राजस्थान में फर्जी डॉक्टरों के एक बड़े और चौंकाने वा��े खेल का पर्दाफाश हुआ है। विशेष अपराध शाखा (SOG) ने कार्रवाई करते हुए राजस्थान मेडिकल काउंसिल (RMC) में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन कराकर डॉक्टर बने दो 'मुन्नाभाइयों' को गिरफ्तार किया है। इस ख��लासे ने पूरे मेडिकल सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सबसे हैरान करने वाला मामला जालोर के रानीवाड़ा निवासी नानंजी राम (ननजीराम) चौधरी का है। SOG की जांच में सामने आया कि यह आरोपी महज 8वीं पास है। 2010 में वह एक क्लिनिक में पर्चियां काटता था। 2015-16 में उसने वही अस्पताल खरीद लिया और उसका नाम 'भास्कर हॉस्पिटल' रख दिया। इसके बाद उसने 10वीं, 12वीं, कानपुर से MBBS और मुंबई से DGO (गायनकोलॉजी डिप्लोमा) की फर्जी ड���ग्रियां बनवाईं और खुद स्त्री रोग विशेषज्ञ बनकर अस्पताल चलाने लगा।
दूसरा मामला सीकर के कांवट निवासी पंकज यादव का है। उसने 2013-2018 तक कजाकिस्तान से MBBS की पढ़ाई की थी। भारत में प्रैक्ट��स करने के लिए होने वाली 'फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट्स एग्जामिनेशन (FMGE)' में वह 6 बार फेल हुआ। इसके बाद उसने बिहार के 'श्री कृष्ण मेडिकल कॉलेज' से फर्जी MBBS डिग्री और फर्जी रजिस्ट्रेशन बनवाकर राजस्थान मेडिकल काउंसिल में अपना पंजीयन करा लिया। SOG अब इस पूरे नेक्सस से जुड़े अन्य लोगों और RMC के कुछ अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
@Sog_Rajasthan @PoliceRajasthan
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आज विश्व खाद्य दिवस के मौके पर हमें यह संकल्प और दृढ़ करना चाहिए कि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और कोई भी जरूरतमंद भोजन से वंचित न रहे।UPA सरकार के कार्यकाल में प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं UPA चेयरपर्सन श्रीमती सोनिया गांधी की संवेदनशील सोच से प्रेरित होकर खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया गया, जिसने देश के करोड़ों लोगों के लिए भोजन के अधिकार को सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमि���ा निभाई।
राजस्थान में हमारी कांग्रेस सरकार ने कोई भूखा न सोए के संकल्प को साकार करने के लिए इंदिरा रसोई योजना शुरू की, जिसके जरिए जरूरतमंद लोगों को मात्र 8 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया गया। वहीं, महंगाई से आमजन को राहत देने के लिए मुख्यमंत्री निःशुल्क अन्नपूर्णा फूड पैकेट योजना शुरू की गई, जिसके तहत जरूरतमंद परिवार��ं को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई गई।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष, मंत्रिमंडल में मेरे साथी रहे श्री गोविन्द सिंह डोटासरा को जन्मदिन पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
मैं ईश्वर से आपके स्वस्थ एवं ��ीर्घायु जीवन की प्रार्थना करता हूं।
@GovindDotasra
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री, महान अर्थशास्त्री और दूरदर्शी नेता स्वर्गीय डॉ. मनमोहन सिंह जी की जयंती पर उन्हें कोटि कोटि नमन करता हूँ ।
अपने दूरदर्शी नेतृत्व व आर्थिक सुधारों से आपने भारत को नई ऊँचाइयों तक प���ुँचाकर वैश्विक मंच पर मजबूत पहचान दिलाई।
रानीवाड़ा विधायक श्री रतन देवासी जी को जन्मदिन की ढ़ेर सारी बधाई एवं शुभकामनाएँ।
ईश्वर से आपके स्वस्थ, सुदीर्घ एवं खुशहाल जीवन की मंगलकामना है।
@RatanDevasiINC
जिसका अंदेशा था, वही हुआ।
आज दोपहर लगभग 2:15 बजे, नगरपालिका कुचेरा में नवनिर्वाचित पार्षदों को शपथ दिलवाने के बाद जैसे ही हम वहाँ से रवाना हुए, कुचेरा से बाहर की ओर श्री रिछपाल सिंह मिर्धा, श्री महेंद्र चौधरी एवं उनके साथ आए अन्य लोगों द्वारा लगभग 10–12 गाड़ियों में हमारा पीछा किया गया और हमारे साथ मौजूद पार्षदों को जबरन अपने साथ ले जाने का प्रयास किया गया।
