#REET
तृतीय श्रेणी अध्यापक भर्ती लेवल -1 में महिला आरक्षण 50% लागू करने के सम्बन्ध में👇
साथियों REET मैंस परीक्षा से पहले हमें तानाशाही युवाविरोधी सरकार से जंग लड़नी होगी , क्या आप तैयार है...?
क्या केवल लेवल 1 में 50% महिला आरक्षण करना सही है..?
#महिला_आरक्षण_50_वापस_लो
माननीय नरेंद्र मोदी जी,
राजस्थान में आपकी भजनलाल सरकार REET लेवल-1 भर्ती में 50% आरक्षण लागू करने जा रही है। मैं आपके माध्यम से यह बात कहना चाहता हूँ—यदि 50% आरक्षण लागू करना ही है, तो इसे देश की सबसे बड़ी पंचायत संसद में भी लागू करवाना चाहिए। इसके साथ ही, इसे राजस्थान विधानसभा में भी लागू किया जाना चाहिए।
यदि महिला सशक्तिकरण को सही मायनों में बढ़ावा देना है और समाज में सुधार लाना है, तो उन सभी स्थानों पर इसे लागू किया जाना चाहिए जहाँ महिलाओं के लिए नीतियाँ बनाई जाती हैं, कानून पारित होते हैं, और सामाजिक परिवर्तन संभव होते हैं।
मोदी जी अगर आपकी सरकार को महिला सशक्तिकरण का संदेश देना है तो राजस्थान की मुख्यमंत्री के रूप में दिया कुमारी जी को बनाना चाहिए इससे बड़ा और क्या मैसेज जाएगा।
इसके सिवा , आपकी सरकार ने संसद में महिलाओं को 33% आरक्षण देने की बात कही थी, लेकिन अभी तक इसे पूरी तरह लागू नहीं किया गया है। फिर राजस्थान में सिर्फ शिक्षक भर्ती में ही 50% आरक्षण क्यों? यदि महिला सशक्तिकरण के लिए आरक्ष�� आवश्यक है, तो इसे सभी क्षेत्रों में लागू किया जाना चाहिए, न कि केवल शिक्षकों की भर्ती में।
इस भेदभावपूर्ण नीति से युवाओं को बड़ा नुकसान हो रहा है, जिसे रोकने के लिए भजनलाल सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार करना चाहिए।
आपसे विनम्र आग्रह है कि इस मुद्दे पर ध्यान दें और न्यायोचित निर्णय लें।
धन्यवाद!
@narendramodi @AmitShah
@BhajanlalBjp @KumariDiya
@RajCMO @madandilawar
ऐसा लगता है कि भाजपा सरकार ने सरकारी स्कूली शिक्षा को बर्बाद करने का संकल्प कर लिया है। यही कारण है कि सरकारी स्कूलों के नामांकन में लाखों विद्यार्थियों की कमी हुई है।
आज ही मीडिया में सरकारी स्कूलों में आठवीं तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, स्वेटर एवं जूते तक नहीं मिल पाने की खबरें आईं और अब सरकार ने महात्मा गांधी अंग्रेजी मीडियम स्कूलों की समीक्षा करने के लिए मंत्रिमंडलीय समिति बना दी है।
ऐसा लगता है कि राज्य सरकार निजी अंग्रेजी मीडियम स्कूलों के भारी दबाव में है इसलिए एक साल होने के बाद ऐसा फैसला लेना पड़ा है क्योंकि इन स्कूलों में निशुल्क अथवा बेहद कम फीस में ही बच्चे अच्छी शिक्षा पा रहे थे।
सरकार को अगर इन स्कूलों में कोई कमी दिखाई दे रही है तो उन्हें सुधार के लिए कदम उठाती परन्तु यह बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने पर आमादा दिखाई देती है।