राज्यसभा में 'बीजू जनता दल' की सांसद सुलता देव ने बजट 2026 में बांग्लादेश को पैसे देने पर सवाल उठाए।
कहा वो हमारे हिंदू लोगों को मरते है। हमारे टैक्स के पैसे में से बांग्लादेश को ₹60 करोड़ क्यों दिया जा रहा है?
प्रिय @narendramodi जी, तंत्र ने अदिति मिश्रा की हत्या कर दी। सामान्य वर्ग के कटऑफ से दो कम पाने पर, उसे भविष्य अंधकारमय दिखा, माता-पिता को त्याग कर ईश्वर के पास चली गई। वहीं इससे तीस कम लाने वाले IIT में जाएँगे, चार वर्ष बर्बाद करेंगे, फेल होते रहेंगे और अंततः पास हो कर भी नौकरी नहीं कर पाएँगे।
मैं ���िक्षा में आरक्ष�� के विरोध में नहीं हूँ, परंतु 92 और 62 के अंतर के विरोध में हूँ। जब ऐसे ‘अवसर’ का आँकड़ा, 90% को हर वर्ष अनुत्तीर्ण होने के लिए दिया जाता रहेगा, तो यह अंतर कभी नहीं घटेगा।
भारत में हर घंटे एक छात्र/छात्रा आत्महत्या करते हैं। इनमें से बहुत अदिति की तरह के होते हैं, जिन्हें पता होता है कि तंत्र उनकी सहायता नहीं कर सकता। जो हर दिन यह देखते हैं कि नहीं पढ़ने वाले, लिस्ट में नाम देख कर नाचते हैं, और पढ़ने वा���े पंखे में लटक कर जान दे देते हैं।
जातिवाद के नाम पर शिक्षा के मंदिर को हमने क्या बना दिया ?
एक लड़की को लड़कों ने घेर रखा है, सरेआम उसके साथ हाथापाई की जा रही है.
इनका नाम रूचि तिवारी है, पेशे से यूट्यूबर है. जरा सोचिये किसी भी और जाति धर्म से जुड़ी कोई दूसरी लड़की होती तो देश में क्या हो रहा होता. जाति के नाम पर ��ामान्य वर्ग के बच्चों के साथ घिनौना व्यवहार हो रहा है. उनके साथ जातिवादी टिप्पणी की जा रही है. ये सब हो रहा है देश की राजधानी दिल्ली में.
बेहद शर्मनाक, घृणा से भरा हुआ .
हम कहाँ थे और कहां जा रहे हैं?
In the Motion of Thanks to the President Speech:
Spoke of US India Trade Deal & all the ministers not knowing how to defend the order dictated by US President
Demanded the withdrawal of the discriminatory UGC guidelines that would damage campuses with more divisiveness
Big News 🚨
यूजीसी को लेकर जैन मुनि पुलक सागर जी महाराज भड़के—राजपूत, ब्राह्मण, जैन, वैश्य… सबको बाँटकर देश को तोड़ा जा रहा है।
“सबका साथ, सबका विकास” की बातें होती हैं तो हम लोग कहाँ जाते हैं? अगड़ा-पिछड़ा करके अगर अगड़ा वर्ग ही नहीं बचेगा तो देश की रीढ़ कैसे टिकेगी। सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाई है, पर आवाज़ बंद नहीं होनी चाहिए।
हम सबसे ज़्यादा टैक्स देते हैं और हमें ही चार गुना ज़्यादा फीस देकर स्कूलों में एडमिशन कराना पड़ता है।
जितनी भी जातियाँ हैं, सबके लिए आयोग बने, योजनाएँ बनीं—लेकिन हमारे लिए कुछ नहीं! कैसा अंधेर नगरी चौपट राजा… हम चिल्ला-चिल्लाकर वोट माँगते रहे और तुमने हमारी ही जड़ें काटनी शुरू कर दीं।
ये कैसा अंधा क़ानून है—हमारी बेटियाँ कैसे पढ़ पाएँगी?
महाराज जी ने सरकार को ललकार दिया है—जातियों में बाँटकर बहुत राज कर लिया, जातिवाद की नई-नई परिभाषाएँ गढ़ी गईं।
प्रबुद्ध वर्ग चुप रहा, लेकिन अब सामान्य व्यक्ति से लेकर हर कोई भाजपा के वोटबैंक तुष्टिकरण को समझ चुका है। सरकार अब भी भ्रम में है कि ��ोग अंधसमर्थन करते रहेंगे।