साथियों,
व्याख्याता आपसी वरिष्ठता मामले में चार साल बाद आज माननीय उच्च न्यायालय जोधपुर की डब�� बेंच द्वारा निर्णय सुनाया गया है जिसमें व्याख्याता वरिष्ठता के राज्य सरकार को नियम को सही मानते हुए विभाग द्वारा नियमों की सही पालना नहीं किए जाने के कारण 21/11/2022 की वरिष्ठता/पात्रता के आधार पर की गई उप प्राचार्य व उससे ऊपर के पद की डीपीसी को रद्द कर दिया गया (इस वरिष्ठता/पात्रता से 2022/23,2023, व 2024/25 की उप प्राचार्य डीपीसी की गई थी)।
इसी के साथ सीधी भर्ती से चयनित व्याख्याताओं के लिए वरिष्ठता एक भर्ती एक विज्ञापन में मिक्स मेरिट से वरिष्ठता बनाने का आदेश दिया गया है इसका मतलब एक विज्ञापन से किसी भी विषय के एक विषय की सबसे पहले प्रथम पोस्टिंग होगी उसी दिन से पूरे बेच को वरिष्ठता दी जाएगी क्योंकि न्यायालय ने माना कि पहले बाद में नियुक्ति में संबं���ित अभ्यर्थी का कोई दोष नहीं होता।
निर्णय का प्रभाव -
तीनों उप प्राचार्य व 2023/24 व 2024/25 की प्राचार्य डीपीसी नई वरिष्ठता सूची बनाकर पुनः होगी।
सादर गिरधारी गोदारा प्रदेश अध्यक्ष रेसला
वाह! क्या शानदार है "मसीहा के समर्थक
कृषि मंत्री जी की महफ़िल में ऐसे लोग भी शामिल हैं?
मसीहा किरोड़ी मल मीणा के समर्थको को देखिए, इनकी भाषा शैली देखिए और इनके अपराध लूट/चोरी को देखिए इन सबके बावजूद इन चोर लुटेरों पर कृषि मंत्री किरोडिलाल मीणा का हाथ देखिए 😳
@DrKirodilalBJP क्या आपने अपने चेलों को गाली गलौज,चोरी लूटपाट करने के लिए छोड़ रखा है ?
कृषि मंत्री का हाथ है तो क्या ये अपराधी कहीं भी चोरी लूट, गाली गलौज करेंगे या @RajPoliceHelp इनका इलाज करेगी ? https://t.co/h3myem4Ghy…
क्या साहसिक स्त्री है!
सहस्र सलाम, कोमेश गुर्जर!!!
जिस समाज में लोग सत्ता, पुलिस, अपराध और डर के सामने चुप्पी को ही समझदारी मान लेते हैं, वहाँ एक स्त्री का यह कहना कि “न सुरक्षा चाहिए, न मुआवज़ा, न नौकरी; बस सच चाहिए” साधारण वाक्य नहीं है।
यह एक घायल घर और एक आहत हृदय की आवाज़ है; लेकिन उससे भी बढ़कर यह न्याय की सबसे निर्भीक मांग है।
कोमेश गुर्जर का यह कथन बताता है कि साहस हमे���ा बंदूक़, धन या सत्ता से नहीं आता। कई बार साहस उस स्त्री की आँखों में जन्म लेता है, जिसका संसार उजड़ चुका होता है, फिर भी वह दया नहीं मांगती, सौदा नहीं करती, समझौता नहीं करती; वह सिर्फ़ सच मांगती है।मैं नहीं समझता, पूरे संसार में ऐसी स्त्रियाँ अधिक होंगी।
यह बहुत बड़ी बात है कि वे मुआवज़े की भाषा में न्याय को छोटा नहीं कर रहीं। वे सुरक्षा की याचना में अपने आत्मबल को गिरवी नहीं रख रहीं। वे साफ कह रही हैं कि हमारा परिवार, हमारा समाज, ह���ारा साहस अभी जीवित है। हमें खरीदिए मत, हमें डराइए मत, हमें बहलाइए मत; सच सामने लाइए। यह एक दुर्लभ स्त्री है।
भारत में न्याय की सबसे बड़ी त्रासदी यही है कि कई बार पीड़ितों को न्याय के बजाय पैकेज, सुरक्षा, नौकरी और आश्वासन दे दिए जाते हैं। लेकिन कोमेश गुर्जर ने उस पूरी व्यवस्था को एक वाक्य में नंगा कर दिया है। उन्होंने बता दिया कि न्याय का विकल्प कोई मुआवज़ा नहीं हो सकता।
ऐसी स्त्रियाँ समाज की रीढ़ होती हैं। वे रोती हैं, टूटती हैं, लेकिन झुकती नहीं।
सहस्र सलाम इस साहसिक महिला को। सच ही न्याय का पहला नाम है।
माननीय @BhajanlalBjp जी, हाई कोर्ट ने REET 2022 L2 में संशो���ित परिणाम के बाद चयनित से अधिक अंक वाले वंचितों को 2 माह में नियुक्ति देने का आदेश दिया है। पिछली congress सरकार की गलतियों की सजा युवाओं को ना दे। हमें नियुक्ति देके न्याय दें।
#लेवल_2_मे_चयनित_से_अधिक_अंक
@saten_08 राजस्थान के निजी विश्वविद्यालय की बी.एड. डिग्री होने के कारण जॉइनिंग आदेश रोक लिया गया है जबकि में इसी डिग्री के आधार पर इसी विभाग में वर्तम���न में अध्यापक लेवल को पद पर कार्यरत हूं, 2025 में ही मेरी जॉइनिंग डिग्री वेरीफाई होने के बाद ही हुई थी, तो क्या सात आठ महीने में ही...
@PRESIDENTBKN2 सर इनका नियुक्ति आदेश रोकने का कोई नियम भी होता है क्या 🤔
मैं पहले से इसी विभाग में ही अध्यापक लेवल 2 पद पर पोस्टेड हूं और 2025 में ही मेरी डिग्री वैरिफाई होने के बाद ही मुझे जॉइनिंग दी गई थी, और आज ओर रोक लि��ा,
राजस्थान के निजी विश्वविद्यालय से डिग्री b.ed
@saten_08@PRESIDENTBKN2@Directoratebkn@madandilawar
निदेशालय के आदेशानुसार 11 जून को व्याख्याता भर्ती 2024 में चयनित अभ्यर्थियों का पदस्थापन आदेश जारी होने थे जो कि आज तक जारी नहीं हुए है। आखिर कारण क्या है ?
तृतीय श्रेणी भर्ती परीक्षा का परिणाम जारी
11 क्वेश्चन डिलीट किए गए
अध्यक्ष साहब जल्द ही ट्वीट करेंगे कि पेपर बनाने वाले को ब्लैक लिस्ट किया जाएगा
अध्यक्ष साहब यदि आपके पास विशेषज्ञ नहीं है तो कृपा हमसे पेपर बनवा लीजिए
11 क्वेश्चन डिलीट होना सामान्य बात नहीं है
ऐसे क्वेश्चन पेपर में आना बच्चों को उलझाते हैं उसका समय खराब करते हैं और अनावश्यक रूप से मानसिक तनाव में लाते हैं
एक तो पेपर में इतना stress होता है ऊपर से इस तरीके के क्वेश्चन बनाना बच्चों के साथ धोखा है
@alokrajRSSB