I started the Reservation Hatao Andolan ( @RHAreforms ) page on Instagram with one objective -to begin a national discussion on a subject that many people were hesitant to even talk about.
As the movement grew, I realized that I was not mature or experienced enough to lead something of this scale. There are people who have been fighting this battle for years, long before I came into the picture. They deserve the responsibility of taking it forward.
That is why I reached out to Ajeet Sir ( @ajeetbharti) and requested him to lead this movement. He didn't hijack it , I REQUESTED HIM , innumerable times then he agreed. I stand with him wholeheartedly and truly believe there couldn't be a more balanced and unbiased voice to guide it.
I recently saw some new age immature kids having political ambitions ( they personally confessed that to me) wants to make this movement around them. This movement was never about an individual, personal fame, or becoming the face of a cause. It was always about the cause itself. If a better leader can take it further, stepping aside is not weakness-it is responsibility.
One thing I also learned is that many people expect immediate agitation, while my first goal was to encourage discussion. Lasting change begins when people are willing to talk, debate, and question. Agitation without dialogue rarely produces durable solutions.
The movement is bigger than any one person. Leaders may change, but the objective remains the same.
Thank you to everyone who supported the page and helped make this conversation impossible to ignore. Now, let's support the movement- not personalities.
Also Kudos to @talk2anuradha@neha_laldas for speaking about this before anyone else. Can't have a better team!
@AchAnkurArya पैसा बाबू भैया पैसा ये नचनियां लोग हैं कोई स्टैंड नही है इनका, और गलत क्या बोला धर्मेंद्र जी ने इस्लाम तो कबूल ही कर लिया था तो एक तरह से देखा जाये तो बात तो सही ही बोली है।
@AnupamNawada अनुपम भाई आप अब रहने दो, जमीनी पत्रकार हो लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आप कुछ लिख कर माहौल बना दोगे, आप पिछले 6 महीने से लगातार एक ही बकवास लिखे जा रहे हो, आपका पब्लिक सेंटीमेंट का घंटा नही प्यार।
आज @tehseenp को हाउस अरेस्ट किया गया। क्यों? क्योंकि शांतिपूर्ण तरीके से, सारी अनुमतियों के साथ, संविधान के वृत्त में, मौलिक अधिकारों के साथ प्रदर्शन करने वालों से सरकार को भय लगता है?
हाउस अरेस्ट के प्रोविजन्स क्या हैं? क्या इसका कोई लीगल प्रावधान है? @DelhiPolice क्या चाहती है? अब लोग प्रदर्शन के अधिकार के लिए भी कोर्ट से अनुमति लें?
यूजीसी पर दो बार अनुमति दे कर रोका गया। इथेनॉल पर तीन बार तहसीन पूनावाला को रोका गया। क्यों? क्योंकि हमारे हाथ में पेट्रोल बम नहीं है? क्योंकि हम केवल बात कहना चाहते हैं?
@PMOIndia इस अंधेरे में न रहे कि जनता इसे मोदी जी की रीलबाजी से भूल जाएगी। इस पूरे वर्ष का लेखा-जोखा हम उचित समय पर निकालेंगे। तुम्हें भी पता है कि ठाकुर-ब्राह्मण की स्थिति, स्थानीय भ्रष्टाचार, जनता के विषयों के फुनसी का बवासीर तुम बना चुके हो।
ऐसी हर एक मूर्खता, तुम्हारे लिए कर्ण की भाँति मुख्य युद्ध में चक्का धँसने और मंत्र भूलने जैसे श्राप साबित होंगे। कोई रील, कोई चाटुकारों की पोस्ट काम नहीं आएगी। हम सड़कों पर अभी नहीं उतरेंगे, पर जब जीना हराम कर दोगे, तब देख लेंगे।
@arvindchotia नहीं बिल्कुल नही, उल्टा मोटिवेटेड महसूस कर रहा हूं, अब महसूस हो रहा है ये समाज चूतिययों से भरा है हम इन लोगों से बहुत बढ़िया हैं अभी वाली सबसे युवा जेनरेशन बौद्धिक रूप से विकलांग है। इनसे न अपने बच्चे संभलेंगे न अपना परिवार, समाज और देश की बात की छोड़ो।
@Avimarag@GyanP1990@GyanP1990 जिस जाति के हैं वो उनके नाम के आगे लिखा हुआ है जो सर्वविदित है श्री अरविंद, अब जो जवाब मांगा गया है,उसका तर्कसम्मत जवाब दो, भारतीय होने की बकैती न पेलो, क्योंकि बकैती में पांडे जी PHD हैं।
व्हाट अ क्लाउन! जब तर्क समाप्त हो जाते हैं, तब बात भाषा, मर्यादा, व्यवहार पर आ जाती है। सत्य यह है कि आपकी पार्टी ने हर उस बात को सामान्य बनाया है जिस पर आप पिनक रहे हैं।
कहाँ था आपका यह ज्ञान जब सभ्य भाषा में यही बातें सात महीने पहले कही जा रही थीं? आपके पूरे तंत्र ने ट्रोल छोड़े, गालियाँ दीं और हर वह बात बोली जो किसी को भी नहीं बोलना चाहिए था। राहुल कौशिक और वराहे के सूअरों से तो हर दिन उठना बैठना होता होगा आपका?
इसलिए, प्लीज कट द क्रैप!
अनुपम भाई जिन्होंने, 1 वर्ष तक दिल्ली को बंधक बनाकर रखा वो किसान नही थे, ये सरकार शांतिपूर्वक मांग उचित मांग करने वालों को चूतिया समझती है, अपने कोर वोटर और समर्थक इनके लिए मूल्यहीन हैं।
जिस भी विरोध प्रदर्शन में सड़क पर आम लोगों की सहभागिता होती है, उसके सामने सरकारें झुकती हैं। UGC आंदोलन सिर्फ़ इंटरनेट पर था।
किसानों में जिगरा था, एक वर्ष तक राष्ट्रीय राजधानी को ऐसा घेरकर रखा कि स्वयं पीएम को तीनों कृषि क़ानून वापस लेने की घोषणा करनी पड़ी। कॉकरोचों के पास इंस्टाग्राम की ताक़त थी, एक होड़ मची और इस विरोध प्रदर्शन का हिस्सा बनना 'कूल' माना गया। अंततः शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ। शाहीन बाग़ वालों ने महीनों डेरा डाले रखा था, दंगा हुआ और कोविड-19 महामारी आई जिस कारण वो वापस गए।
वहीं यूजीसी को लेकर जो आक्रोश था, उसमें सबने अपनी-अपनी रोटियाँ सेंकनी शुरू कर दी थी। सड़क पर अड़ने को कोई तैयार न था। एकाध दिनों का विरोध प्रदर्शन राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन के लिए होते हैं, जनांदोलनों के लिए नहीं।
मेरी बातें बुरी लग सकती हैं, लेकिन आंदोलन स्टूडियो या कीबोर्ड के सामने से नहीं होते। सड़क पर होते हैं। स्टूडियो और कीबोर्ड इसके सहायक बनते हैं।