सुना है एक करोड़ रुपए खर्च किये dusu चुनाव में nsui ने social media पर ??
और सबसे बड़ी बात ये है कि जिसको ये काम दिया गया वो पंजाब में आम आदमी पार्टी का काम कर रहा है।
और उससे बड़ी बात ये है कि उसे आम आदमी पार्टी में काम भी कन्हैया ने दिलाया
कुल मिलाकर दलाल बैठे है nsui में ।
@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp
सुना है एक करोड़ रुपए खर्च किये dusu चुनाव में nsui ने social media पर ??
और सबसे बड़ी बात ये है कि जिसको ये काम दिया गया वो पंजाब में आम आदमी पार्टी का काम कर रहा है।
और उससे बड़ी बात ये है कि उसे आम आदमी पार्टी में काम भी कन्हैया ने दिलाया
कुल मिलाकर दलाल बैठे है nsui में ।
@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp
सुना है एक करोड़ रुपए खर्च किये dusu चुनाव में nsui ने social media पर ??
और सबसे बड़ी बात ये है कि जिसको ये काम दिया गया वो पंजाब में आम आदमी पार्टी का काम कर रहा है।
और उससे बड़ी बात ये है कि उसे आम आदमी पार्टी में काम भी कन्हैया ने दिलाया
कुल मिलाकर दलाल बैठे है nsui में ।
@RahulGandhi@priyankagandhi@kcvenugopalmp
कुछ दिनों से से मेरी Feed पर DUSU छाया है। यह कहा जा रहा है कि दीपांशु शौकीन को अध्यक्ष पद से चुनाव लड़ाने की बात थी, लेकिन वे उपाध्यक्ष पद से लड़ना चाहते थे और इसी कारण उन्हें टिकट नहीं मिला। मेरी जानकारी में यह बात सही है। लेकिन मेरे मन में एक सहज सवाल है कि आखिर उन्हें उपाध्यक्ष पद से लड़ाने में समस्या क्या थी?
एक छात्र जो पिछले तीन वर्षों से चुनाव की तैयारी कर रहा था, पिछले वर्ष टिकट न मिलने के बावजूद संगठन के साथ खड़ा रहा; जिसे मैंने स्वयं अपने कॉलेज के बाहर लगातार छात्र-छात्राओं के बीच NSUI के पर्चे बांटते देखा; और जिसके लिए मैंने अपनी कक्षा तक में विद्यार्थियों को party lines से ऊपर उठकर समर्थन की बात करते सुना - ऐसे कार्यकर्ता को पैनल में शामिल करने से पैनल कमजोर नहीं, शायद मजबूत ही होता।
इसी तरह चुनाव के दौरान जब भी मैंने कहा कि विशेष यादव की उम्मीदवारी नुकसान कर सकती है, मुझे लगभग हर बार यही जवाब मिला - “यादव वोट इतने हैं ही नहीं।” लेकिन विशेष ने दिखाया कि हर वोट जाति का नहीं होता, कुछ वोट वर्षों की मेहनत और व्यक्तिगत रिश्तों के भी होते हैं।
शायद छात्र राजनीति को समझने में हम यहीं चूक जाते हैं। “जाति” छात्र राजनीति में “bonus” हो सकती है, “principal amount” नहीं। कॉलेज और विश्वविद्यालय की राजनीति में दोस्ती, साथ खड़े रहने का भरोसा, व्यक्तिगत रिश्ते, भावनाएं, भाईचारा और वर्षों की जमीनी मेहनत कई बार जातीय गणित से कहीं ज्यादा असर रखते हैं।
और हां, गलतियां हम सभी से होती हैं। समझदारी गलती न होने में नहीं, उससे सीखकर आगे बढ़ने में है। पिछले वर्ष हुमांशी के मामले से शायद हमने पर्याप्त नहीं सीखा। मेरा मानना है कि संगठन केवल टिकट से नहीं बनता, लेकिन कार्यकर्ता को यह भरोसा जरूर होना चाहिए कि उसकी मेहनत देखी जाती है, उसका सम्मान होता है और समय आने पर उसे अवसर भी मिलेगा।
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव को लेकर पार्टी द्वारा NSUI को दिए गए 2 करोड़ रुपए का क्या हुआ..?
