Congress in Kerala in past: " We love SIR. SIR helped remove bogus voters. SIR helped us win Kerala Assembly elections".
Congress exposes Rahul Gandhi on SIR.
Their Propaganda has no takers in public, not even in Congress.
ARNAB GOSWAMI TEARS INTO RAHUL GANDHI 🔥
“If EC members and officials are disagreeing over various issues, it actually proves that all the officials are NOT rubber stamps.”
Arnab says internal discussions and procedural disagreements happen in EVERY BUREAUCRACY and ORGANISATION. He argues this CONTRADICTS Rahul’s claim of a monolithic EC working in one line to help BJP.
“Rahul Gandhi has totally contradicted himself. This story has fallen flat. It’s an absolute dud.” 🎯
कल भारतीय क्रिकेट टीम ने दुबई में एशिया कप के फाइनल में पाकिस्तान को हराकर शानदार विजय प्राप्त की। यह एशिया कप में भारत की 9वीं विजय है। इस टूर्नामेंट में भारत ने लगातार तीन बार पाकिस्तान को हराकर जीत की हैट्रिक बनाई। इस एशिया कप में भारतीय टीम ने सारे मैच जीते। इसके लिए निश्चित रूप से भारतीय क्रिकेट टीम और उसके ���प्तान सूर्या कुमार यादव और उनके सभी साथी बधाई के पात्र हैं।
प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी ने स्पष्ट रूप से कहा कि ऑपरेशन सिद्धू हो या खेल का मैदान, निष्कर्ष एक ही है – भारत की शानदार जीत। परंतु बहुत दुखद विषय है कि कांग्रेस के नेता राहुल गांधी जी अथवा प्रियंका गांधी जी का अभी तक एक भी बधाई संदेश नहीं आया।
मैं उनसे कहना चाहता हूँ, खेलों को राजनीति से अलग रखिए। आपके मन में प्रधानमंत्री जी के लिए जिस भी प्रकार की खीज, ईर्ष्या, द्वेष या इनफ़िरियॉरिटी कॉम्प्लेक्स हो, उसके कारण भारतीय क्रिकेट टीम के खिलाड़ियों के शानदार प्रदर्शन पर उसकी छाया मत पड़ने दीजिए।
Veer Savarkar the lion who roared against British rule, the fire that never died.
He lived, breathed, and bled for Bharat till his last breath. Bow down to the legend. 🙏🇮🇳
#VeerSavarkar विनायक दामोदर सावरकर
वो जगद्गुरु किस काम के जिनके जगत के नक्शे में पाकिस्तान और बांग्लादेश के हिंदुओं का दुख दर्द शामिल नहीं है ? क्यों भारत के ��ठाधीशो को टूटते हुए बांग्लादेश के मठ नजर नहीं आते क्या वहाँ के हिंदू मंदिर हमारे नहीं है ? ऐसे फर्जी बाबाओ को यमुना में बहा दो जो केवल अपना स्वार्थ सिद्ध करते है सोते और खाते हैं !
पाकिस्तानी सेना के प्रमुख द्वारा भारत के विभाजन पर दिया गया बयान साफ़ करता है कि दो राष्ट्र का सिद्धांत जिन्ना ने दिया यही पाकिस्तान का आधार बना। अब वीर सावरकर पर आरोप लगाने वालों को माफ़ी माँगना चाहिए।
यानि मुजरिम ने इकबालिया बयान दे दिया फिर भी मुद्दई बेशर्मी के साथ बाज़ नहीं आ रहा है ।
इससे भी अधिक गंभीर बात जो हर भारतीय को समझना चाहिए कि नफ़रत का कितना गहरा षड्यंत्र भारत आज़ादी/ ��िभाजन के समय से इस देश में पनपाया जा रहा है । इसका पूरा स्वरूप समझिए ।
• पाकिस्तान में भारत के विरुध्द नफ़रत
• बांग्लादेश में भारत के विरुध्द नफ़रत
• भारत में भारत के विरुध्द नफ़रत
(टुकड़े-टुकड़े गैंग) को प्रोत्साहन
• कश्मीर में भारत के विरुध्द नफ़रत पैदा करना और प्रोत्साहन देना।
• कट्टरपंथी मुस्लिमों में भारत और हिन्दुओं के विरुध्द नफ़रत पैदा करना
• मिशनरियों में भारत और हिन्दुओं के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
• भारत की धरती पर ही प्रारम्भ हुए सभी धर्मों हिन्दू सिक्ख ब��द्ध इत्यादि एक ही परिवार के भाईयों में भी आपस में नफ़रत पैदा करना
• दक्षिण भारत में उत्तर भारत के विरुद्ध नफ़रत पैदा करने का प्रयास करना।
• राज्यों में एक दूसरे के विरुद्ध नफ़रत फैलाने का प्रयास जैसे तेलंगाना तमिलनाडु महाराष्ट और अनेक राज्यों में उत्तर भारतीयों विशेष UP और बिहारियों के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना
• तमिल मराठी हिन्दी आदि को लेकर भारतीय भाषाओं में एक दूसरे के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
• हिन्दू समाज में एक वर्ग में दूसरे वर्ग के लिए नफ़रत पैदा करना।
• हिन्दू समाज में एक जाति में दूसरी जाति के लिए नफ़रत पैदा करना
• पाठ्यपुस्तकों और मनगढ़ंत इतिहास के द्वारा हिन्दू धर्म और भारतीय संस्कृति के विरुद्ध नफ़रत पैदा करना।
सोचिए जिनके गोदाम में इतने साल से नफ़रती सामान भरे पड़े हैं और नफ़रती सामान के कारख़ाने चल रहे हैं वो मोहब्बत की दुकान का बोर्ड लगाकर भारत को भरमाने ���लें हैं।
पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ का बयान और भारत में पाकिस्तान के आर्मी चीफ़ को गले लगाने वाले और भारत के आर्मी चीफ़ को सड़क छाप गुंडा बताने वाले सेकुलरिस्टों के अरमान दो बदन एक जान की तरह हैं ।
इसके बाद भी इनके मंसूबे सफल नहीं हुए क्योंकि भारतीय संस्कृति और हिन्दू संस्कृति के नहान स्वरूप के कारण भारत की एकता की जड़ें बहुत गहरी थी । सीमा के इस पार और सीमा के उस पार दोनों तरफ़ से इन्हीं जड़ों को खोखला करने का प्रयास किया जा रहा है, इसको समझने की आवश्यकता है
जो लोग आज भी उस मानसिकता से मुक्त नहीं हो पाए हैं कि वो कभी सुल्तान ए आलम थे, हुज़ूर ए नवाब थे, बादशाह आलमगीर थे, पातशाह गाजी ज़िंदा पीर थे जो वक़्फ़ की ज़मीन के स्वघोषित बादशाह बन कर बैठे थे उनके शौक़ ए बादशाहत को ठसक को ठेस पहुँची है