मतभेद होना ��लग बात है,
लेकिन मुश्किल वक्त में साथ छोड़ देना ही असली पहचान दिखाता है।
जिसने नाम दिया, उसी को भुला बैठे,
जिसने उठाया, उसी से किनारा कर बैठे।
कर्ज चुकाने का वक्त जब सामने आया,
तो वो ही रास्ता बदलकर दूर जा बैठे।
राजनीति में वफादारी सबसे बड़ी चीज होती है। @ArvindKejriwal ने @raghav_chadha को सिर्फ मौका ही नहीं दिया, ���ल्कि कदम-कदम पर आगे बढ़ाया।
2015 से अब तक क्या-क्या मिला:
• 2015 में Aam Aadmi Party की तरफ से मुख्य प्रवक्ता बनाया
• पार्टी का चेहरा बनाकर पहचान दिलाई
• 2019 में लोकसभा
टिकट दिया
• बड़ी जिम्मेदारियां सौंपी
• 2022 में राज्यसभा सांसद बनाया
• राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा कद और पहचान दी
अब बात सीधी है —
अगर ये सब नहीं मिला होता, तो शायद न राजनीति पहचानती, न ज़िंदगी इतनी ऊँचाई तक पहुंचती।
और जब वक्त आया
पार्टी के साथ खड़े होने का — तब आप कहां थे?