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छात्र आंदोलनों और नई पीढ़ी को लेकर मोहन भागवत ने कहा कि बदलते समय के साथ कार्यशैली भी बदलनी होगी। उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सवाल पूछती है, इसलिए उन्हें तर्क, संवाद और अपनापन देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि "डिक्टेशन नहीं, डिस्कशन की जरूरत है।"
#MohanBhagwat#RSS#Students
जुल्म के खिलाफ प्रतिरोध और सामाजिक न्याय की प्रतीक, वीरांगना फूलन देवी को शहादत दिवस पर नमन। ✊🏽
बीहड़ की परिस्थितियों और शोषित वर्ग पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ बंदूक उठाकर न्याय की अलख जगाने वाली, और बाद में संसद पहुंचकर वंचितों व महिलाओं की सशक्त आवाज़ बनने वाली पूर्व सांसद फूलन देवी की पुण्यतिथि पर हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
फूलन देवी केवल एक नाम नहीं, बल्कि अन्याय के खिलाफ अटूट आत्मसम्मान और सामाजिक बदलाव की प्रतीक हैं। जातिवादी व्यवस्था और हिंसा को ललकारने वाली इस योद्धा की गाथा हमेशा न्याय की लड़ाई को प्रेरित करती रहेगी।
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NEET-UG पेपर लीक विवाद और देशभर में चल रहे छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंप दिया। अपने पत्र में उन्होंने कहा कि छात्रों का भविष्य सर्वोपरि है और शिक्षा व्यवस्था पर जनता का भरोसा बनाए रखना जरूरी है।
#DharmendraPradhan #NEET #Education #Students #cjp #jantarmantar
पेपर लीक विवाद और छात्रों के लगातार विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देर रात वीडियो संदेश जारी कर बड़ा ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक कोई मामूली विषय नहीं है और इससे लाखों छात्रों व उनके परिवारों का भविष्य प्रभावित होता है। उन्होंने बताया कि फास्ट-ट्रैक कोर्ट और दोषियों के लिए कड़ी सजा से जुड़े प्रस्ताव को शुक्रवार की केंद्रीय कैबिनेट बैठक में रखा जाएगा। सरकार का कहना है कि कानून को जल्द संसद में लाने का प्रयास किया जाएगा ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लग सके।
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पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र का बड़ा फैसला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। कहा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
#PaperLeak#NEET#NarendraModi#Education#Students#jantarmantar
पेपर लीक विवाद के बीच केंद्र का बड़ा फैसला।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाने का ऐलान किया। कहा, युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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NEET पेपर लीक पर बसपा प्रमुख का बड़ा बयान, भ्रष्टाचार और राजनीतिकरण पर जताई चिंता
NEET समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक के मामलों को लेकर जारी विरोध-प्रदर्शनों के बीच बसपा प्रमुख ने विस्तृत प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ऐसी घटनाएं देश में हर स्तर पर पनप रहे भ्रष्टाचार का परिणाम हैं। उन्होंने कहा कि पेपर लीक और अन्य अनियमितताओं का सबसे अधिक नुकसान छात्रों और उनके परिवारों को उठाना पड़ रहा है।
बसपा प्रमुख ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी हो या विभिन्न राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं में पेपर लीक के मामले, ये सभी भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी होने का संकेत हैं।
उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि संवैधानिक नैतिकता (Constitutional Morality) का भी विषय है। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने सुशासन के लिए संवैधानिक नैतिकता को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया था, लेकिन इसके अभाव में "भ्रष्टाचार देश को दीमक की तरह खाता चला आ रहा है।"
बसपा प्रमुख ने सरकार और न्यायपालिका से अपील की कि देशहित और जनहित को ध्यान में रखते हुए इस गंभीर स्थिति के समाधान के लिए पहल की जाए, ताकि छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो और सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।
उन्होंने आंदोलन के राजनीतिकरण पर भी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि किसी भी छात्र आंदोलन को राजनीतिक दलों द्वारा अपने संकीर्ण स्वार्थ के लिए इस्तेमाल करना उचित नहीं है। उन्होंने सरकार और आंदोलनकारियों, दोनों से संवाद के माध्यम से जल्द से जल्द शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण समाधान निकालने की अपील की।
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सुप्रीम कोर्ट में छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान CJI न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने वीडियो साक्ष्य दिखाने की मांग पर कहा, "हम वीडियो देखने में रुचि नहीं रखते, हमारे पास समय नहीं है।" इस टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई है।
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संसद परिसर में दूसरे दिन भी डटे रहे चंद्रशेखर आजाद
