#आदिपुरुष_कबीर
Kabir Is God
श्रीमद्भगवद गीता अध्याय 8 का श्लोक 3 में
गीता ज्ञान दाता ब्रह्म भगवान ने कहा है कि वह परम अक्षर ‘ब्रह्म‘ है जो जीवात्मा के साथ सदा रहने वाला है।
वह परम अक्षर ब्रह्म गीता ज्ञान दाता से अन्य है, वह कबीर परमात्मा हैं।
#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
सिकंदर लोदी के धार्मिक पीर शेखतकी ने कबीर साहेब को मारने के लिए 52 बार प्रयास किये, कि���तु शेखतकी असफल रहा। क्योंकि उस अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब को मारने में कोई भी समर्थ नहीं है।
God Kabir Prakat Diwas
#कबीर_भगवान_के_चमत्कार
इसी ईर्ष्यावश उसने कबीर साहेब को खौलते सरसों के तेल की कढ़ाई में डालने की योजना बनाई। कबीर साहेब जी स्वयं कढ़ाई में विराजमान हुए किंतु उनका शरीर ज्यों का त्यों बना रहा। ऐसा प्रत���त हो रहा था जैसे ठंडे पानी में कबीर साहेब जी विराजमान हों। यह सब देखकर सभी
#Satlok_Vs_Earth
🏡ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 96 मंत्र 18 के अनुसार पूर्ण परमात्मा कविर्देव का निजधाम तीसरा मुक्ति धाम "सतलोक" में है। जहाँ जाने के बाद मनुष्य का जन्म मरण नहीं होता है।
जबकि पृथ्वी लोक / काल लोक पर जन्म - मरण का चक्र चलता ही रहता है।
Sant Rampal Ji Maharaj
#Satlok_Vs_Earth सतलोक
V/S
पृथ्वी लोक
हम सभी ने एक वाणी सुनी है 'जो इच्छा करहो मनमाहीं, राम कृपा कुछ दुर्लभ नाहीं' यह वाणी सतलोक के सुख का वर्णन करती है। जहाँ पर बिना किये सब ���ुख-सुविधा उपलब्ध है।
जबकि पृथ्वी लोक में बिना कर्म किये कोई भी वस्तु प्राप्त नहीं होती।
Sant Rampal Ji
#Satlok_Vs_Earth
काल लोक/पृथ्वी लोक पर प्रत्येक जीव दुःखी है।
सतलोक सुख का सागर है। वहां दुख नाम की कोई चीज़ नहीं। जन्म-मृत्यु नहीं है। बुढ़ापा नहीं है।
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Sant Rampal Ji Maharaj
#SatlokVsEarth
सतलोक कैसा है
सतलोक एक अमर स्थान है जहां पर प्रत्येक जीव आत्मा का 16 सूर्य के तेज के समान होता है जहां पर सिर्फ पूर्ण गुरु के द्वारा सत भक्ति से ही हम सब प्राणी सतलोक की प्राप्ति कर सकते हैं
#GodMorningSaturday
पृथ्वी लोक में सब कर्म बंधन से बंधे हैं। जीव को तीनों गुणों के प्रभाव से विवश कर सब कार्य करवाया जाता है।
जबकि सतलोक में किसी गुण का कोई दवाब नहीं है। जीव पूर्णतया स्वतंत्र है।
@AmarBodhBook
#Reality_Of_RadhaSoami_Panth
राधास्वामी पंथ निगुरा पंथ है
इस पंथ के मुखिया शिवदयाल जी ने कोई गुरु नहीं बनाया, मृत्यु के बाद भूत बना।
परमेश्वर कबीर साहेब जी कहते हैं:
गुरु बिन माला ��ेरते, गुरु बिन देते दान।
गुरु बिन दोनों निष्फल हैं, पूछो वेद पुराण।।