भजनलाल जी को खुद पता नहीं कि चिरंजीवी योजना क्या है, राजस्थान का दुर्भाग्य है कि ऐसा अज्ञानी मुख्यमंत्री बना है...ये तो सीधा गांव से आ गए, इस बेचारे को क्या पता कि चिरंजीवी क्या है?
- परसादी लाल मीणा, पूर्व चिकित्सा मंत्री
#Rajasthan
कंगना को थप्पड़ मारने वाली आरोपी CISF जवान कुलविंदर कौर का वीडियो आया सामने कहते हुए सुना गया।
'किसान आंदोलन में महिलाओं को कह रही थी 100-100 लेकर बैठी हैं, मेरी मां बैठी थी वहां, ये बैठेगी' #kulwinderkaur
सभी सिविल सेवकों और अधिकारियों से हमारी अपील
हमारे प्रिय सम्मानित सिविल सेवकों और अधिकारियों,
मैं आपको विपक्ष के नेता (राज्य सभा) और भारतीय राष्ट्रीय ���ांग्रेस के अध्यक्ष की हैसियत से लिख रहा हूँ। 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव संपन्न हो चुके हैं और कल, 4 जून, 2024 को मतगणना होगी।
मैं भारत के चुनाव आयोग, केंद्रीय सशस्त्र बलों, विभिन्न राज्यों की पुल��स, सिविल सेवकों, जिला कलेक्टरों, स्वयंसेवकों और आप में से हर एक को बधाई देना चाहता हूँ जो इस विशाल और ऐतिहासिक कार्य के क्रियान्वयन में शामिल थे।
हमारे प्रेरणास्रोत और भारत के पहले गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सिविल सेवकों को “भारत का स्टील फ्रेम” कहा था। भारत के लोग अच्छी तरह जानते हैं कि यह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ही है जिसने भारत के संविधान के आधार पर कई संस्थाओं की स्थापना की, उ��की ठोस नींव रखी और उनकी स्वतंत्रता के लिए तंत्र तैयार किए।
संस्थाओं की स्वतंत्रता सर्वोपरि है, क्योंकि प्रत्येक सिविल सेवक संविधान की शपथ लेता है कि वह “अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक और कर्तव्यनिष्ठा से निर्वहन करेगा तथा संविधान और कानून के अनुसार सभी प्रकार के लोगों के साथ बिना किसी भय या पक्षपात, स्नेह या द्वेष के सही व्यवहार करेगा”। इस भावना से हम प्रत्येक ब्यूरोक्रैट और अधिकारी से - पदानुक्रम के ऊपर से नीचे तक, संविधान की भावना के अनुसार अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की अपेक्षा करते हैं, जो जो की बिना किसी दबाव, धमकी, या सत्ताधारी पार्टी/गठबंधन या विपक्षी पार्टी/गठबंधन से किसी भी प्रकार के दबाव के हो।
इस तथ्य को रेखांकित करना महत्वपूर्ण है कि कांग्रेस पार्टी ने पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ. बी.आर. अ��बेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, मौलाना आजाद, सरोजिनी नायडू और हमारे अनगिनत प्रेरणादायी संस्थापक सदस्यों द्वारा तैयार संविधान के माध्यम से न केवल मजबूत शासन का ढांचा तैयार किया, बल्कि ब्यूरोक्रेसी और नागरिक समाज में हाशिए पर पड़े लोगों को हमारे स्वायत्त संस्थानों में प्रतिनिधित्व देकर सकारात्मक कार्रवाई भी सुनिश्चित की।
पिछले दशक में स���्तारूढ़ पार्टी द्वारा हमारे स्वायत्त संस्थानों पर हमला करने, उन्हें कमजोर करने और दबाने का एक व्यवस्थित पैटर्न देखा गया है। परिणामस्वरूप भारत के लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंच रहा है। भारत को एक तानाशाही शासन में बदलने की व्यापक प्रवृत्ति है। हम तेजी से देख रहे हैं कि कुछ संस्थाएं अपनी स्वतंत्रता को त्याग रही हैं और बेशर्मी से सत्ताधारी पार्टी के हुक्मों का पालन कर रही हैं। कुछ ने पूरी तरह से उनकी संवाद शैली, उनके कामकाज के तरीके और कुछ मामलों में तो उनकी राजनीतिक बयानबाजी को भी अपना लिया है। यह उनकी गलती नहीं है। तानाशाही शक्ति, धमकी, बलपूर्वक तंत्र और एजेंसियों के दुरुपयोग के साथ, सत्ता के आगे झुकने की यह प्रवृत्ति उनके अल्पकालिक अस्तित्व का एक तरीका बन गई है। हालांकि, इस अपमान में भारत का संविधान और लोकतंत्र हताहत हुए हैं।
‘जनता की इच्छा’ सर्वोच्च है, और लो�� चाहते हैं कि भारतीय ब्यूरोक्रेसी सरदार पटेल द्वारा परिकल्पित उसी ‘भारत के स्टील फ्रेम’ पर वापस लौट आए - जिसे हमारे मजबूत संवैधानिक सिद्धांतों द्वारा टेफ्लॉन-कोट किया गया है, जो समय की कसौटी पर खरा उतरा है।
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अब समस्त ब्यूरोक्रेसी से आग्रह करती है कि वे संविधान का पालन करें, अपने कर्तव्यों का पालन करें और बिना किसी भय, पक्षपात या द्वेष के राष्ट्र की सेवा करें। किस�� से डरें नहीं। किसी असंवैधानिक तरीके के आगे न झुकें। किसी से न डरें और इस मतगणना दिवस पर योग्यता के आधार पर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करें। हम भावी पीढ़ियों के लिए आधुनिक भारत के निर्माताओं द्वारा रचित जीवंत लोकतंत्र और दीर्घकालिक संविधान के ऋणी हैं।
इस आशा के साथ कि भारत का स्वरूप वास्तव में लोकतांत्रिक बना रहे, मैं आप सभी को शुभकामनाएँ देता हूँ और उम्मीद करता हूँ कि संविधान के हमारे शाश���वत आदर्श बेदाग रहेंगे।
चुनाव आयोग ने चुनाव में प्रयुक्त होने वाली मशीनों के नंबर दिए थे। इसमें बैलेट यूनिट, ��ंट्रोल यूनिट और वीवीपैट शामिल है।
मेरे चुनाव क्षेत्र राजनादगांव मतदान के बाद फ़ॉर्म 17सी में जो जानकारी दी गई है उसके अनुसार बहुत स�� मशीनों के नंबर बदल गए हैं। जिन बूथों पर नंबर बदले हैं उससे हज़ारों वोट प्रभावित होते हैं।
और भी कई लोकसभा क्षेत्रों में यही शिकायतें मिली हैं। हम राज्य निर्वाचन पदाधिकारी से शिकायत कर रहे हैं।
@ECISVEEP को जवाब देना चाहिए कि किन परिस्थितियों में मशीनें बदली गई हैं और चुनाव परिणाम पर होने वाले असर के लिए कौन ज़िम्मेदार होगा?
बदले हुए नंबरों की सूची बहुत लंबी है पर एक छोटी सूची आप सबके अवलोकना��्थ संलग्न है।