📍अपन को LoP देवता जैसा चाहिए, मुखिया तो 'विदूषक' भी चलेगा..!
अपन ने सुना है कि इंदौर में राहुल के मंच पर एक कॉमेडियन की चंद सेकंड की मौजूदगी से धरती हिल रही है।
नैतिकता के ध्वजवाहकों ने कलप कलप कर महा जलप्लावन कर दिया है।
तो अपन भी राहुल को लानत भेजते हैं।
जी बिल्कुल ऐसी मिमिक्री और वो भी देश के मुखिया की नहीं होना चाहिए।
उस कॉमेडियन ने किसी की मां का नाम लेकर भी कुछ हास परिहास किया। ये भी नहीं होना चाहिए।
वैसे कॉमेडियन ने मुखिया जी की मां की बारे में कुछ नहीं कहा।
('मां के लिए कुर्सी लाओ' माननीय की आमसभा के उस स्क्रिप्टेड ड्रामा पर तंज था जिसमें माननीय एक ऐसी महिला के लिए कुर्सी लाने को कह रहे थे जिसके गले में VIP पास का पट्टा तक लटका था।)
फिर भी कितना शुभ संकेत है कि हमारा समाज नैतिकता के ऐसे उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है जहां उसे विपक्ष के नेता के मंच से बित्ते भर की घटियाई मंज़ूर नहीं।
अपन भी चाहत�� हैं कि विपक्ष का नेता चौबीस कैरेट सोने जैसा हो, कोहिनूर जैसा हो, देवता समान हो, भले ही देश का मुखिया कीचड़युक्त कोयला हो।
अपन भी चाहते हैं कि विपक्ष के नेता के मंच से सुई की नोंक के बराबर घटियापन न हो भले ही ख़ुद देश का मुखिया छिछोरियाई की मिसाल कायम करता रहे।
इस नैतिकता के तकाजे पर आप सबको एक हज़ार सलाम।
(देश के मुखिया की ��थनी करनी पर इस आगे सुबूतों के साथ सब बताएंगे।)
अब कुछ सवाल..
१) क्या इंदौर में राहुल गांधी ने अपने मुंह से एक भी शब्द ऐसा बोला जो अनुचित हो?
२) क्या राहुल गांधी ने अपने पूरे सार्वजनिक, राजनैतिक जीवन में कभी कोई एक भी शब्द स्त्री विरोधी कहा है?
अगर कहा हो तो प्लीज बताएगा।
३) क्या राहुल से पहले किसी नेता ने किसी प्रधानमंत्री की खिल्ली नहीं उड़ाई?
क्या ख़ुद माननीय ने कभी किसी पूर्व प्रधानमंत्री ��े लिए आपत्तिजनक शब्द नहीं कहे?
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आइए अब माननीय जी के स्वयं के करतब और बोल वचन याद कर लीजिए।
अगर आप 'गजनी' के संजय सिंघानिया नहीं बन गए हैं तो आपको याद होगा कि...
१) एक बार भरे मंच से माननीय ने एक हाथ की उंगलियां मोड़ कर छेद जैसा बनाया और उस पर दूसरे हाथ की हथेली ठोकते रहे।
ये कैसा किस बा�� का 'शालीन' इशारा था क्या आप बता सकते हैं?
इसका वीडियो आप ख़ुद ढूंढ लीजिए।
२) माननीय ने संसद में विपक्ष के नेता की खिल्ली उड़ाने को दोनों हाथों की उंगलियां नचा नचा कर जो प्रहसन किया था वो क्या था?
(वीडियो संलग्न है )
२) माननीय ने अपने श्रीमुख से सोनिया गांधी को जर्सी गाय कहा, पार्टी की विधवा कहा था।
३) माननीय ने अपनी पवित्र जिह्वा से किसी दिवंगत महिला को पचास करोड़ की गर्लफ्रेंड कहा था।
४) मानन��य ने संसद में एक महिला सांसद को शूर्पणखा कहा था। क्या ये किसी महिला का सम्मान बढ़ाने वाला शब्द था?