छात्रों की मांगों को लेकर बाबा साहेब की प्रतिमा के नीचे जारी धरना
20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध में शुरू किया धरना
#ChandrashekharAzad#StudentsProtest#Parliament#Education#cjp
NEET पेपर लीक मामले पर संसद में सियासत तेज हो गई है।
केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने की सहमति जता दी है, लेकिन विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा हुआ है। विपक्ष का आरोप है कि देशभर में हुई परीक्षा अनियमितताओं की नैतिक जिम्मेदारी शिक्षा मंत्री को लेनी चाहिए।
सरकार का कहना है कि वह संसद में हर सवाल का जवाब देने और चर्चा के लिए तैयार है। वहीं विपक्ष का कहना है कि केवल चर्चा नहीं, बल्कि जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। इसी मांग को लेकर संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव लगातार जारी है।
NEET पेपर लीक ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि संसद में होने वाली चर्चा से कोई ठोस समाधान और जवाबदेही तय होती है या यह मामला केवल राजनीतिक बहस तक सीमित रह जाता है।
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रणदीप सुरजेवाला की टिप्पणी पर विवाद, दलित समुदायों को पेशे से जोड़ने पर उठे सवाल
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद रणदीप सुरजेवाला की एक टिप्पणी को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सुरजेवाला वाल्मीकि, धानक, रविदासिया और अन्य समुदायों का नाम लेते हुए सरकार से इन समुदायों के बेरोजगार युवाओं को मोहल्लों से कूड़ा उठाने के लिए छोटी गाड़ियां उपलब्ध कराने की बात कहते दिखाई दे रहे हैं।
इस टिप्पणी के वायरल होने के बाद दलित समुदाय के कई लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सोशल मीडिया यूज़र्स ने तीखी आपत्ति जताई है। आलोचकों का कहना है कि किसी विशेष जाति के युवाओं को सफाई कार्य जैसे पारंपरिक पेशों से जोड़कर देखना सामाजिक समानता और गरिमा के सिद्धांतों के विपरीत है। उनका आरोप है कि यह टिप्पणी जाति और पेशे को एक-दूसरे से जोड़ने वाली मानसिकता को दर्शाती है।
विवाद के बीच कांग्रेस की ओर से इस टिप्पणी पर कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। वहीं सोशल मीडिया पर सुरजेवाला से बयान वापस लेने और माफी मांगने की मांग भी उठ रही है। दूसरी ओर, कुछ समर्थकों का कहना है कि उनके बयान का उद्देश्य सरकार की नीतियों की आलोचना करना था और उसे संदर्भ से अलग करके प्रस्तुत किया जा रहा है।
इस विवाद ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि क्या सार्वजनिक जीवन में नेताओं द्वारा जाति विशेष का उल्लेख करते हुए उन्हें पारंपरिक पेशों से जोड़ना सामाजिक न्याय और संवैधानिक समानता की भावना के अनुरूप है।
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बेअदबी के आरोप के बाद दलित मजहबी सिख मेवा सिंह की हत्या, पंजाब में कानून-व्यवस्था पर उठे सवाल
पंजाब के फतेहगढ़ साहिब जिले में 2020 के गुरु ग्रंथ साहिब बेअदबी मामले के आरोपी और दलित मजहबी सिख समुदाय से जुड़े मेवा सिंह की उनके घर में धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, अज्ञात हमलावरों ने घर में घुसकर वारदात को अंजाम दिया। मामले की जांच जारी है और हत्या के पीछे के कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है।
मेवा सिंह 2020 के बेअदबी मामले में आरोपी थे और जमानत पर बाहर थे। उनकी हत्या के बाद पंजाब में कानून-व्यवस्था, दलित समुदाय की सुरक्षा और संवेदनशील मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया और विभिन्न संगठनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है।
घटना के बाद विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भगवंत मान सरकार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यदि किसी आरोपी के खिलाफ मामला अदालत में विचाराधीन है, तो उसके दोष या निर्दोष होने का फैसला कानून को करना चाहिए, न कि हिंसा के जरिए। सरकार की ओर से पुलिस को जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी और मामले की निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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कबीरा कुंआ एक हैं पानी भरैं अनेक।
बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक।।
समाज में व्याप्त कुरीतियों एवं भेदभाव के विरुद्ध जन-जागृति पैदा करने वाले महान समाज सुधारक, भक्ति आंदोलन के प्रवर्तक, महान कवि "संत कबीर दास" जी के प्रकाश पर्व पर उन्हें कोटि-कोटि नमन
मद्रास हाई कोर्ट का बड़ा फैसला:
इस्लाम अपनाने पर नहीं मिलेगा 'पिछड़े मुस्लिम' (BC) आरक्षण का लाभ।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि धर्म परिवर्तन के बाद पिछली मूल जाति का कोई महत्व नहीं है और व्यक्ति केवल 'मुस्लिम' है।
2024 का सरकारी आदेश असंवैधानिक घोषित।
#ReservationRules
यूपी कांग्रेस में बड़ा संगठनात्मक बदलाव
2027 विधानसभा चुनाव से पहले अविनाश पांडे की जगह वरिष्ठ नेता राजेंद्र पाल गौतम बने उत्तर प्रदेश के नये प्रभारी
सवाल- क्या यह बदलाव U.P की राजनीति में कांग्रेस के लिए नये समीकरण तैयार करेगा?
