कांस्टेबल अशोक की गलती हो सकती है उसने तस्करों को शादी में बुलाया भी होगा हम इसके पक्षधर नहीं है
पर यह राजस्थान में कोई नई बात नहीं है अशोक को जाति देखकर बर्खास्त करना कतई जायज नहीं
@AmitBudania9121#अशोक_बिश्नोई_को_बहाल_करो
भुटाराम बाबल जी की पुलिस एनकाउंटर में हुई मृत्यु अत्यंत गंभीर और संवेदनशील मामला है।
यह सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों की कसौटी है।
लोकतंत्र में अंतिम निर्णय न्यायालय का होता है, किसी त्वरित कार्रवाई का नहीं।
हमारी स्पष्ट मांग है–
• प्रकरण की स्वतंत्र व निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जाए।
• पूरी घटना की पारदर्शी जानकारी जनता के सामने रखी जाए।
• यदि किसी प्रकार की प्रक्रिया में त्रुटि या उल्लंघन हुआ हो तो दोषियों की जवाबदेही तय की जाए।
न्याय और कानून की मर्यादा बनाए रखना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।
दिवंगत आत्मा को विनम्र श्रद्धांजलि, और निष्पक्ष न्याय की अपेक्षा।
@RajCMO@RajGovOfficial @CMHelpdesk @BJP4Rajasthan
श्री गुरू जम्भेश्वर भगवान निर्वाण स्थल लालासर साथरी धाम पर चल रही कथा के द्वितीय दिवस पर महंत डॉ स्वामी सच्चिदानंद आचार्य ने बताया कि, जिसके मन में दया का भाव नहीं वह धार्मिक नहीं हो हो सकता। धर्म के मार्ग पर चलने वाले के लिये दया व करूणा ह्रदय में होना आवश्यक है।
करुणा भरे ह्रदय से अपनत्व का विस्तार ���ोता है।अनन्त के साथ प्रेम होना ही संतत्व की प्राप्ति है।
उन्होंने कहा, “प्रेम जब अनंत हो गया,रोम रोम संत हो गया। देवालय हो गया बदन मन मेरा महंत हो गया॥”
सबदवाणी का उद्धरण देते हुए कहा कि,’जड़ियाँ बूंटी जे जग जीवे,तो वेदा क्यूँ मर जाही’ औषधि से बीमारी का इला�� संभव व परंतु मृत्यु अवश्यंभावी है ।
इस नश्वर शरीर से अविनाशी परमात्मा की प्राप्ति करना ही जीवन की परम उपलब्धि है।
जाम्भाणी साहित्य अकादमी के संरक्षक स्वामी कृष्णानंद आचार्य ऋषिकेश ने सामाजिक कुरीतियों पर प्रहार करते हुए सामाजिक कार्यक्रमों में मितव्ययिता का महत्व बताया।
श्री महंत शिवदास शास्त्री रूड़कली ने वाणी विचार कर बोलने की बात कही। वाणी व्यक्तित्व की निर्मात्री होती है। अपने घरों में व्यावहारिक भाषा मधुर होनी चाहिए।
समराथल धोरा के वयोवृद्ध महंत स्वामी रामकृष्णदास महाराज ने अपने बच्चों की संगति पर कड़ी नज़र रखने की सलाह दी।क्योंकि अच्छी शिक्षा तो स्कूल कोलेज व परिवार में मिल जाती है परंतु बुराईयां सारी संगति से ही आती है।
मेहराणा धोरा पंजाब के मंहत स्वामी मनोहरदास शास्त्री ने ज���व दया पालणी रूँख लीलो नही घावे इन दो पंक्तियों को बिश्नोई समाज का ध्येय वाक्य बताया।
हरिद्वार से आये महंत स्वामी प्रणवानंद महाराज ने कहा कि जैसे पारस का स्पर्श पाकर लोहा सोना तो बन जाता है परंतु अपनी धार,मार व आकार को नहीं छोड़ पाता है। वैसे ही सत्संग में जो लोग सुनकर धारण नहीं करते उनके व्यवहार में परिवर्तन नहीं आता है।
लालासर साथरी में पूरे देशभर से श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है।साथर��� सेवक परिवार द्वारा सभी आगंतुकों के लिये भोजन प्रसाद एवं आवास व्यवस्था की व्यवस्था की जा रही है।
कल महाशिवरात्रि को रात भर होगा महाजागरण जिसमें देशभर से संत महात्मा व गायक कलाकार अपनी प्रस्तुतियाँ देंगें।
राजस्थान पुलिस की ईमानदारी के चर्चे अगर जानने है तो गूगल करलो सारे आंकड़े मिल जाएंगे
इस दौर में सिर्फ अशोक को जाति देखकर नोकरी से हटाने से बदलाव नहीं आने वाले है
सरकार बदलेगी तो समय भी बदलेगा
@RajPoliceHelp@RajCMO#अशोक_बिश्नोई_को_बहाल_करो
जबसे भाजपा की सरकार आई है बिश्नोई शब्द टारगेट पर है
हर निर्णय जाति विशेष के प्रति पूर्वाग्रह से प्रेरित होकर लिया जा रहा है
संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है — फिर यह भेदभाव क्यों?
@BJP4Rajasthan@RajCMO#अशोक_बिश्नोई_को_बहाल_करो