BIG BREAKING NEWS 🚨 Mithun Chakraborty has been appointed as the Cultural Advisor of West Bengal.
CM Suvendu Adhikari HOLDS THE HANDS of legendary Bengali actors Mahaguru Mithun Chakraborty and Biswajit Chatterjee, like the eldest son of the family 😍
Mithun and Biswajit were among the few who joined and supported the BJP when others were mocking the party.
The video is from Keralam. Congress workers beat a female Congress MLA.
Hey @RahulGandhi, your workers also read Manusmriti and smash patriarchy like this?
🔸Never remind CCP about Operation Snow Leopard
After CCP troops crossed the LAC in May 2020 and the deadly Galwan clash in June
India waited through months
On the night of 29–30 Aug 2020, Indian SF secretly occupied dominating heights on the Kailash Range south of Pangong Tso — including Rezang La, Rechin La and Mukhpari
Neither side had held since 1962
मिथुन दा का संदेश साफ है — जो खोया था, वो वापस आएगा।
TMC राज में इ��डस्ट्री भागी, संस्कृति कुचली गई।
अब 30% सब्सिडी से पूरा भारत बंगाल आएगा — पहाड़, समुद्र और असली रोमांस। ये है नया बंगाल।
सड़कों पर गड्ढे, सीवरेज और ड्रेनेज पर वीडियो बनाकर सरकार की पोल खोलोगे तो "आतंकवादी" घोषित करके गिरफ्तार कर लिया जाएगा!
संतोष पंडित की कहानी से सबक लेने का वक्त आ गया है दोस्तों!
🚨 डॉ. श्यामा प्रसाद मु���र्जी की मौत: सवाल आज भी जिंदा हैं!
जिस दिन Dr. Syama Prasad Mukherjee की मृत्यु हुई, उसके अगले दिन उनकी ज़मानत होने की बात कही जा र���ी थी—यानी आज़ाद होने से ठीक एक दिन पहले उनकी रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई।
और सवाल यहीं से शुरू होते हैं… ❗
कहा जाता है कि उनकी मृत्यु के बाद उनका ब्रीफ़केस, डायरी और इलाज से संबंधित कुछ कागज़ात भी गायब पाए गए। उनकी मृत्यु के बाद कलकत्ता और दिल्ली में प्रदर्शन हुए और देशभर में उनकी मौत की निष्पक्ष जाँच की माँग उठी।
लेकिन जाँच नहीं हुई।
डॉ. मुखर्जी की माँ जोगमाया देवी ने प्रधानमंत���री जवाहरलाल नेहरू को 4 जुलाई और 9 जुलाई 1953 को पत्र लिखकर अपने बेटे की मृत्यु की स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की माँग की।
एक माँ की पीड़ा कितनी गहरी रही होगी, इसका अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने नेहरू से सवाल किया—यदि सब कुछ सामान्य था, तो निष्पक्ष जाँच से डर कैसा?
उन्होंने कश्मीर सरकार को अपने बेटे की मौत के लिए जिम्मेदार ठहराने का आरोप लगाया और यह भी कहा कि यदि कोई साजिश नहीं थी तो जाँच से सच्चाई सामने आने दी जानी चाहिए।
सबसे गंभीर सवाल उन पत्राचारों को लेकर उठते हैं, जिनका उल्लेख Selected Works of Jawaharlal Nehru में मिलता है। 29 जून 1953 को नेहरू द्वारा शेख अब्दुल्ला को लिखे पत्र में मुखर्जी की मृत्यु को लेकर उठ रही जाँच की माँग और उसके राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा होने का दावा किया जाता है।
यहीं से इतिहास का सबसे असहज सवाल सामने आता है—
अगर सब कुछ बिल्कुल सामान्य था, तो स्वतंत्र जाँच होने देने में इतनी परेशानी क्यों थी? 🤔
एक ओर देश की जनता जवाब चाहती थी, एक माँ अपने बेटे की मौत की सच्चाई जानना चाहती थी…
और दूसरी ओर सत्ता के गलियारों में यह तय करने की कोशिश होती दिखती है कि इस पूरे मामले को क��से संभाला जाए।
विडंबना देखिए—
जिस लोकतंत्र में सवाल पूछना नागरिक का अधिकार होना चाहिए, वहाँ देश के एक बड़े नेता की रहस्यमयी मृत्यु पर सवाल पूछना ही असुविधाजनक क्यों बन गया?
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की मृत्यु को लेकर इतिहास में आज भी अनेक प्रश्न अनुत्तरित हैं।
समय बीत गया… सरकारें बदल गईं…
लेकिन एक माँ का वह सवाल आज भी इतिहास के दरवाज़े पर दस्तक देता है—
👉 “मेरे बेटे की मृत्यु की निष्पक्ष जाँच से आखिर डर किस बात का था?”
