क्रांतिकारियों को डराने के लिए वाडिंगटन ने सार्वजनिक रूप से दो क्रांतिकारियों के सामने पाँच गोंड क्रांतिकारियों को फाँसी पर लटका दिया। इसके बाद दोनों को कोड़े से पीटने के बाद छोड़ दिया। #Rani_awantibai@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
25 सितम्बर, 1857 को रामगढ़ में संग्राम की पहली आग धधकी। इसके बाद मण्डला के संग्राम में रामगढ़ रियासत की भूमिका बढ़ती ही गयी। #Rani_awantibai@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
मार्च, 1858 के दूसरे सप्��ाह के आस-पास रामगढ़ घिर गया। क्रांतिकारियों व अंग्रेजी सेना में संघर्ष चलता रहा। #Rani_awantibai अंग्रेजी सेना का घेरा तोड़ देवहारगढ़ पहुँच गई।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
1855 ई. में राजा विक्रमाजीत की मृत्यु के बाद नाबालिग पुत्रों की संरक्षिका के रूप में राज्य शक्ति #Rani_awantibai के हाथों में आ गयी।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
#Rani_awantibai को अंग्रेज सरकार की कार्यवाही उचित नहीं लगी। उनका मानना था कि वह स्वयं रामगढ़ की रियासत संभाल सकती थीं औ सफल भी हुईं।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
लॉर्ड डलहौजी ने राजा विक्रमाजीत को विक्षिप्त तथा दोनों पुत्रों को ना बालिग घोषित कर राज्य हड़पने की दृष्टि से "को��्ट ऑफ वार्ड्स" की कार्यवाही की। #Rani_awantibai
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
देवहारगढ़ में आत्म सम्मान की रक्षा के लिए रानी दुर्गावती के पदचिह्नों पर चलते हुए #Rani_awantibai ने स्वयं को कटार मार लीं, लेकिन अंग्रेजों के समक्ष आत्म-समर्पण नहीं कीं।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
1817 से 1851 तक रामगढ़ राज्य के शासक लक्ष्मण सिंह थे। उनके निधन के बाद विक्रमाजीत सिंह ने राजगद्दी संभाली। इनका विवाह #Rani_awantibai से हुआ।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
#Rani_awantibai का जन्म 16 अगस्त, 1831 को मध्यप्रदेश के अंतर्गत जिला सिवनी के गाँव मनकेहणी में जमींदार राव जुझार सिंह के घर हुआ।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam
वर्तमान ���ध्यप्रदेश के डिण्डोरी जनपद का 'रामगढ़' गाँव 1857 स्वतंत्रता संग्राम का केन्द्र था। आंदोलन की अगुवाई तत्कालीन #Rani_awantibai ने की।
@VinayDixit_ @TapasyaRatlam