लफ्ज़ों का आसमां
फैला हुआ है
आओ इसे पन्नों
पर उतार ले...!
जवाब तो हर कोई
लिये फिरता है
आओ इसको कोई
नया सवाल दे...!
एक गुलाब थामा है
हाथ मे तेरे लिए
चलो आँखो से
इश्क का इक ख़्याल दे...!
चेहरा तेरा नुरानी
कहीं नज़र न लगे
आओ ख़्वाहिशों का
तुझे एक हिज़ाब दे...!!
#Krishna
लफ्ज़ों का आसमां
फैला हुआ है
आओ इसे पन्नों
पर उतार ले...!
जवाब तो हर कोई
लिये फिरता है
आओ इसको कोई
नया सवाल दे...!
एक गुलाब थामा है
हाथ मे तेरे लिए
चलो आँखो से
इश्क का इक ख़्याल ��े...!
चेहरा तेरा नुरानी
कहीं नज़र न लगे
आओ ख़्वाहिशों का
तुझे एक हिज़ाब दे...!!
#Krishna