इतना ही नहीं, इन लोगों द्वारा कुचेरा से मेरे नागौर स्थित प्रतिष्ठान तक हमारा लगातार पीछा किया गया। रास्ते में तथा नागौर पहुँचने के बाद भी कथित रूप से गाड़ियों को हमारे वाहनों के आगे दौड़ाने, रास्ता रोकने/दबाव बनाने एवं भय ��ा वातावरण पैदा करने जैसी हरकतें की गईं।
सबसे गंभीर बात यह है कि यह सब प्रशासन एवं पुलिस की मौजूदगी में होने के बावजूद स्थिति लगातार तनावपूर्ण बनी रही।
हमने पूर्व में ही पुलिस एवं प्रशासन को ऐसी घटना की आशंका से अवगत कराया था। आज हुई घटना को देखते हुए मैं पुलिस प्रशासन से मांग करता हूँ कि पूरे घटनाक्रम की तत्काल एवं निष्पक्ष जाँच की जाए, रास्ते एवं आसपास के CCTV फुटेज सुरक्षित किए जाएँ तथा घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका की जाँच कर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए।
साथ ही कांग्रेस एवं समर्थित विजयी पार्षदों तथा उनके परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
दिनांक 21 को होने वाले मतदान को देखते हुए कुचेरा में पर्याप्त पुलिस बल एवं विशेष सुरक्षा व्यवस्था की जाए, ताकि किसी भी पार्षद या मतदाता पर भय, दबाव अथवा किसी प्रकार का प्रभाव न डाला जा सके और मतदान स्वतंत्र एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो।
@GovindDotasra @INCRajasthan @IgpAjmer @NagaurPolice @PoliceRajasthan
निकाय चुनावों में आमतौर पर सत्ताधारी दल को बढ़त मिलती है, लेकिन 2026 के नतीजों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जबरदस���त सत्ता-विरोधी लहर और जनआक्रोश का संकेत दिया है।
भाजपाई सत्ता, प्रशासनिक मशीनरी और मुख्यमंत्री के रोड शो की पूरी ताकत लगाने के बावजूद कांग्रेस से वोट शेयर में महज 1% की बढ़त हासिल कर सकी। यानी जिस भाजपा को कभी कांग्रेस पर 8.12% की बढ़त थी, वो 2026 में ये अंतर सिमटकर सिर्फ 1% रह गई है।
2023 विधानसभा के मुकाबले भाजपा का वोट शेयर 7% और 2024 लोकसभा के मुकाबले 15% नीचे आ गया है। शहरी और कस्बों में जिन्हें भाजपा अपना मजबूत आधार मानती है, ये गिरावट भजनलाल सरकार के ढाई साल के कुशासन और जनविरोधी नीतियों के प्रति जनता की ब��़ी नाराजगी का संकेत है।
बोर्ड के आंकड़े भी भाजपा की कमजोरी उजागर करते हैं। कुल 309 निकायों में भाजपा को केवल 86 बोर्डों यानी 28.2% में ही स्पष्ट बहुमत मिला। अधिकांश निकायों में भाजपा अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में नहीं है, और उसे निर्दलीयों के सहारे की जरूरत पड़ेगी।
वार्ड परिणाम में भी तस्वीर साफ है। अब तक घोषित करीब 10,063 वार्डों में से 5,966 वार्डों करीब 60% में भाजपा उम्मीदवार जीत दर्ज नहीं कर सके। ये आंकड़ा बताता है कि शहरी निकायों के बड़े हिस्से में जनता ने भाजपा को समर्थन नहीं दिया।
कांग्रेस और भाजपा के बीच वार्डों का अंतर सिर्फ 500 वार्ड का है, लेकिन परिसीमन में हुई मनमानी और वार्डों के स्वरूप में किए गए बदलावों को भी विश्लेषण में शामिल किया जाए तो कांग्रेस का वास्तविक प्रदर्शन कहीं अधिक मजबूत भाजपा से 1000 से ज्यादा वार्डों में जीत दिखाता है।
भाजपा सत्ता के दुरुपयोग, सरकारी मशीनरी के इस्तेमाल, मुख्यमंत्री के रोड शो और प्रशासनिक दबाव के बावजूद 35.35% वोट शेयर पर सिमट गई और जबकि कांग्रेस 34.31% तक पहुंच गई।
ये सिर्फ चुनावी आंकड़ा नहीं, भजनलाल सरकार के खिलाफ बढ़ते जनआक्रोश का राजनीतिक संकेत है। राजस्थान की जनता ने निकाय चुनाव में बता दिया है कि 2028 की तस्वीर अभी से बिल्कुल साफ हो चुकी है।
राजस्थान की जनता से अपील 🙏
टूटी सड़कें, जलभराव, बंद स्ट्रीट लाइटें, कचरे के ढेर, पट्टों के लिए भटकते लोग... यही है BJP सरकार की हकीकत।
कांग्रेस जीतेगी तो शहरों में काम होगा। 9 और 11 सितंबर को अपने वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान कर कांग्रेस को भारी बहुमत से विजयी बनाएं।
परजीवी लोगों में खलबली इस बात से मची हुई है कि कहीं दुकानें बंद न हो जाए। अनर्गल बाते हो रहीं हैं।
समय का पहिया ही देख लीजिए कि लोगों ने अब उन लोगों को सीरियस लेना ही छोड़ दिया।
खेर समय पर हमारा साथ सहयोग याद आएगा।
बात पत्ते की है कि जब इंसान को फायदा मिले तो दोस्त वर्ना दुश्मन!
