Best wishes on Eid ul-Adha. May this occasion inspire harmony and strengthen the fabric of peace in our society. Wishing everyone good health and prosperity.
I have always believed a name should be one which instills pride in us.
We are Bhartiyas ,India is a name given by the British & it has been long overdue to get our original name ‘Bharat’ back officially. I urge the @BCCI@JayShah to ensure that this World Cup our players have Bharat on our chest
अच्छी ख़ासी चलती हुई रेलवे का इन्होंने बेड़ा गर्क कर दिया। आज AC कोच का भी अगर आप रिजर्वेशन लेंगे तो आपको बैठने या सोने के लिये सीट नहीं मिलेगी। AC और स्लीपर कोच जनरल से ज़्यादा बदतर हो गये हैं
इन्हें सरकार चलानी ही नहीं आती। इन्हें समझ ही नहीं है। अनपढ़ सरकार है। हर क्षेत्र को बर्बाद कर रहे हैं
मैंने कहा था ना कि अब सिर्फ #फ्रंट फुट पर राजनीति होगी। कोई "बैलेंस वाद" नहीं। तुम "धर्म परिवर्तन" को घर वापसी कहोगे तो हम तुम्हें "#मनु" और #आदम समझा देगें। अब घर वापसी तुम करो।तुम "हलाला" की बात करो तो हम सारी दुनिया को "#नियोग" के छुपे राज बता देंगे। तुम "72 हूर" चलाओगे तो हम "#1000अप्सराओं" की हकीकत बता देंगे। तुम "#लव_जिहाद" एजेंडा चलाओगे तो हम #भगवा_लव_ट्रैप की हकीकत समझा देंगे। तुम ज्ञान की बात करोगे तो हम ज्ञान देंगे। तुम अपनी "ताकत" का घमड़ दिखाओगे तो हम भी अपनी #ताकत दिखायेंगे। तुम अगर गालियां दोगे तो हम ऐसा संगीत सुनाएंगे की *कान फट जायेगी। तुम "विश्व हिंदू परिषद" बनाओगे तो हम भी "विश्व मुस्लिम परिषद" दिखायेंगे।
मगर ��ब बैकफुट पर #राजनीति नहीं होगी। बराबरी होगी। आओ सामने से खेलते हैं। ।हम बोलेंगे और तुम जवाब दोगे। #सियासत करना है तो हिम्मत से करो।🫵👊
Dr Shoaib Jamai
मरने वालों में हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई सब हैं... अगर बागेश्वर धाम पर पाखंड हो रहा है तो चर्च, मस्जिद मजारों में क्या हो रहा है जो अपने लोगों को बचा ना सके?
दिन रात चंगाई सभा चलाने वाले पास्टर, विशप, फादर.. झाड़ फूंक करने वाले मौलाना, मौलवी कहां मर गए थे?
एक तरफा बात क्यों करते हो देवबंद के दलालों!
हमारे और आ��रणीय नीतीश जी के साथ आने के बाद विगत वर्षों में प्रथम बार हिंदू-मुसलमान, मंदिर-मस्जिद को छोड़ नौकरी,रोजगार और बेरोजगारी पर सकारात्मक विमर्श हो रहा है। यह हमारी उपलब्धि नहीं है तो क्या है?
मुझे खुशी है कि हमारी पहल पर नौकरी के मसले पर सोई हुई पत्रकारिता भी जाग रही है।