५) माननीय ने संसद के भीतर विपक्ष के नेता को बाल बुद्धि कहा, बाहर खड़े होकर कहा कि मैं किसी 56 साल के युवा की बात नहीं कर रहा।
क्या आज़ाद भारत के इतिहास में किसी प्रधानमंत्री ने विपक्ष के नेता पर ऐसे स्तरहीन व्यंग्य बाण चलाए हैं?
६) माननीय ने डिसलेक्सिया से पीड़ित बच्चों का मज़ाक बनाते हुए नेता प्��तिपक्ष पर निशाना साधा था और उस समय उनकी मां तक पर कटाक्ष किया था।
ये किस स्तर की राजनीति थी?
७) माननीय ने डॉ मनोहन सिंह को मौन मोहन कहा, देहाती औरत कहा था।
क्या ये किसी पूर्व प्रधानमंत्री का अपमान नहीं था?
८) संसद में खड़े होकर माननीय ने मनमोहन सिंह के लिए कहा था कि वे बाथरूम में रैन कोट पहन कर नहाने हैं।
ये किस नैतिकता के उच्चतम स्तर की भाषा थी?
९) एक महिला मुख्यमंत्री को भरी सभा में सड़कछाप शोहदों की त���ह दीदी ओ दीदी कह कर बुलाना किस भाषाई संस्कार की नुमाइश थी?
आज़ाद भारत के इतिहास में पहली बार किसी प्रधानमंत्री को एक अख़बार की हैडलाइन में 'कमेंटमारा ब्यॉय' लिखा गया। मतलब सड़क पर लड़कियों पर कमेंट करने वाले लफंगा।
(देखें द टेलीग्राफ)
१०) अंतर्राष्ट्रीय दौरों पर माननीय के क्रियाकलाप की सूची बनाने का काम आप खुद कर लीजिए।
विदूषकों जैसे करतबों की इतनी लंबी फेहरिस्त है कि आप गिनते गिनते ��क जायेंगे।
लेकिन इन अनगिनत स्तरहीन हरकतों और बोल वचन को हमारा नैतिकतावादी समाज अमृत समझ कर पी जाता है।
कल से अब तक जितने लोग राहुल के मंच पर मिमिक्री से मचल रहे हैं उनमें से किसी ने भी माननीय के विदूषकों जैसे व्यवहार पर कभी एक शब्द नहीं लिखा।
काहे...?
पुलकित अपने एक्ट में ना किसी का नाम लेता है
ना किसी के जैसा मेक-अप करता है
यहाँ तक की आवाज भी किसी से नहीं मिलती है
वो बस एक पागल जोकर की तरह हँसते हुए क���छ-कुछ बड़बड़ाता है।
फिर पीयूष गोयल और उनके साथियों को कैसे पता चलता है कि ये मोदी का मजाक है ?
क्या इन मंत्रियों के दिमाग़ में प्रधानमंत्री की ये छवि है ?
मुंबई में बैठकर बिहार की बाढ़ का दर्द 13 करोड़ की रोल्स रॉयस से महसूस करने का अदम्य साहस सिर्फ हमारे @BJP4India नेताओं में ही हो सकता है!
बिहार पानी-पानी है और मैडम मुंबई की सड़कों पर लग्जरी का लाइव डेमो दे रही हैं।
जब देश में इतनी "अमीरी" आ चुकी है, तो बाढ़ पीड़ितों को राशन क्यों?
सबको सीधा शोरूम से गाड़ियां ही डिलीवर करवा दीजिए!
स्कूलों की खराब स्थिति का हाल देखना कोई भी नेता विधायक है मंत्री नहीं आता है,
क्योंकि सभी के बच्चे अच्छे प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई करते हैं,
सरकारी स्कूलों में सिर्फ गरीब घर के बच्चे आते हैं।
मुश्किलें बड़ी हैं, लेकिन युवाओं का हौसला उससे भी बड़ा है!