🚩 इतिहास को दबाया नहीं जा सकता।
सवाल जितने पुराने होते हैं, जवाब की ज़रूरत उतनी ही बड़ी होती जाती है।
Hindu woman beaten to death by Muslim man in full public view at main bus stand in Bhavnagar, Gujarat
Woman identified as Kajalben Baraiya. Killer Mohd Faizal recently came out of jail
Likes of Faizal are treated as oppressed minorities by govt that runs special schemes for their upliftment and empowerment
आदिवासी इलाकों में मिशनरी गिरोहों से लड़ने वाले दारा सिंह के ख़िलाफ़ प्रपंच फैलाने में जुटा BBC
क्या था मिशनरी ग्राहम स्टेन का मामला, जिसमें फंसाकर दारा सिंह को करवाई गई उम्रकैद?
अब सुप्रीम कोर्ट में चल रही रिहाई पर सुनवाई तो फर्जी नैरेटिव बनाने में जुटा BBC
@Anurragmishra
मोहनदास गांधी की जेल यात्रा...
आगा खाँ पैलेस... यही वह जेल है, जहाँ कथित 'महात्मा' मोहनदास करमचंद गांधी को दो वर्ष तक यातनाएँ दी गई थीं।
सज़ा इतनी कठोर थी कि 'बापू' को स्नान करने के लिए 10 × 10 फ़ीट के संगम��मर लगे बाथरूम में नहाना पड़ता था।
सज़ा इतनी कठोर थी कि 'बापू' को 8 × 8 फ़ीट के नरम, मुलायम मखमली बिस्तर पर सोने के लिए मजबूर किया जाता था।
सज़ा इतनी कठोर थी कि 20 एकड़ में फैले आगा खाँ पैलेस की हरी-हरी, मुलायम घास पर घूमने के लिए मजबूर किया जाता था।
सज़ा इतनी कठोर थी कि 12 × 12 फ़ीट के स्टडी रूम में आलीशान टेबल-कुर्सी पर बैठकर बेहतरीन इंग्लैंड के कागज़ पर लेखन करने के लिए मजबूर किया जाता था।
और हाँ, सज��ा इतनी कठोर थी कि बापू की पत्नी भी उनके साथ रहती थीं।
सज़ा इतनी कठोर थी कि आने-जाने के लिए मर्सिडीज़ कार में बैठना पड़ता था।
सज़ा इतनी कठोर थी कि अंग्रेज़ों के साथ ब्लैक कॉफ़ी पीनी पड़ती थी।
और उधर वीर सावरकर को इतनी आसान सज़ा मिली थी कि हाथ-पाँव लोहे की ज़ंजीरों से बाँध दिए गए, दो जन्मों की काला पानी की सज़ा दी गई और उसमें भी रोज़ कोल्हू से तेल निकालना पड़ता था।
गांधी देश के 'बापू' बन गए और सावरकर जी को अंग्रेज़ों से माफ़ी माँगने वाला कहा गया!
ये तस्वीर आपको कोई नहीं दिखाएगा।
जंतर मंतर पर पहले गुंडो की भीड़ ने स्वतंत्र भारद्वाज पर मॉब लिंचिंग की कोशिश करी थी।
इसलिए उस समय सेल्फ डिफेंस के अंदर पलटवार किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट का यह क्लिप धारा 370 पर सुनवाई के दौरान का है
आर्टिकल 370 पर सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने इतिहास का वो पन्ना पलट दिया कि सभी जज चुपचाप सुनते रह गए,
उन्होंने नेहरू का नाम तो नहीं लिया लेकिन नेहरू के नीचता और नेहरू की गद्दारी की पूरी कहानी सुप्रीम कोर्ट के खंडपीठ के सामने बयां कर दी वह भी तथ्यों के साथ
फिर भी कांग्रेसी चमचे कहेंगे नेहरू तो आधुनिक भारत ��े निर्माता थे
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी अपनी दलील में कहते हैं, 'हम सच्चाई के बारे में बात नहीं करना चाहते हैं। सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर कौन था, औचिनलेक। भारत के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। पाकिस्तान के तीनों जनरल ब्रिटिश थे। यह युद्ध (कश्मीर पर पाकिस्तान की तरफ से हमला) क्या था? चर्चिल ने ही तय किया था कि भारत का विभाजन होगा। यह जियो-पॉलिटिक्स का खेल था सब। यह युद्ध एक ब्रिटिश युद्ध था। उन्होंने दोनों तरफ से इसकी तैयारी की थी। हमलावर कहां से आए थे? उत्तर ���श्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) से। दो कार्यकालों के बाद मिस्टर कनिंघम, जो उत्तर पश्चिम सीमांत प्रांत के गवर्नर रह चुके थे, उन्हें जुलाई में वापस बुलाया गया। चुनाव से ठीक पहले।'
