यह क्षत्राणी की दहाड़ है। आपके सामने जब मातृशक्ति नहीं डरी,मातृशक्ति ने आपके सारे चक्रव्यूह तोड़ दिए। हमारे भाई कोनसे डरने वाले हैं। मोदी जी हमारे भाई कॉकरोच वाले कीड़े मकोड़े नहीं है। ये शेरों के बच्चें हैं।ये सर्कस के शेर नहीं है। ये जंगल के शेर हैं। ये दहाड़ना जानते है।
#UGCRollback #जय_माँ_भवानी
वृन्दावन प्रवास के दौरान बाँके बिहारी मंदिर में प्रभु के दिव्य दर्शन कर क्षेत्रवासियों के सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की मंगलकामना की।
श्री बाँके बिहारी जी की कृपा सभी पर सदैव बनी रहे और प्रत्येक जीवन में सुख, शांति एवं समृद्धि का वास हो, यही कामना है।
‘और कितने मज़दूरों की जाने लेना बाक़ी रह गई है …?’
- रविंद्र सिंह भाटी
गिरल में धरणार्थी जैसाराम मेघवाल की मौत के बाद शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने प्रशासन से सवाल करते हुए लिखा! इस वक्त शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी मौके पर मौजूद !
#गिरल धरने पर बैठे जैसाराम मेघवाल की तबियत बिगड़ने से मौत,विधायक भाटी ने शव मोर्चरी में रखवाया
अपनी मांगों को ���ेकर #बाड़मेर के गिरल में धरने पर बैठे श्रमिकों में से एक मजदूर जेठाराम की तबियत बिगड़ने के बाद उसकी मौत हो गई। जिला अस्पताल में उसके निधन की खबर के बाद #शिव विधायक @RavindraBhati__ जिला अस्पताल पहुँचे और जैसाराम के शव को मोर्चरी रखवाया। निर्धन वर्ग से आने वाले जैसाराम अपनी वाजिब मांगों को लेकर धरने पर था। उसकी अपनी मांगों को लेकर दी गई कुर्बानी इस आंदोलन को नया रुख देगी जोकि सरकार और प्रशासन के लिए बड़ी चुनोती साबित होगा।
���ज प्रशासन के तानाशाही रवैये के कारण एक ग़रीब मज़दूर सिस्टम की भेंट चढ़ गया।
स्वर्गीय श्री जैसाराम जी मेघवाल जिन्होंने अपनी जमीनें देश और प्रदेश के विकास के लिए सरकारों को दी ताकि देश विकसित हो सके।
जो अपनी वाजिब मांगों को लेकर पिछले 2 महीने से गिरल माइंस ऑफिस के बाहर धरने पर थे। प्रशासन गहरी नींद में तब भी सो रहा था…..आज भी सो रहा है
और कितने मजदूरों की जाने लेना बाकी रह गयी है….?
#गिरल #मजदूर_आन्दोलन
पहुँच गई है घड़ी फैसला अब करना ही होगा,
दो में एक राह पर पगले पग धरना ही होगा।
समर शेष है नहीं पाप का भागी केवल व्याध,
जो तटस्थ हैं समय लिखेगा उनके भी अपराध।।
#ओरण_बचाओ#बालेसर
“सिर साँठे रुख़ रहे तो भी सस्तों जान।”
खेजड़ी केवल एक वृक्ष नहीं, बल्कि राजस्थान के त्याग, शौर्य और जीवंतता की जीवित पहचान है। यह प्रकृति के प्���ति यहाँ की गहन आस्था, संतुलित जीवनदर्शन और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है।
मरुस्थल की कठोर परिस्थितियों में खेजड़ी सदियों से जीवन का आधार बनी रही है, कहीं छाया बनकर, कहीं चारा बनकर, तो कहीं पर्यावरणीय संतुलन की धुरी बनकर। अकाल के थपेड़ो में इसने भोजन रूपी सहारा देकर जनजीवन को संबल दिया और आज यह पर्यावरण संतुलन एवं किसानों की आजीविका का मजबूत आधार है।
खेजड़ी जीव-जंतुओं के लिए पोषण का स्रोत है और मानव जीवन के लिए आशा का वृक्ष। यह प्रकृति और मानव के सहअस्तित्व की उस परंपरा को जीवित रखती है, जिस पर राजस्थान की आत्मा टिकी हुई है।
#खेजड़ी_बचाओ #ओरण_बचाओ
ओरण केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, यह हमारी देवीय आस्था और जीव-जंतुओं के सुरक्षित जीवन का आधार है।
यहाँ प्रकृति, परंपरा और संरक्षण एक साथ सांस ले��े हैं, ओरण हमारी सांझी धरोहर है।
हमारा ध्येय, इसका संरक्षण….
#ओरण_बचाओ_जैसाण_बचाओ
ओरण केवल भूमि का टुकड़ा नहीं, यह हमारी देवीय आस्था और जीव-जंतुओं के सुरक्षित जीवन का आधार है।
यहाँ प्रकृति, परंपरा और संरक्षण एक साथ सांस लेते हैं, ओरण हमारी सांझी धरोहर है।
हमारा ध्येय, इसका संरक्षण….
#ओरण_बचाओ_जैसाण_बचाओ#ओरण_बचाओ_जैसाण_बचाओ