आगरा में रेंगते हुए कचहरी पहुंचा कॉकरोच. ये निलंबित फायरकर्मी जितेंद्र राठौर हैं. जितेंद्र के खिलाफ एक छात्रा ने 2024 में यौन उत्पीड़न केस दर्ज कराया था. उस वक्त जितेंद्र की तैनाती महाराजगंज जिले में थी. मुकदमा दर्ज होने के बाद उसे पद से निलंबित कर दिया गया. वर्तमान में मामला दीवानी न्यायालय में विचाराधीन है.
जितेंद्र कॉकरोच बन कचहरी में तारीख पर पहुँचे थे. घुटने के बल चलते हुए वे दीवानी परिसर में एंट्री कर रहे थे, तभी गेट नंबर जवानों ने रोक दिया. इस पर जितेन्द्र धरने पर बैठ गए.
जितेंद्र राठौर ने बताया- मैंने 12 फरवरी 2024 को एक नकल माफिया के खिलाफ FIR दर्ज कराई थी. 9 जुलाई 2024 को नकल माफिया ने मेरे ऊपर अपनी बेटी को सामने रखकर यौन उत्पीड़न का झूठा आरोप लगा दिया, जबकि 9 जुलाई 2024 को मैं जनपद महाराजगंज में मेरी पोस्टिंग थी, वहां पर ऑन ड्यूटी था.
ये वीडियो सभी भारतीयों को अधिक से अधिक देखना चाहिए।
इसमें हमारे पसंदीदा नेता, जो दुनिया के टॉप वैज्ञानिक और अर्थशास्त्री भी हैं, बड़े जोश से बता रहे हैं कि “2029 में मोदी जी के प्रधानमंत्री बनते ही आलू-टमाटर से लेकर पेट्रोल-डीजल, LPG, CNG, दुपहिया वाहन, ऑटो, चरपहिया, बच्चों के स्कूल की किताबें व आम जीवन में इस्तेमाल में लाई जाने वाली सैंकड़ों वस्तुओं तक सब सस्ता हो जाएगा।”
मुझे तो लगता है इससे देश 2047 से पहले ही विकसित हो जाएगा और हम PoK व बांग्लादेश भी वापस ले लेंगे!! वाउ, अब तो मेरा, मेरे परिवार के 74 लोगों का और पूरे मोहल्ले और आसपास के सभी गाँवों का वोट अब सिर्फ मोदी जी को ही जाएगा। 💙
Iran's Ghalibaf:
The goal of negotiations is to end the war and create lasting security, not to normalize relations with the United States.
I assure the dear people that we will continue to defend the rights of the Iranian people with strength.
Iran's Ghalibaf:
The case of Lebanon demonstrated that diplomacy, alongside military action, can push back enemies.
At one time, we prevent an attack on Beirut through threats of retaliation and by suspending negotiations; at another time, through military action.
Iran's Ghalibaf:
The choice is not between fighting and negotiating. Rather, we must fight when the time is right and negotiate when the time is right.
This is how we can defeat the enemy and make real the idea that negotiations are a continuation of the struggle.
देशभर के बच्चों का भविष्य भाजपा ने नहीं ख़ुद उनके माँ-बाप ने बर्बाद किया है. क्या ये माँ-बाप नहीं जानते थे कि भाजपा को शिक्षा और रोज़गार से कोई मतलब नहीं है?
चले थे अब्दुल को टाइट करने…अब जब अपने बच्चे ही टाइट होने लगे तो रोना आ रहा है? इन बच्चों के असली गुनहगार उनके माँ-बाप हैं🤔
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