जमीं बंजर हुई तो क्या,
यहीं से जल भी निकलेगा।
अंधेरी रात चाहे कि��नी लंबी हो,
इन्हीं रातों के दामन से सुनहरा कल भी निकलेगा।
आज देश का युवा सिर्फ नारे नहीं चाहता
वह शिक्षा, रोजगार, अवसर, सम्मान और अपने भविष्य पर जवाब ��ाहता है।
राहों में मुश्किलें बहुत हैं,
फिर भी छात्रों की गूँज न रुकी है, न रुकेगी।
सवाल पूछना लोकतंत्र की ताकत है और अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाना युवाओं का हक़।
इसी युवा आवाज़ और छात्रों के सवालों को संसद से सड़क तक मजबूती से उठाने वाले नेताओं में राहुल गांधी भी लगातार अपनी बात रखते रहे हैं।
ना डरेंगे, ना चुप रहेंगे
सवाल पूछेंगे, जवाब माँगेंगे।
क्योंकि देश का भविष्य सिर्फ भाषणों से ���हीं,
देश के युवाओं की शिक्षा, रोजगार और अवसरों से तय होगा।
इंदौर का उत्साह, राहुल जी के साथ!
छात्रों की गूंज में उमड़ा जबरदस्त जनसैलाब.....
हर तरफ़ उत्साह और जोश का माहौल।
मेरे कांग्रेस के साथियों पोस्ट को रिपोस्ट जरुर करे दोस्तों।
✊जय युवा शक्ति!
जय हिंद! 🇮🇳
दिल्ली में एक 17 साल की बच्ची के साथ क्रूरता की सारी हदें पार कर दी गईं और उसके बाद उसे बर्बरता से मार डाला गया। कुछ ही दिनों पहले एक और नाबालिग लड़की का बलात्कार किया गया।
देश में महिला सुरक्षा के लिए कोई ज़िम्मेदारी लेने को तैयार ही नहीं है - महिलाओं के विकास की सिर्फ़ खोखली बातें की जाती हैं। सैकड़ों महिलाओं पर अत्याचार होते हैं, हिंसा होती है मगर अपराधियों पर ठोस कार्रवाई की वे उम्मीद नहीं कर सकतीं - FIR दर्ज तक नहीं होते।
समाज और सरकार दोनों, महिलाओं को सुरक्षा, स्वतंत्रता और समानता का अधिकार देने में पूरी तरह से विफल हैं।
कांग्रेस के दफ़्तर में बैठे लोगों ने दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ में NSUI का सूपड़ा साफ़ करने के लिए जो शानदार मेहनत की है, उसके लिए उन्हें विशेष सम्मान मिलना चाहिए।
बधाई हो आप लोग एक और बार सफल हुए और नई पीढ़ी को मैसेज दिया ��ि मेहनत से यहाँ कुछ नहीं होता, सेटिंग ज़रूरी है।
राहुल जी, भीतर के छात्रों की गूँज नहीं सुनेंगे तो बाहर के छात्रों की गूँज का असर नहीं होगा।
आपके आसपास जो लोग बैठे हैं वे इस देश में सांप्रदायिक ताक़तों को मज़बूत बनाने के लिए जो अथक मेहनत कर रहे हैं, वह आपकी मेहनत को कामयाब नहीं होने देगी।
शुभकामनाएं
सत्ता का अहंकार देख लीजिए। जनता ने सड़क क्या मांग ली, 'राजा जी' भड़क गए।
कहने लगे - मेरे सामने ऐसी भाषा का प्रयोग ना करना, मुझसे निवेदन करो।
जनता इनके अहंकार को जल्द ठिकाने लगाएगी।
UPI को लेकर अख़बारों में विज्ञापन छपे हैं। अख़बारों को फ़ायदा हुआ। सरकार प्रेस कांफ्रेंस करती तो सवालों के जवाब मिलते और सरकार को फ़ायदा होता। विज्ञापन नहीं देना पड़ता ! मध्य प्रदेश के पेट्रोल पंप संघ को अब विरोध बंद कर देना चाहिए। सरकार ने पूरे पन्ने का विज्ञापन दिया है, उसे देख कर समझ लेना चाहिए।
Prahlad Pandey, an outstanding public spirited activist from Indore was protesting against illegal banners & posters put up in Indore, mostly by BJP leaders & MLA there. He was beaten up by their goons, forcing him & his wife to sit on a fast there. He must be supported