एक वीडियो ने झकझोर दिया —
एक सैनिक की माँ गिड़गिड़ा रही है न्यूज़ चैनलों से:
“कृपया जंग को ड्रामा मत बनाइए। हमारे बेटे सरहद पर हैं, असली गोलियाँ चल रही हैं, और आप लोग टीवी पर नकली युद्ध रच रहे हैं।”
ये सिर्फ़ TRP नहीं, ��ूरे देश का भरोसा खोने की ऊँचाई है।
सैनिकों के परिवार तनाव में हैं, और मीडिया तमाशा कर रहा है।
जो ब्राह्मण कल तक“बंटोगे तो कटोगे” का नारा बुलंद कर राहुल गांधी को कोस रहे थे,
जो कल तक जाति जनगणना की माँग करने वालों को अर्बन नक्सली और देश तोड़ने वाला बता रहे थे वो आज मुझे व्हॉट्सएप पर ये भेज रहे हैं।
अरे भई भक्ति में ही तो शक्ति है,🤣🤣😂😂😛😛
जय जय श्रीराम
क्या आप जानते है कि अरिजीत सिंह का एक होटल है जिसमें सिर्फ ₹40 का खाना मिलता है
ज़्यादातर सेलिब्रिटीज़ जहाँ 5 स्टार होटल खोलते हैं, ताकि भविष्य के लिए पैसा कमा सकें, वहीं सिंगर अरिजीत सिंह ने एक ऐसा होटल खोला है,
जो उन्हें भले ही करोड़ों की कमाई न दे, लेकिन लोगों की दुआओं से उनकी झोली भर जाएगी।
मुर्शिदाबाद के जियागंज में अरिजीत का 'हेशेल' नाम का होटल, जहा�� सिर्फ 40 रुपये में भरपेट खाना मिलता है।
पहलगाम घटना के चश्मदीद कुलदीप स्थापक "नज़ाकत अली" के लिए हैं लिखते ❤️❤️
जम्मू-कश्मीर, पहलगाम।
नजाकत भाई के नाम एक दिल से लिखा गया खत...
मेरे भाई, आपने जिस जज़्बे और बहादुरी से हमें वहाँ से निकाला, वो मंजर अभी भी मेरे कानो ���ें गूंज रहा है, चारों तरफ अफरा- तफरी, गोलियों की आवाजें, चीख- पुकार ओर मौत का साया था, वो कोई ��म इंसान नहीं कर सकता। अपनी जान को दांव पर लगाकर जो इंसानियत आपने दिखाई, वो शब्दों से परे है। मैं ज़िंदगी भर आपका शुक्रगुज़ार रहूंगा—ये एहसान कभी नहीं भूल सकता।
हम तो शायद इस मुश्किल हालात से निकल आएं, लेकिन दिल में बस एक ही चिंता है—आप और आपका परिवार। आज हर न्यूज़ चैनल पर आपका नाम है, लोग तारीफ़ कर रहे हैं, लेकिन असली सवाल ये है—अब आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन उठाएगा?
लोग धर्म और जाति पर बह�� करेंगे, लेकिन जिसने इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल पेश की, उस नजाकत भाई को वहां कौन संभालेगा? यही सोचकर दिल बेचैन हो जाता है।
कुछ के लिए ये सिर्फ एक खबर होगी, एक वीडियो, एक क्लिक… लेकिन हमारे लिए ये ज़िंदगी और मौत का फासला था—और उस ��ासले को आपने अपने कंधे पर उठाकर पार किया।
मेरे बच्चे को, आपने खुद अपने गोद में उठाया, कंधे पर बैठाकर उन खतरनाक पहाड़ियों पर 14 किमी तक दौड़ते रहे। जब मुझे लगा कि अब शायद मैं नहीं बचूंगा मेरी हिम्मत जवाब दे चुकी थी, तब मैंने उस वक्त एक बात कही थी —"भाई, मेरे बच्चे को घर तक सुरक्षित पहुंचा देना..."
और आपने सिर्फ मेरा बच्चे ही नहीं, मेरा हौसला बढ़ाते रहे मुझे और अपने उस बच्चे के साथ पिता की आखिरी उम्मीद को भी बचा लिया और सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया, अगर आप नहीं होते तो मैं ये शब्द लिखने के लिए भी जिंदा नहीं होता।
जो दुर्घटना हुआ उसे तो मैं जल्द से जल्द भूलना चाहता हु लेकिन, वो 45 मिनट का मंजर, वो पहाड़ी को पार करना था और जहां मैं हार मान गया था उसके बाद भी मेरा हौसला बढ़ाते बढ़ाते अपने मेरा साथ नहीं छोड़ा और मेरे बच्चे और परिवार के लिए अपने जो क��या उसको जीवन भर नहीं भूल सकता हूँ।
नजाकत भाई, आपने उस दिन सिर्फ जान नहीं बचाई, इंसानियत को ज़िंदा रखा।
आपको मैं ताउम्र भर नहीं भूल सकता।
संदीप चौधरी ने भाजपाइयों को रगड़ दिया 🔥🔥🔥🔥
"जब कांवड़ यात्रा होती है, रथ यात्रा होती है, गणेश चतुर्थी होती है, तो क्या लोगों को परेशानी नहीं होती? केवल नमाज़ प��� ही प्रतिबंध क्यों?"🔥🔥
वीडियो डिलीट होने से पहले रीट्वीट करके पुरे देश में फैला दो 🙏