परिजनों के अनुसार मरीज को 3 दिन AIIMS इमरजेंसी में रखने के बाद बाहर कर OPD में दिखाने को कहा गया। वर्तमान में मरीज जमीन पर पड़ा है और आसपास मक्खियां भिनभिना रही हैं। कृपया तत्काल मेडिकल जांच, आवश्यक उपचार/भर्ती तथा मानवीय देखभाल सुनिश्चित कराएं। @aiims_newdelhi@PMOIndia
दशकों पुरानी मस्जिदों को अगर इस आधार पर नोटिस देकर बेदखली और बुलडोज़र के लिए रास्ते बनाए जा रहे हैं तो उन सैकड़ों मंदिरों का क्या , जो यूपी के हर जिले में सरकारी जमीनों पर बने हैं .
मैं जिस इलाके में रहता हूं , वहां बीते पच्चीस सालों में दर्जनों मंदिर सरकारी जमीनों पर बने हैं . पहले मूर्तियां रखी गई . फिर चबूतरा बना . फिर दीवार खड़ी हो गई . पहले छोटा मंदिर बना . फिर कुछ सालों के भीतर मंदिर का आकार बढ़ा दिया गया . सरकारी महकमों को पता है कि कहां कहां ऐसे मंदिर बने हैं लेकिन उन्हें कोई नोटिस देगा क्या ?
इस प्रकरण में @India_NHRC को स्वतः संज्ञान लेना चाहिए। संविधान की पंथनिरपेक्षता व समानता की भावना के अनुरूप सार्वजनिक स्थानों पर भेदभावपूर्ण अतिक्रमण न हो तथा धार्मिक गतिविधियाँ निर्धारित स्थलों और यात्राएँ कानून व यातायात नियमों के अनुसार संचालित हों। @rashtrapatibhvn@UN_HRC
'नमाज पढ़ना शर्म की नहीं, बल्कि फक्र की बात है। मैं मुकदमे से डरने वाला नहीं हूं। स्कूलों में सरस्वती वंदना होती है और सरकारी निर्माण कार्य से पहले भूमि पूजन किया जाता है। ऐसे में केवल नमाज को लेकर FIR करना या सवाल उठाना भेदभाव है।'
यह बात मुरादाबाद में सपा विधायक मोहम्मद फहीम इरफान के चाचा हाजी मोहम्मद उस्मान ने शनिवार को कही। मोहम्मद उस्मान का शुक्रवार (4 सितंबर) को मुरादाबाद के सर्किट हाउस में नमाज पढ़ने का वीडियो सामने आया था। इस मामले में मोहम्मद उस्मान के खिलाफ शुक्रवार को ही FIR दर्ज की गई। होने के बाद उस्मान ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि वीडियो कब और कहां का है? इसे किसने रिकॉर्ड किया है?
खबरः https://t.co/KZSk9leGMb
मेरठ में पार्कों, चौराहों, ग्रीन बेल्ट, सड़क किनारों एवं अन्य सार्वजनिक भूमि पर बने अवैध निर्माणों व अतिक्रमणों की पहचान की जाए। विधि अनुसार नोटिस व सुनवाई की प्रक्रिया पूर्ण कर सक्षम प्राधिकारी के आदेश पर निष्पक्ष एवं पारदर्शी ढंग से अवैध कब्जे हटाए जाएं।
#Meerut@DmMeerut
बाल झड़ना सिर्फ एक beauty concern नहीं, बल्कि health signal भी हो सकता है.
कम उम्र में पीछे खिसकती hairline, पतले होते बाल और समय से पहले सफेद होते बाल की वजह सिर्फ stress और genetics हैं, या फिर lifestyle, nutrition, hormones और छिपी हुई स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हैं?
'Ayushman Bhava' में जानिए बालों की सेहत से जुड़े मिथक, तथ्य और जरूरी सावधानियां.
अपने प्रश्न हमें भेजिए. आपके सवालों के जवाब विशेषज्ञों से दिलाने की कोशिश की जाएगी.👇
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#HairHealth #HairFall #HealthyLifestyle
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Indian authorities have demolished a mosque in Saharanpur, Uttar Pradesh, following a court ruling. The case was filed by a member of a Hindu nationalist group.
Mosque authorities say the building dates back to 1911. Rights groups are questioning the legality of the decision.
@ankur_7y भारत में मुसलमान होना गुनाह हो गया है। मुस्लिम समुदाय के लोगों को हर संभव तरीके से परेशान किया जा रहा है कभी नाम देखकर तो कभी कपड़े देखकर। मस्जिदों और मदरसों पर बुलडोजर कार्रवाई की जा रही है।
Two Muslim female journalists allege they were detained and brutally assaulted by police in India’s capital, Delhi. Police have denied the allegations, claiming the journalists were brought to the station over an illegal parking dispute.