वो कौन है जिसने इसमें से आधे पैसे यानी एक करोड़ रुपया सोशल मीडिया के नाम पर राष्ट्रीय अध्यक्ष से ले लिया..?
#DUSU#nsui#congress
The video from Jamui, Bihar is deeply disturbing.
Two Class 10 students were stopped on a road. Harassed. Humiliated. Molested. A young girl, hands folded, begged to be let go while goons groped her and dragged her away.
Who gave these men the right to behave like this? This is not "culture." It is patriarchy: the belief that any man can police a girl's body, her movement, her choices.
When control is mistaken for culture, and such attitudes are normalised by Andhbhakts, mobs start believing they are the law.
Every individual in that video must be identified and prosecuted under POCSO, and justice must be swift. And if the incident happened on September 19th, why are the culprits not behind bars yet?
And the Bihar government must answer why a girl is not safe on a public road at 7 pm?
बिहार के जमुई का एक वीडियो बहुत बेचैन करने वाला है।
10वीं क्लास के एक छात्र और छात्रा को रास्ते में जबरदस्ती रोक लिया गया। उन्हें प्रताड़ित किया गया, अपमानित किया गया और छात्रा के साथ उत्पीड़न किया गया। बच्ची हाथ जोड़कर उसे जाने देने की विनती करती रही, मगर गुंडे उसे गलत तरीके से छूते और खींचतान करते रहे।
इन लोगों को ऐसी बदतमीज़ी करने का हक किसने दिया? यह "संस्कृति" नहीं है, यह patriarchy है: ये सोच कि किसी भी पुरुष का किसी लड़की के शरीर, उसके आने-जाने और उसकी पसंद-नापसंद पर नियंत्रण है।
जब नियंत्रण को ही संस्कृति मान कर 'अंधभक्त' ऐसी सोच को सामान्य ठहराते हैं, तो भीड़ को लगने लगता है कि वही कानून है।
उस वीडियो में दिख रहे हर व्यक्ति की पहचान होनी चाहिए और उन अपराधियों पर POCSO के तहत मुकदमा चलाकर उन्हें जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए। और अगर ये घटना 19 सितंबर की है तो गुनहगार अब तक सलाखों के पीछे क्यों नहीं हैं?
और बिहार सरकार जवाब दे कि शाम 7 बजे कोई लड़की राज्य की सड़कों पर सुरक्षित क्यों नहीं है?
दिग्विजय सिंह — 79 वर्ष
सिद्धारमैया — 77 वर्ष
भूपेंद्र सिंह हुड्डा - 79 वर्ष
कमल नाथ — 79 वर्ष
आनंद शर्मा — 73 वर्ष
सलमान खुर्शीद — 73 वर्ष
अशोक गहलोत — 75 वर्ष
हरीश रावत — 78 वर्ष
वीरप्पा मोइली — 86 वर्ष
तारिक अनवर — 75 वर्ष
इन सबकी तत्काल छुट्टी होनी चाहिए ।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, DUSU परिणाम को लेकर राहुल गांधी ने फीडबैक लिया है और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ मिलकर जवाबदेही तय करने पर चर्चा की है।
सूत्रों के मुताबिक अब तीन अलग-अलग रिपोर्ट तैयार होंगी—
• NSUI की ओर से के.सी. को रिपोर्ट
• राहुल गांधी की टीम की स्वतंत्र रिपोर्ट
• दीपांशु शौकीन की ओर से अलग रिपोर्ट
तीनों रिपोर्ट के आधार पर पूरे घटनाक्रम की समीक्षा होगी और उसके बाद अंतिम कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
According to Congress sources, Rahul Gandhi has taken feedback on the DUSU results and, along with party president Mallikarjun Kharge, has discussed fixing clear accountability following the setback.
Sources say three separate reports will now be submitted:
• NSUI will submit its report to K.C.
• Rahul Gandhi’s team will submit an independent report.
• Deepanshu Shokeen will submit his report on the developments.
All three reports will be reviewed before final action is decided.