पानी और कर्बला
आज से लगभग 1350 वर्ष पहले (सन 680 ईस्वी में), इराक के कर्बला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन अपने मात्र
6 महीने के बेटे अली असगर और 72 साथियों के साथ, यज़ीद की क्रूर सेना के खिलाफ जंग में शहीद हुए थे।
यज़ीद के सैनिकों ने इमाम हुसैन के खेमे का पानी बंद कर दिया था और उनके 6 महीने के मासूम बच्चे अली असगर को भी एक बूंद पानी नसीब नहीं होने दिया।
जब इमाम हुसैन बच्चे की प्यास बुझाने के लिए पानी मांगने गए, तो पानी देने के बजाय यज़ीदी सेना के तीरंदाज हुरमुला ने तीन फाल वाले ज़हरीले तीर से अली असगर के गले पर वार कर उन्हें शहादत की राह पर भेज दिया।
उसी कर्बला की ऐतिहासिक शहादत और प्यास की याद में, हर साल मुहर्रम के शुरुआती 10 दिनों में मुस्लिम समाज के लोग जगह-जगह ‘सबील’ लगाकर आम जनता को पानी और शरबत पिलाते हैं।
ध्यान रहे,
“क़त्ल-ए-हुसैन असल में मर्ग-ए-यज़ीद है,
इस्लाम ज़िंदा होता है हर कर्बला के बाद।”
नेता विपक्ष श्री @RahulGandhi का कोटा एयरपोर्ट पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने आत्मीय स्वागत किया।
राहुल गांधी जी यहां 'कोटा महारैली' में शामिल होकर छात्रों और युवाओं के साथ संवाद करेंगे।
📍 राजस्थान
#ChhatronKiGoonj
संघ क्या काम करती है..?
संघ को पैसा कहा से आता है...?
जब देश मे हर फर्म हर संग��न यहाँ तक की एक ठेले वाले चाहे वाले का registration करवाने का प्रावधान है.
अंडे का expiry date डालने का प्रावधान है
तो संघ का registration क्यो नहीं हो सकता है
ताकि पता चले की फंडिंग कहा से हो रही है.
बिना कोई संबैधानिक पद के गृह मंत्रालय द्वारा Z+ Security देना ये कहा का नियम है.
Luxury गाड़ीयों से चलना आखिर फंडिंग कहा से आ रही है
150 करोड़ की आबादी वाले देश में, सिर्फ़ 20 लाख छात्रों के लिए एक परीक्षा आयोजित करने के लिए एयरफ़ोर्स की तैनाती और Telegram पर बैन लगाना पड़ रहा है।
यह तथाकथित मज़बूत सरकार के दौर के हालात हैं, जबकि कां���्रेस की कमज़ोर सरकारों के समय ये परीक्षाएं आसानी से हो जाती थीं। यह पेपर लीक माफ़िया को बचाने का नतीजा है।