Editor: Shekhar ki baat LIVE
☝️मिजाज अल्लड़ है, दिल बनारसी है।
ट्विटर मेरी दुनिया नहीं है, यहां किये गये ट्विट पर सिर्फ मेरा कॉपीराईट है किसी भी संस्था का नहीं।
रावलपिंडी के तोहा खालसा गांव के कुएँ में थी इतनी हिंदू-सिख स्त्रियों की लाशें कि डूबने लायक पानी भी नहीं बचा
कहानी हिंदू-सिख स्त्रियों द्वारा 1947 में गांधी-नेहरू के दौर में किए गए जौहर की, जो अग्निकुण्डों में नहीं, जलकुण्डों में किया गया
@Shh_Shaili बता रही हैं जिहादी अत्याचारों की नसों में ख़ून जमा देने वाली त्रासदी की कहानी
मुस्लिम समुदाय के हमल���वरों द्वारा बेटी की हत्या के बाद चीत्कार करती ईसाई समुदाय की एक माँ,
इस्लामी मुल्क पाकिस्तान में कत्ल से पहले बाल पकड़ कर घसीटा गया, फिर सिर में मारी गई गोली,
उन्मादियों की नजर में क्रिश्चियन भी काफिर, उनका भी वही अंजाम जो वहां होता है हिन्दुओं के साथ..
@ICT_Police #Pakistan @UN_Women @geertwilderspvv
The future hasn’t happened. So why does it already have so much power over our peace?
We worry about what might happen and cling to the outcomes we desire.
The Bhagavad Gita teaches us to let go of attachment to results and find peace by fully embracing the present moment.
आगरा के सपा प्रदर्शन में अड़ीग धुरंधर कहा 🔥💪
योगी मोदी जिंदाबाद अखिलेश या��व मुर्दाबाद
सपाइयों के भीड़ में सिर्फ 2 शेरों ने महफ़िल लुट ली
सपाई भी सिर्फ देखते रह गए कुछ उखाड़ नहीं पाए
🚨 JNU में बड़ा विवाद!
JNU के 11 छात्रों ने ICC (आंतरिक शिकायत समिति) से शिकायत की है कि एक प्रोफेसर ने कथित तौर पर यौन संबंधों के बदले अतिरिक्त अंक (Extra Marks) देने क��� पेशकश की।
इस मामले पर AISA चुप है।
CJP के अभिजीत डिपके और सौरव दास भी चुप हैं।
जरा देखिए, पुलिस महिला छात्रों को कितनी बेरहमी से पीट रही है…
शर्म आनी चाहिए मोदी सरकार को…
ओह, एक मिनट…
ये तो कांग्रेस शासित तेलंगाना है।
तो फिर छोड़िए…
यहाँ लाठीचार्ज भी “लोकतंत्र” है और छात्रों की पिटाई भी “व्यवस्था”!
कश्मीर बन रहा बिहार, मस्जिदों के स्पीकर से इलाका छोड़���े के लिए हिंदुओं पर बनाया जा रहा दबाव। छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक कर रहे हैं हिंदुओं पर हमले। बक्सर का है मामला।
“1966 में Reliance Industries की शुरुआत हुई और 1998 तक 32 सालों तक एक पैसा टैक्स नहीं दिया गया। सवाल है—इन 32 सालों में सरकार किसकी थी? 🤔
सरकार Congress की थी… या Ambani की?” 🔥
— @nishikant_dubey
2004 से 2014 तक UPA सरकार सत्ता में रही। CAG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि 10 वर्षों में देश के 400 बड़े Industrial Houses का औसत Corporate Tax करीब 22.3% रहा।
लेकिन आम आदमी से कभी 40%, कभी 30%, कभी 20% तक टैक्स वसूला गया। ₹3-4 लाख की आय वाला गरीब और Middle Class भी टैक्स के दायरे में आया। ��
और दूसरी तरफ था “Revenue Forgone”—यानी बड़े Industrial Houses को दी गई टैक्स छूट का हिसाब! 📊
UPA के अंतिम वर्षों में करीब ₹5 लाख करोड़ के Revenue Forgone का आंकड़ा बताया गया।
आम आदमी से टैक्स वसूलो ✂️
बड़े कॉरपोरेट्स को राहत दो 💰
और फिर इसे “नीति” कहकर आगे बढ़ जाओ!
��ब सवाल सिर्फ टैक्स का नहीं, नीति की नीयत का है।
👉 आम आदमी पर टैक्स का बोझ क्यों?
👉 बड़े कॉरपोरेट्स को इतनी बड़ी टैक्स छूट क्यों? 🤔🇮🇳
देश जवाब मांगता है।
मस्जिदों से घोषणाएं हुईं
1500 की भीड़ बुलाई
महिलाओं को आगे किया
पत्थरबाजी हुई, CCTV खराब निकले।
NIA ने जो रिपोर्ट मालदा कांड को लेकर SC में सौंपी है उसने दिल्ली दंगों की याद दिला दी।