Lokniti-CSDS Summer School 2025 has officially begun today and will continue till next Sunday!
This week-long programme brings together young researchers from across the country to engage with data, methods, and debates in the study of Indian politics.
The objective of the Summer School is to strengthen empirical research by training participants in survey-based analysis and fostering critical conversations around democracy and society.
Stay tuned for updates from the classroom and beyond!
@csdsdelhi @sanjaycsds @PalshikarSuhas@SandeepShastri2
इंडिया ने 24 मिसाइलें दागीं, उन्होंने सारे टार्गेट एचीव करे और पाकिस्तानी डिफ़ेंस सिस्टम एक भी मिसाइल नहीं रोक पाया, ये हक़ीक़त है हम एक भी हमला रोक नहीं पाए,पाकिस्तान क्या लड़ेगा उन्होंने हमें घर में घुस के मारा है: पाकिस्तानी नागरिक
#opreationsindoor
@Ashok_Kashmir Artical 350A - प्राथमिक स्तर पर मातृभाषा में शिक्षा की बात की गई है। Artical 350 B- special provision of linguistic minorities की बात की गई है। Artical 351 - संघ का यह कर्तव्य होगा की वह हिन्दी भाषा का प्रचार प्रसार और विकास करे। इन सभी artical में हिन्दी आने की बाध्यता नहीं है।
@umda_panktiyaan स्वर्ग के सम्राट को जाकर खबर कर दे,
"रोज ही आकाश चढ़ते जा रहे हैं वे,
रोकिये, जैसे बने इन स्व���्न वालों को,
स्वर्ग की ही ओर बढ़ते आ रहे हैं वे।"@MahakaviDinkar
#Chandrayan3
• Study hard.
• What others think of you is none of your business.
• It's OK not to have all the answers.
• Experiment, Fail, Learn and Repeat.
• Knowledge comes from experience.
• Imagination is important.
• Do what interests you the most.
• Stay curious
@RagiSangit आप डिपार्टमेंट (डीयू, राजनीति विज्ञान) के विभागाध्यक्ष है। वहा मिलने वाली रीडिंग भी हिंदी में मुहैया करा दीजिए। फिर भारत नाम रखना और सार्थक होगा।
@Divya_trpathi एक पुरुष के प्रति अन्याय की कल्पना से ही सारा पुरुष समाज उस स्त्री से प्रतिशोध लेने को उतारू हो जाता और एक स्त्री के प्रति क्रूरतम अन्याय का प्रमाण पाकर भी सब स्त्रियां उसके अकारण दंड को अधिक भारी ��नाएं बिना नही रहती। - महादेवी वर्मा (लक्ष्मा, अतीत के चलचित्र)
आपातकाल पर बात करते हुए इस पक्ष पर भी विचार किया जाना चाहिए। सागरिका घोष और पुपुल जयकर द्वारा लिखी गयी श्रीमती गाँधी की जीवनियाँ पढ़ते हुए आप पायेंगे कि श्रीमती गाँधी ने बहुत साफ तौर पर स्वीकार किया है कि आपातकाल लगाना उनकी गलती थी। लेकिन क्या एक भी जगह जेपी यह स्वीकार करते हुए दिखाई देते हैं कि लोकतान्त्रिक ढंग से चलने वाला उनका आंदोलन कितना अलोकतान्त्रिक था?
25 जून 1975 को दिल्ली के रामलीला मैदान मुने जेपी ने जो कहा और देश के जो हालत थे उसमें श्रीमती गाँधी के पास विकल्प क्या था?
आपातकाल लगाने वाली श्रीमती गाँधी ने जिस तरह निष्पक्ष चुनाव कराये वह उनके लोकतान्त्रिक होने का सबूत है। जिन दिनों उन्होंने चुनावों की घोषण�� की उन दिनों माहौल ऐसा बना हुआ था कि वे चाहतीं तो बिना चुनाव कराये लम्बे समय तक पद पर बनी रहतीं। दुनिया के सभी देश उनके साथ काम करने के इच्छुक थे। किसी भी तरह का कोई दबाव उन पर नहीं था। लेकिन पंडित नेहरू की बेटी ने चुनाव कराये और अभी परिणाम पूरी तरह घोषित भी नहीं हुए थे कि आपातकाल हटाने का अनुरोध और इस्तीफा एक साथ राष्ट्रपति से मिलकर सौंप दिया।
जनता सरकार ने उन पर बदले की भावना से कार्यवाही की। उनका घर छीन लिया, जेल में डाल दिया। वे तब भी नहीं डिगीँ। जनता पर भरोसा किया। जनता सरकार भयंकर रूप से अलोकप्रिय हुई। दो वर्ष में ही तितर बितर हो गयी। एक सिंहनी सौ लंगूर के नारे के साथ 80 के चुनाव में फिर उसी जनता ने श्रीमती गाँधी के नेतृत्व में भरोसा किया।
हाँ, यह सब होने के बावजूद आपातकाल के वर्षों में जिस तरह की ज्यादतियाँ हुईं वे नहीं होनी चाहिए थी���।
मेरा कहना सिर्फ इतना है कि आपातकाल पर बात करते हुए एकतरफा बयान देने के बजाय उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर बात करनी चाहिए।
@sagarikaghose
वायरल वीडियो के साथ दावा है कि केदारनाथ में श्रद्धालुओं के साथ घोड़ा-खच्चर संचालक मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मारपीट की. ये दावा बेबुनियाद है. सभी आरोपी हिन्दू समुदाय से थे. पुलिस ने स्पष्ट किया कि मामले में कोई सांप्रदायिक ऐंगल नहीं है. | @oishanib_
https://t.co/Np7FpTkcdy
@imJDubey_ नेहरूवियन मॉडल में कांग्रेस को अंब्रेला पार्टी या कैच आल पार्टी के तौर पर जाना जाता था। मूल लक्षण अभी भी विद्यमान है परंतु राहुल गांधी जी अभी तक विपक्ष के अभियान का नेतृत्व करने में असफल रहे है। उल्लेखनीय है की वीपी सिंह विपक्ष के अभियान का नेतृत्व करके ही पीएम बनें थे।
@ndtvindiafeed सरदार बल्लभ भाई पटेल,स���वरकर,श्याम प्रसाद मुखर्जी, गुरु गोलवलकर, जय प्रकाश नारायण, राममनोहर लोहिया सभी जीवित थे, किन्तु देश का विभाजन नहीं रो�� सके। लेकिन सुभाष चन्द्र बोस अकेले रोक देते। क्या तर्क है??इसका मतलब कि गाँधी जी & नेहरू के अलावा, सवाल तो इन लोगों पर भी उठता है। क्यों?
एक थे साहिर लुधियानवी, भजन लिखा - तोरा मन दर्पण कहलाए... अल्लाह तेरो नाम ईश्वर तेरो नाम... मन रे तू काहे ना धीर धरे... गंगा तेरा पानी अमृत... ईश्वर अल्लाह तेरो नाम... हे रोम रोम में बसने वाले राम... लिस्ट लंबी है। सबका जिक्र करने पर पोस्ट बड़ी हो���ी। ये ऐसे नगमे हैं जो हमारे +