लाख तक का लोन ले कर पढ़ाई करनी पड़ती है। फिर आप 1000 SC और 1000 OBC जातियों के शून्य प्रतिनिधित्व पर मौन हो जाते हैं कि इन जातियों का आरक्षण कहाँ है?
सत्य यह है कि आपका ‘विकसित भारत’ टूटते हायवे और निम्न गुणवत्ता के 50% लोगों से भरे कॉलेजों और विद्यालयों से कभी पूरा नहीं हो सकता। आरक्षण की समीक्षा करनी ही होगी, उसे तार्किक रूप से लाना ही होगा।
१. शून्य प्रतिनिधित्व वाली जातियों की पहचान
२. EWS की SC के स्तर की आर्थिक छूट
३. न्यूनतम अंक का विधान, GC से 10% से अधिक का कटऑफ में अंतर न हो SC/ST में
४. सक्षम लोगों को फर्जी तर्क के कारण आरक्षण न दिया जाए
५. हर श्रेणी में सबसे गरीब, पिछड़े को ही आरक्षण मिले
६. हर दस वर्ष में जातियों की समीक्षा और निष्कासन, नई जातियों को लिस्ट में जोड़ना बंद करें