2014 में एक पिता ने अपनी बेटी के ऑपरेशन के लिए AIIMS में पैसे और खून जमा कराया था। उसे भरोसा था कि अब उसकी बेटी ठीक हो जाएगी लेकिन 12 साल तक अस्पताल के चक्कर लगाने के बाद सर्जरी नहीं हुई और उसकी बेटी की 2026 में अभी मौत हो गई।
12 साल तक तारीखें मिलती रहीं, जांचें होती रहीं, शिकायतें होती रहीं और एक पिता अपनी बेटी को लेकर AIIMS के चक्कर लगाता रहा।
2026 में उसकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
यह कहानी है मुकेश परियानी और उनकी बेटी की, जिसके इलाज को लेकर पिता ने AIIMS पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
मुकेश के मुताबिक, वह पहली बार 10 अक्टूबर 2012 को अपनी बेटी को लेकर AIIMS की OPD पहुंचे थे। बच्ची के इलाज के लिए एक कमरे से दूसरे कमरे तक भेजा गया और शुरुआती जांचों में करीब एक साल लग गया।
बाद में उन्हें डॉ. सचिन तलवार के पास भेजा गया। पिता के अनुसार, डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए पैसे और खून जमा कराने को कहा। उन्होंने 4 अप्रैल 2014 को पैसे और खून दोनों जमा करा दिए।
फिर आई 2 सितंबर 2015 की तारीख। पिता ऑपरेशन की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें बताया गया कि ऑपरेशन दिवाली के बाद होगा।
इसके बाद उनका आरोप है कि ऑपरेशन की तारीख लगातार टलती रही।
उन्होंने PMO में शिकायत की। शिकायत के बाद अस्पताल से बुलाया गया। लेकिन पिता का आरोप है कि डॉक्टर ने शिकायत वापस लेने तक ऑपरेशन करने से इनकार कर दिया।
2018 में फिर जांचें हुईं। 2023 में फिर AIIMS पहुंचे। 2025 में दोबारा शिकायत की। 28 जुलाई 2025 को अस्पताल बुलाया गया, लेकिन डॉक्टर छुट्टी पर थे। बाद में परिवार से कहा गया कि बच्ची दवाइयों से संभाल सकती है।
9 फरवरी 2026 को पिता ने फिर शिकायत की। जांचें चलती रहीं, लेकिन उनके मुताबिक ऑपरेशन नहीं हुआ।
और फिर वह दिन आया, जिसका डर एक पिता को सबसे ज्यादा होता है।
उसकी 15 साल की बेटी की मौत हो गई।
अब मुकेश का सवाल है—अगर 2015, 2016 या 2017 में ऑपरेशन से बेटी ठीक हो सकती थी, तो इतने साल तक ऑपरेशन क्यों नहीं हुआ?
क्या इलाज में देरी हुई? क्या समय पर ऑपरेशन से बच्ची की जान बचाई जा सकती थी? इतने वर्षों में अस्पताल और डॉक्टरों की ओर से क्या-क्या कदम उठाए गए?
पिता के आरोप बेहद गंभीर हैं। इनका सच सामने आना जरूरी है।
AIIMS और संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों को पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर 2012 से 2026 के बीच इस बच्ची के इलाज में क्या हुआ और उसकी मौत के लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वह कौन है?
इतना सच नहीं बताओ अब तो इनके बीच अमित मालवीय भी नहीं रहा जो गोबर इतिहास अंध भक्तों को बता पाये
इसका मतलब कुंभ का मेला मुसलमानों की देन है?
इतिहास के पन्नों में दर्ज भी है और सत्य भी है लेकिन कुछ लोगों को बहुत बुरा लगेगा!
सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगवा दिए तो अब पेमेंट थाने के आसपास चल रही दुकानों पर रीसिव किया जाता है। एसपी गोपालगंज श्री विनय तिवारी ने पूरे मामले का भांडाफोड़ किया है। आप भी सिस्टम को समझिए।
आज मैंने ये पोस्ट दिल पर पत्थर रखकर की , वाकई इंसानियत आज शर्मसार हो गई
जब घर के बुजुर्ग बोझ लगने लगा तो सांप के डंक को इंजेक्शन बताकर खामोश कर दिया 😭
पिता का उम्र ज्यादा हो गया चल फिर नही पाते थे , पत्नी के कहने पर सुई के जगह सांप से कटा दिया
ऐसा बेटा से अच्छा है बिन औलाद के रहना ?