अखिलेश की सपा ने पप्पू यादव के साथ मिलकर साधु-संतों और भगवा का जो मज़ाक बनाया है, उसका जवाब यूपी की जनता जल्द ही देगी। करारी हार उनका इंतज़ार कर रही है।
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समाजवादी पार्टी को अचानक भगवान याद आए, क्योंकि हिंदुत्व पर सपाइयों की ओवरएक्टिंग पकड़ी जा चुकी है।
अब समाजवादी पार्टी कह रही है कि चढ़ावा चोरी के मुद्दे का संतों से कोई लेना-देना नहीं… ऐसा नहीं होना चाहिए था। जबकि देश के करोड़ों सनातनियों ने अपनी आँखों से देखा कि पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर, तिलक लगाकर, रामलला की तस्वीर हाथ में लेकर साधु-संतों और सनातन को नीचा दिखाने वाली नौटंकी कर रहे थे। तब सपा सांसद रुचि वीरा, अवधेश प्रसाद और डिंपल यादव भी उसी ड्रामे में शामिल होकर तालियाँ बजा रहे थे।
शर्मनाक तो ये था कि समाजवादी सांसदों के सामने रामलला की तस्वीर ज़मीन पर रख दी गई और ये लोग ठहाके लगाते रहे।
अब जब जनता के सामने जवाब देते नहीं बन रहा, तो अचानक भगवान याद आने लगे।
दूसरी बात ये कि ‘वोट चोरी’ और ‘EVM हैकिंग’ का दुष्प्रचार करने वालों ने खुद अपने झूठ की पोल खोल दी है। दरअसल, जिनके पैरों तले ज़मीन खिसक चुकी होती है, ऐसे अपरिपक्व नेता ही एक उपचुनाव के नतीजे को भविष्य के विधानसभा या लोकसभा चुनाव का संकेत मानकर खुश होते हैं।
भाजपा के लिए चुनाव जीत या हार से बढ़कर लोकतंत्र की प्रक्रिया है।
भाजपा हर हार जीत का उचित निष्कर्ष निकालती है और हर बार नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ती है।