वेज चिकन पार्टी थी शायद...
कल तक गंगा में इफ्तार करने से जिनकी भावनाएँ आहत हो रही थीं, आज उसी गंगा में चिकन और शराब की पार्टी से किसी की भावनाएँ आहत क्यों नहीं हो रही हैं? शायद इसलिए कि इस बार पार्टी करने वाले दूसरे समुदाय के हैं।
है गोबरौटी नरेश अनिल यादव उर्फ लटकन जैसे आपके पास अधिकार है कि दूध में पानी मिलाने के बावजूद आप कीमत अपने दूध का तय करते हो इस तरह ऑटो वाले को भी अधिकार है कि कितने किलोमीटर का रेट कितना होगा वह खुद तय करेगा तुम नहीं, तुम्हारा नियम कानून तुम्हारे भैंस के तबेला तक ही चलेगा
@DINESHPATEL_up जाने दीजिए दानिश भाई मुंह मत खुलवाइए सच बोल देंगे तो आपको बुरा लग जाएगा वैसे मैं आजमगढ़ से हूं आपसे ज्यादा जानता हूं yD मुल्लों के बारे ।ए
एकलाख यादव के लठैत कहेलन कि ऊ पढ़ल-लिखल नेता हउवें, बढ़िया अंग्रेजी बोल लें, सड़क बनववले, एक्सप्रेसवे बनववले आ नौजवानन में उनकर पकड़ भी बा। ई बात मानल जाई कि राजनीति में उनकर अपना अलग पहचान बा।
बाकिर पूर्वांचल के देहात में लोग ई भी कहेला कि राजनीति खाली मंच पर भाषण देवे से ना चलेला। जब गाँव के भैंस चरावे वाला, गोबरौटी वाला, खेत में भैंस बजावे वाला गरीब लठैत भी सम्मान के मतलब बुझेला। तब बहुजन महापुरुषन के नाम पर बनल जिला के नाम बदलल गइल त बहुत लोगन के ई बात नागवार लागल।
एकलाख यादव के कुछ समर्थक त अइसन प्रचार करेलन जइसे दादा कृष्ण के नाती अकेले ऊहे होखस, बाकिर लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी मालिक होले। लठैतन के भीड़ जुटा लेवे से जनमत ना बन जाला एकलाख यादव।
एह से एकलाख यादव के विकास वाला काम के तारीफ हो सकेला, बाकिर बहुजन प्रतीकन आ महापुरुषन के सम्मान से जुड़ल फैसला पर आलोचना भी बनत बा। जनता सड़क भी देखेला, सम्मान भी देखेला, आ समय आवे पर वोट से अपना फैसला भी सुना देला।