60 साल के बुजुर्ग मकान मालिक ने अपने किरायेदार की 25 वर्षीय बेटी को pregnent कर दिया.....😱!
एक छोटे से कस्बे में एक 60 साल का मकान मालिक रहता था, जिसके पास कुछ कमरे किराए पर थे। उसी मकान मै एक 25 साल की लड़की रहती थी।
धीरे-धीरे मकान मालिक और उस लड़की ने बीच बातचीत बढ़ने लगी— पहले सामान्य बातचीत और फिर नजदीक बढ़ने लगी।
आसपास के लोग भी दोनों। के रिश्ते को लेकर तरह तरह की बाते करने लगें।
अब कहानी में तनाव बढ़ जाता हैं, क्योंकि दोनों परिवार के बीच सवाल जवाब और आरोप प्रत्यारोप शुरू हो जाते हैं।
IIT से इंजीनियर, फिर बाबा... और आखिरकार सलाखों के पीछे!
अभिषेक मिश्रा ने Indian Institute of Technology Roorkee से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और करोड़ों सपनों जैसा करियर उनके सामने था।इंजीनियर अभिषेक मिश्रा 20 लाख रुपए का पैकेज छोड़ ओडिशा से मथुरा पहुंच जाते हैं और बन जाते हैं आदिकर्ता नारायण दास।
लेकिन उन्होंने नौकरी छोड़ अध्यात्म का रास्ता चुना और अपना नाम बदलकर आदिकर्ता नारायण दास रख लिया। मथुरा के एक आश्रम में रहकर वे गीता प्रवचन देने लगे और धीरे-धीरे बड़ी संख्या में लोग उनसे जुड़ने लगे।
आरोप है कि बाबा मानसिक तनाव से जूझ रही अमीर युवतियों को आश्रम बुलाते था। प्रसाद में नशीली चीज़ होती थी जिसे खा कर लड़कियां होश खो देती थीं और उनके साथ ये बाबा करता था दुष्कर्म और बनाता था video और फिर करता था ब्लैकमेल।
एक छात्रा की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और आश्रम पर छापा मारा।
पुलिस के अनुसार, जांच के दौरान कई गंभीर सबूत मिले, जिसके बाद बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया।
यह मामला एक बार फिर सवाल खड़ा करता है कि शिक्षा, पद और ज्ञान का दिखावा किसी व्यक्ति के चरित्र की गारंटी नहीं होता।
साथ ही यह भी कि अंधविश्वास और बिना जांच-परख के किसी पर भरोसा करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।
आपकी राय में लोग ऐसे स्वयंभू बाबाओं के प्रभाव में इतनी आसानी से क्यों आ जाते हैं?
इंसानियत की सबसे खूबसूरत तस्वीर... ❤️
जब आग की लपटों में घिरे लोग अपनी जान बचाने के लिए मदद की आस लगाए खड़े थे, तब मालवीय नगर में गद्दों की दुकान चलाने वाले अरमान ने ऐसा काम किया जिसे लोग लंबे समय तक याद रखेंगे।
उन्होंने अपनी दुकान के सारे गद्दे सड़क पर बिछा दिए, ताकि होटल में फंसे लोग ऊपर से कूदकर अपनी जान बचा सकें।
उस वक्त अरमान ने यह नहीं सोचा कि गद्दों का कितना नुकसान होगा, कितना पैसा जाएगा या कौन भरपाई करेगा। उन्होंने सिर्फ इतना सोचा कि अगर इन गद्दों की वजह से किसी की जान बच सकती है, तो यही सबसे बड़ी कमाई है।
बताया जा रहा है कि इस सूझबूझ और साहस की वजह से कई लोगों की जान बच गई।
मुसीबत के समय जो व्यक्ति दूसरों के लिए ढाल बन जाए, वही असली हीरो होता है। न कोई कैमरा, न कोई दिखावा—बस इंसानियत का फर्ज।
अरमान ने साबित कर दिया कि बड़े काम करने के लिए बड़ा पद नहीं, बड़ा दिल चाहिए।
ऐसे लोगों को दिल से सलाम।
आजकल लोग 50,000 का फोन खरीदने से पहले इतना नहीं सोचते।
जितना मैंने एक लंच बॉक्स बैग खरीदने से पहले सोच लिया।
किसी को ये बात मज़ाक लगेगी लेकिन जो रोज़ घर से खाना लेकर निकलता है उसे पता है कि असली परेशानी टिफिन की नहीं उसे ढोने की होती है।
सुबह घर से निकलो, एक हाथ में बैग, दूसरे में टिफिन, फिर बाइक, बस, मेट्रो या ऑफिस के चक्कर।
और ऊपर से अगर टिफिन बैग में सीधा खड़ा न हो तो सब्ज़ी और इज़्ज़त दोनों फैलने का खतरा अलग।
इसीलिए कई दिनों की खोजबीन के बाद ये लंच बैग खरीद लिया।
अब दो टिफिन आराम से आ जाते हैं, हैंडल मजबूत है, साफ करना आसान है, और सबसे बड़ी बात— अब खाना ले जाना "झंझट" नहीं लगता।
मुझे लगता है कि हम लोग अक्सर बड़ी चीज़ों पर बहुत पैसा और ध्यान खर्च कर देते हैं ।
लेकिन रोज़ काम आने वाली छोटी चीज़ों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
सच बताऊँ?
एक अच्छा लंच बैग कई बार उस महंगे फोन कवर से ज्यादा काम का होता है जो सिर्फ़ दिखाने के लिए खरीदा जाता है।
क्या घर से खाना ले जाने वाला इंसान समझदार है या रोज़ 200–300 रुपये बाहर खाने वाला?
मेहनत किसी की मजे किसी और के तेंदुए की पूरी मेहनत पर पानी फेर दिया
लकड़बग्घे ( Hyena )ने जिस तरह पेड़ से शिकार को नीचे खींचा
उसने साबित कर दिया कि जंगल में सुरक्षित कुछ भी नहीं है अंत तक देखें वाइल्डलाइफ का असली हिम्मती रूप!
15साल के वैभव सूर्यवंशी में इतना एटीट्यूड की बच्चों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए प्रति फोटो ₹100...
IPL समाप्त होने के बाद एक कार्यक्रम में वैभव सूर्यवंशी बैठे थे वहीं पर दो बच्चे आते है बोलते है भैया आपके साथ फोटो लेना है!
वैभव बच्चों से बोलते हैं एक फोटो का ₹100...read News