क्या सरकार इस बिटिया के आंसू पोंछ पाएगी?
परिवार झोंपड़ी में रहता है। इलाज के लिए न 7 साल पहले पैसे थे, न आज हैं। एक पैर टूटा हुआ है। बिटिया एक पैर से कूदते ह���ए स्कूल जाती है, ताकि पढ़ लिखकर कुछ बन सके। ट्राइसाइकिल होती तो बिटिया को इतना कष्ट न होता।
@UPGovt @myogiadityanath
📍बलिया, उत्तर प्रदेश
आदरणीय शिक्षा मंत्री श्री @madandilawar जी,
जालोर जिले के रानीवाड़ा विधानसभा के बिलड़ स्थित राजकीय प्राथमिक विद्यालय, तरापा नाडी में शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ अब बच्चों की मूलभूत जरूरतों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह विद्यालय पिछले करीब 4 वर्षों ��े पानी जैसी बुनियादी सुविधा के अभाव से जूझ रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि विद्यालय में पढ़��े वाले बच्चों की प्यास बुझाने के लिए ग्रामीणों को टैंकरों के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाना पड़ रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर सरकारी विद्यालय में बच्चों के लिए पानी की व्यवस्था भी ग्रामीणों के भरोसे क्यों है?
बताया जा रहा है कि जल जीवन मिशन के तहत पाइपलाइन विद्यालय क्षेत्र तक पहुंच चुकी है, लेकिन पानी आज तक नहीं पहुंच पाया। यदि पाइपलाइन पहुंच गई तो जलापूर्ति क्यों नहीं शुरू हुई? योजन�� पर खर्च हुई राशि का वास्तविक लाभ बच्चों तक कब पहुंचेगा?
इस समस्या का असर अब केवल पानी तक सीमित नहीं है। विद्यालय का नामांकन भी बेहद कमजोर स्थिति में पहुंच चुका है। जब किसी सरकारी विद्यालय में बच्चों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं होंगी, तो अभिभावक अपने बच्चों को वहां भेजने के लिए कैसे प्रेरित होंगे?
जिम्मेदारों से सीधे सवाल—
- चार वर्षों से समस्या बनी हुई है, फिर भी स्थायी समाधान क्यो��� नहीं?
- जल जीवन मिशन की पाइपलाइन पहुंचने के बावजूद पानी क्यों नहीं पहुंचा?
- पानी की समस्या के कारण कमजोर हो रहे नामांकन की जिम्मेदारी कौन लेगा?
- क्या सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को पीने का पानी उपलब्ध करवाना भी प्रशासन की प्राथमिकता नहीं है?
- जनप्रतिनिधियों ने इस विद्यालय की समस्या को लेकर अब तक क्या प्रयास किए?
ग्रामीण अपने स्तर पर टैंकरों से पानी पहुंचाकर बच्चों की प्यास बुझा रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि यह व्यवस्था आखिर कब तक चलेगी?
बच्चों के भविष्य से जुड़ा विद्यालय किसी अस्थायी व्यवस्था के भरोसे नहीं चल सकता।
माननीय मंत्री जी से आग्रह है कि इस मामले का तत्काल संज्ञान लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से जवाबदेही तय करवाएं, मौके की जांच करवाएं और विद्यालय में स्थायी पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करवाएं।
क्योंकि सवाल सिर्फ पानी का नहीं है—सवाल गांव के बच्चों के भविष्य, सरकारी विद्यालय में उनके भरोसे और शि��्षा व्यवस्था की संवेदनशीलता का है।
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