महाड सत्याग्रह (1927) दलितों को सार्वजनिक चावदार टैंक का इस्तेमाल मना था। पानी नहीं था, ऐसा नहीं,अलग क���ओं, नदियों या दूसरों के पानी पर निर्भर रहना पड़ता था, भेदभाव के साथ। गाँवों में आम कुओं से पानी भरना वर्जित था। @ajeetbharti @neha_laldas @talk2anuradha
कुंभ के लिए ₹32–34 हजार करोड़। 100–125 मराठी-माध्यम स्कूल बचाने के लिए चाहिए थे सिर्फ़ ₹32 करोड़।
जस्टिस प्रसन्न बी. वराले का सवाल धर्म बनाम ���िक्षा नहीं, सत्ता की प्राथमिकताओं का है।
उत्सव के लिए ख़ज़ाना खुलता है, गरीब के बच्चे के स्कूल पर ताला लगता है।
यह 255 अक्षरों में है। आँकड़े और संदर्भ NDTV तथा Indian Express की रिपोर्टिंग से पुष्ट हैं।#Education #SaveGovernmentSchools #GovernmentSchools #RightToEducation #EducationMatters #SchoolEducation #PublicEducation #Kumbh #Justice
सरकारी स्कूल के हालात दिखाने पहुचे पत्रकार 👉@kj_srivatsan जी को प्रिंसिपल मैडम ने कह दिया कि आप बत्तामीजी कर रहे हो😳 तो आगे से पत्रकारो को भी ध्यान रखना चाहिए कि जो क्षेत्र मीडिया के लिए प्रतिबंधित है वहा जाने से बचे अन्यथा कुछ ओर भी आरोपो का सामना करना पड सकता है
जयपुर
ये गुंडे पहले स्कूल ठीक कराने आये लोगो को पीट रहे है ,
फिर भगवान श्रीराम के नाम का जयकारा लगा रहे है ,
इन मूर्खों को लगता है को भगवान का नाम लेने से इनके पाप धुल जाएंगे मूर्ख कहीं के।
CJP पैसा इकट्ठा करें,
CJP स्कूल ���ीक करें,
CJP एक-एक रुपया अपने फॉलोवर्स से लें
सरकार मौज करें,
सरकार स्कूलों में फोटो-वीडियो पर रोक लगाए,
सरकार बजट को खर्च नहीं करें।
@pantlp दैनिक भास्कर के पास भी लाखों की संख्या में ग्राहक हैं वो भी यह कर सकते हैं
दैनिक भास्कर को अरबों रुपए विज्ञापन के सरकार से मिलते हैं दैनिक भास्कर ��स पैसे से सरकारी स्कूलों को का काया कल्प कर दे
यह सलाह पूरी तरह मुफ्त है जैसे आपने मुफ्त सलाह दी है
मोदी आने के बाद मुफ्त सलाह मिल
मुख्यमंत्���ी @BhajanlalBjp जी, राजस्थान में अब सवाल पूछना भी अपराध हो गया है क्या ?
जयपुर जिले में सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था की हकीकत देखने पहुंचे CJP से जुड़े लोगों पर जिस तरह हमला हुआ, वह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है। जिस स्कूल की तस्वीरें सामने आई हैं, वे राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त हैं |
लेकिन सवाल यह है कि जब कोई व्यक्ति सरकारी व्यवस्था की कमियां सामने लाता है ���ो उसे जवाब देने के बजाय डराने-धमकाने और हमला करने की नौबत क्यों आती है ?
मैंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर भी यही सवाल उठाया था कि लोकतंत्र में असहमति अपराध नहीं है और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाना गुनाह नहीं है। जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण तरीके से आवाज उठाने वाले युवाओं, महिलाओं और आंदोलनकारियों पर बल प्रयोग का मैंने विरोध किया था।
अब राजस्थान में भी वही सवाल खड़ा है कि ��्या सरकार के खिलाफ सवाल उठाने वालों की आवाज दबाने के लिए सत्ता का संरक्षण प्राप्त लोगों को खुली छूट दे दी गई है ?
बीकानेर जिले के नोखा क्षेत्र में सरकारी स्कूलों में बच्चों की मौत का मामला हो या झालावाड़ में हुई स्कुल त्रासदी,राजस्थान के अलग-अलग जिलों से सरकारी स्कूलों की बदहाली और लापरवाही की भयावह तस्वीरें लगातार सामने आती रही, माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी सरकारी स्कूलों की जर्जर स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी पर गंभीर चिंता व्यक्त की मगर भाजपा सरकार ने सबक नहीं लिया |
अगर सरकारी स्कूलों की बदहाली सामने लाना अपराध है, तो सरकार को यह बताना चाहिए कि स्कूलों की हालत सुधारने के बजाय सवाल उठाने वालों को डराने की कोशिश क्यों हो रही है ?
घटना के 24 घंटे बाद भी भारतीय जनता पार्टी के नेताओं द्वारा हमले को सही बताने की कोशिश करना यह स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री के इशारे पर यह घटनाक्रम हुआ था |
मेरी मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच हो, हमले के सभी दोषियों पर तत्काल कठोर कानूनी कार्रवाई हो |
@RajCMO @RajGovOfficial
“आप हमको चाइनीज़ बोलते हो तो बहुत गुस्सा आता है, बहुत दुख होता है… प्लीज़ हमको ऐसे मत बोलो। हम इंडिया हैं।”
ईटानगर की इस छोटी बच्ची की बात सिर्फ़ एक मासूम शिकायत नहीं है, बल्कि उस सोच पर सवाल है जो भारत क�� नक्शे को तो पहचानती है, लेकिन भारत के लोगों को नहीं।
चेहरा अलग दिखा तो “चाइनीज़” कह दिया।
कब समझेंगे हम कि नॉर्थ-ईस्ट कोई विदेश नहीं, भारत ��ी है। और वहाँ के लोग भी किसी से कम भारतीय नहीं हैं।
शायद देशभक्ति सिर्फ़ झंडा लगाने से नहीं, अपने ही देश के लोगों को पहचानने और सम्मान देने से भी साबित होती है।
इससे पहले कि हम कहें कि हम इंडिया नहीं हैं, हमें चाइनीज मत कहो।#NortheastIndia #India #Racism #StopRacism #ArunachalPradesh #Indian
अगर आप सच में ब्राह्मणवाद का समर्थन करती हैं, तो सड़कों पर टी-शर्ट और पैंट पहनकर मत घूमिए, चारदीवारी के अंदर लंबा घूंघट ओढ़कर पिता और पति के पैरों के नीचे बैठिए, क्योंकि आपकी विचारधारा में नारी, गरीब और शूद्र की जगह वही तय की गई है!
नेहा बोरा—