#Congress#rahulgandhi#UttarPradeshPolitics
सोशल मीडिया पर एक ओर पार्टी की एंट्री हुई है। पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने 'इश्क करो पार्टी' के गठन का ऐलान किया है। पार्टी का नारा 'नफरत छोड़ो, इश्क करो' रखा गया है। उन्होंने टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा को भी पार्टी से जुड़ने का न्योता दिया है
#IshqKaroParty
बसपा की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज. संगठन विस्तार पर रहेगा फोकस
लखनऊ। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज लखनऊ में आयोजित होगी। बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती, राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
सूत्रों के अनुसार बैठक में संगठन विस्तार, आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों और बूथ स्तर तक पार्टी को मजबूत बनाने की रणनीति पर चर्चा होगी। इसके अलावा विभिन्न सामाजिक वर्गों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने और भाईचारा अभियान को प्रभावी बनाने के मुद्दों पर भी मंथन किया जाएगा।
बताया जा रहा है कि प्रदेश इकाइयों की कार्यप्रणाली, संगठनात्मक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की समीक्षा भी बैठक के एजेंडे में शामिल है। विधानसभा चुनावों से पहले होने वाली इस बैठक को बसपा की राजनीतिक रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
#BSP #Mayawati #AkashAnand #SatishChandraMishra #Lucknow
बहुजन समाज पार्टी की प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक आज लखनऊ में आयोजित होगी। बैठक में बसपा सुप्रीमो मायावती, राष्ट्रीय समन्वयक आकाश आनंद और वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा समेत पार्टी के कई वरिष्ठ पदाधिकारियों के शामिल होने की संभावना है।
#BSP#mayawati#akashanand#Lucknow#up
एक महीने में 5 बड़ी घटनाएं, लेकिन चुप्पी क्यों?
रामपुर, मुक्तसर, कुरुक्षेत्र, हांसी और देवरिया की घटनाओं का हवाला देकर सामाजिक कार्यकर्ता @SurajKrBauddh ने दलित नेताओं की भूमिका पर उठाए प्रश्न।
दलित अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता सूरज कुमार बौद्ध ने हाल में विभिन्न राज्यों में सामने आई दलित उत्पीड़न की घटनाओं को लेकर दलित नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट में उन्होंने कहा कि एक महीने के भीतर दलित समाज के खिलाफ कई गंभीर घटनाएं सामने आईं, लेकिन इन मामलों में समुदाय के प्रमुख नेताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया देखने को नहीं मिली।
अपने पोस्ट में सूरज बौद्ध ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा की उन घटनाओं का जिक्र किया जिनमें दलित समुदाय के लोगों के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म, मारपीट और सार्वजनिक अपमान जैसी घटनाएं सामने आईं। उन्होंने रामपुर, मुक्तसर, कुरुक्षेत्र, हांसी और देवरिया की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये मामले केवल आपराधिक घटनाएं नहीं हैं, बल्कि समाज में मौजूद जातिगत भेदभाव और हिंसा की गंभीर तस्वीर भी पेश करते हैं।
सूरज बौद्ध ने आरोप लगाया कि इन मामलों में दलित समुदाय के किसी भी प्रमुख नेता ने खुलकर आवाज नहीं उठाई। उन्होंने लिखा कि समाज के अधिकांश नेताओं को लगता है कि दलित समाज उनके साथ बना रहेगा, इसलिए वे ऐसे मामलों पर सक्रिय हस्तक्षेप की आवश्यकता महसूस नहीं करते।
अपने पोस्ट में उन्होंने यह भी कहा कि कई नेता अन्य समुदायों से जुड़े मुद्दों पर लगातार बयान देते हैं, लेकिन जब दलित समाज के लोगों के साथ अत्याचार की घटनाएं होती हैं तो उनकी प्रतिक्रिया दिखाई नहीं देती। इसी संदर्भ में उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इन घटनाओं पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक आवाज क्यों नहीं सुनाई दी।
सूरज बौद्ध का यह पोस्ट दलित समाज के नेतृत्व, उसकी प्राथमिकताओं और अत्याचार के मामलों में उसकी भूमिका को लेकर नए सवाल खड़े करता है।
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