द्विवेदी ने उस वक्त की परिस्थियों को बताते हुए आगे कहा, 'हमलावरों को प्रशिक्षित किया गया, सेना के हथियारों के साथ ट्रकों पर भेजा गया। पाकिस्तान की सेना भारत से अभी-अभी अलग हुई थी। और सबसे बड़ा, सबसे स्पष्ट उदाहरण है, कौन लड़ रहा था? आज पीओके क्या है? पीओके का दो-तिहाई हिस्सा गिलगित-बााल्टिस्तान है। और वहां किसने युद्ध लड़ा? हमलावरों ने नहीं। यह मेजर ब्राउन था। वहां का एजेंट कौन था? उन्हें कनिंघम ने ठीक उसी जुलाई में दोबारा पोस्ट किया था। उन्होंने महाराजा (हरि सिंह) के सभी फोर्सेज को मार डाला। अंसार अहमद वहां तैनात थे और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। और उन्होंने चार दिनों में पाकिस्तान का झंडा लहराया और उन्होंने इसे कनिंघम को सौंप दिया। उन्होंने पाकिस्तान की सेना आलम के पास भेजी और उन्होंने गिलगित-बल्तिस्तान पर कब्जा कर लिया। पाकिस्तान के साथ युद्ध कहाँ है? यह ब्रिटिश है। लेकिन अगर हम इन सब से आंखें मूंद लेते हैं।'
वो कहते हैं, 'भला ये हमलावरों का युद्ध है? हमलावर अपने आप श्रीनगर तक नहीं आ सकते थे। युद्ध लगभग कारादु और कारगिल से लेकर लेह के करीब तक पहुंच गया था। तो यह एक अलग तरह का युद्ध था, लेकिन कोई नहीं कह सकता था क्योंकि माउंटबेटन वहां गवर्नर जनरल के रूप में थे। पता नहीं हमारे नेताओं ने ऐसा क्यों किया? जिन्ना ने तो साफ कहा, मैं किसी भी ब्रिटिश गवर्नर-जनरल को स्वीकार नहीं करूंगा। लेकिन हमारे यहां कहा गया, नहीं, हमें गवर्नर जनरल स्वीकार हैं। तो यह युद्ध क्या है? यही नहीं, जब युद्ध शुरू हुआ, तो उन्होंने (नेहरू सरकार ने) एक डिफेंस कमिट��� का गठन किया और माउंटबेटन को इसका अध्यक्ष बनाया दिया। तो यह एक गजब की स्थिति है, लेकिन माउंटबेटन डिफेंस कमिटी के अध्यक्ष हैं।'
वरिष्ठ वकील आगे कहते हैं, 'ऑचिनलेक सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर हैं। सभी जनरल ब्रिटिश हैं और एक ब्रिटिशर विद्रोह कर रहा है और जब वह इंग्लैंड लौटता है तो उसे ब्रिटिश साम्राज्य का पदक दिया जाता है। तो यह युद्ध की स्थिति नहीं है। इसलिए जब आप संविधान और 370 को पढ़ते हैं, तो कृपया इन बातों को ध्यान में रखें कि हमारे नेता किन परिस्थितियों में आगे बढ़ रहे थे। हमारी हम��ावरों को पीछे धकेलने और अपनी जमीन वापस पाने की चाहत ही नहीं थी। उन्होंने एक समय पर जानबूझकर युद्ध को रोक दिया और संयुक्त राष्ट्र चले गए क्योंकि अगर हम मीरपुर तक और पीछे चले गए होते तो वह गिलगित-बल्तिस्तान से कनेक्शन टूट जाता।'
राकेश द्विवेदी ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा, 'ये सभी सच्चे तथ्य हैं। कोई भी इसे नकार नहीं सकता। और संयुक्त राष्ट्र क्या था? वही शक्ति जो जियो पॉलिटिक्स की वजह से भारत का विभाजन करना चाहती थी, अमेरिका और ब्रिटेन, उन्हें मध्यस्थ बनाया गया था। सौभाग्य से, पाकिस्तान ने पीओके खाली करने से इनकार कर दिया। इसलिए वह प्रस्ताव खत्म हो गया है। संयुक्त राष्ट्र के बारे में बात करने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन उस समय 370 के निर्माण में स्थिति की गंभीरता को देखें।'
This is precisely what is being attempted in India. Gen Z is being told that Sanatan Dharma is all bogus & it is discriminatory. Our scriptures are being distorted to poison impressionable minds.
हिन्दुओं के पवित्र धामों और घाटों पर जी भर के करने दो व्यापार,
लेकिन बिना हिन्दू आस्था और उनके प्रतीकों का सम्मान के,
महादेव के धाम काशी में 'जय श्रीराम' से जनता NRC,
पर उधर से भी दिखाया गया मजहबी कट्टरपंथ..
#Varanasi#Kashi#Hindu