Cancer patient was about to die. She pleaded. Her plea has been listed 57 times. The court has still not heard it. Teesta Setalvad was about to be jailed. She pleaded. Her plea was listed out of turn. The court heard it at midnight.
Cancer patient is dead. Teesta is alive.
Each name on this list was a child with a dream, a family, a future - all destroyed by a broken system and a government that refuses to learn or take accountability.
Remember these students. Every one of them.
When PM Modi praised Dharmendra Pradhan ji on his birthday, did he even spare a thought for these children?
Dear Dharmendra Uncle,
@dpradhanbjp
Happy Birthday. You turn 57 today. We couldn't even reach half your age.
Yours,
Late Ritik Mishra
Late Anshika Pandey
Late Bhagyashree
Late Umesh Mali
Late Riya Kumari Thapa
Late Anukeerthana
Late Rima Begum
Late Siddharth Hegde
Late Pradeep Meghwal
Late Shivani Yadav
Late Renu Meena
Late Akansha
Late Kahan Patel
Late Maithili Sonwane
संसद जैसी लोकतांत्रिक संस्था में दिया गया हर शब्द करोड़ों लोगों के विश्वास से जुड़ा होता है।इतने गंभीर मामलों में हर शब्द की ज़िम्मेदारी होती है।जनता तो इतनी भोली है कि हर बार कुछ भी कह दीजिए और इन्हें लगता है लोग भूल जाएँगे? जनता सब देख रही है, सब समझ रही है और समय आने पर हर बात का हिसाब भी करेगी। @rajnathsingh जवाब दे और बताए कि सच क्या है?
हृदय का उत्तर- कुछ लोगों का कहना है कि सबसे ज़्यादा सवाल भाजपा से ही क्यों ?
अगर आज केंद्र में सरकार भाजपा की है, अगर 21 राज्यों में उनकी सरकारें हैं, अगर शिक्षा, स्वास्थ्य, भर्ती, महँगाई, अर्थव्यवस्था, कानून-व्यवस्था और प��रशासन से जुड़े फैसले आज की सरकार ले रही है, तो सवाल आखिर किससे पूछे जाएँ?
क्या किसी अस्पताल की बदहाल व्यवस्था के लिए विपक्ष से जवाब माँगा जाए?
क्या किसी पेपर लीक, भर्ती में देरी, सड़क टूटने, पुल गिरने, महँगाई बढ़ने या किसी मंत्रालय की विफलता पर जवाब उस congress से माँगा जाएगा जो सत्ता में नहीं है?
जब कांग्रेस केंद्र में थी, तब उससे सवाल पूछे जाते थे। आज भाजपा केंद्र में है, इसलिए उससे सवाल पूछे जा रहे हैं। कल कोई और सरकार होगी, तो सवाल उससे भी होंगे ही।
हम ��ैसे लोगों का उद्देश्य सत्ता को उसकी ज़िम्मेदारी याद दिलाना है।
आज अगर मैं कांग्रेस के 10–20 साल पुराने कारनामे गिनाकर रोज़ चीखता रहूँ, तो उससे आज देश की कौन-सी समस्या हल हो जाएगी?
क्या उससे कोई पेपर लीक रुक जाएगा?
क्या महँगाई कम हो जाएगी?
क्या शिक्षा व्यवस्था सुधर जाएगी?
क्या अस्पताल बेहतर हो जाएँगे?
देश अतीत की बहसों से नहीं, वर्तमान की नीतियों और भविष्य की दिशा से आगे बढ़ता है।
मैं तो मानकर ब���ठा हूँ कि 2014 से पहले बहुत कुछ ठीक नहीं था।
लेकिन आप तो उसे ठीक करने आए थे न?
अगर हर सवाल का जवाब आज भी - "पहले भी ऐसा था"
जनता ने आपको अतीत की गलतियाँ गिनाने के लिए नहीं चुना था,
वर्तमान सुधारने और भविष्य संवारने के लिए बहुमत दिया था।
आज शिक्षा आपके पास है, स्वास्थ्य आपके पास है, अर्थव्यवस्था आपके पास है, कानून-व्यवस्था आपके पास है, मंत्रालय आपके पास हैं, बजट आपके पास है, प्रशासन आपके पास है।
फिर हर समस्या का जवाब अतीत कैसे हो सकता है?
सत्ता के अहंकार में डूबी मोदी सरकार अब इस मुकाम पर पहुँच गई है कि अपने अधिकारों, निष्पक्ष परीक्षाओं और सुरक्षित भविष्य की मांग करने वाले छात्रों को ही शिक्षा मंत्री “आतंकवादी” कह रहे हैं।
ज़रा सोचिए - जिसकी नाकामी से इतने पेपर लीक हुए, जिसके राज में 20 बच्चों ने जान दे दी, जिसने करोड़ों युवाओं का भविष्य अंधेरे में धकेल दिया - वो आज पीड़ित बच्चों और उनकी आवाज़ उठाने वालों को “द��शतगर्द” बता रहा है।
पर यह कोई नई बात नहीं: अन्नदाता किसानों को "आंदोलनजीवी और परजीवी" कहा। सवाल पूछने वाले को “Anti-National” कहा। और अब युवाओं को “दहशतगर्द।”
जो भी सरकार से सवाल पूछे - उसे देशद्रोही बता दो, यही इनकी पूरी राजनीति है।
धर्मेंद्र प्रधान जी, देश के करोड़ों युवाओं से तुरंत माफ़ी माँगिए और अपनी नाकामियों के लिए इस्तीफ़ा दीजिए।
और रही मेरी बात - आप मुझ पर जितने चाहें हमले कर लीजिए। मैंने कोटा में कहा था, और फिर कहता हूँ: यह शिक्षा व्यवस्था आज सिर्फ़ एक वसूली तंत्र बन गई है। मैं इसे ऐसे ही नहीं रहने द���ँगा।
हर बच्चे को सस्ती, अच्छी शिक्षा और निष्पक्ष परीक्षा मिले - इस आवाज़ को उठाना मैं कभी बंद नहीं करूँगा।
#ChhatronKiGoonj
#ChhatraJodo
कितनी शर्मनाक बात है कि प्रधानमंत्री आज अपने लीक-प्रधान को जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं और पेपर-लीक के चलते अपनी जान गँवाने वाले विद्यार्थियों के लिए उनके मुँह से संवेदना के एक शब्द तक नहीं फूटे।
“बेशर्मों की सरकार है-इसलिए पेपर-लीक हर बार है”
N Gadkari: Those opposing use of ethanol are anti national.
D Pradhan: Those protesting against NEET Paper leak are terrorists.
That's the mindset of our Cabinet Ministers.
There is no shame left for this Government.
#DharmendraPradhanMustResign
जब तक हादसा नहीं हुआ था, तब तक किसी ने नहीं देखा कि लाइब्रेरी में फायर NOC है या नहीं, फायर एक्सटिंग्विशर काम के हैं या नहीं, आपातकालीन निकास पर्याप्त हैं या नहीं।
लेकिन अब जब 14-15 बच्चों की जान चली गई, तब जांच होगी-उससे पहले सब भांग खाए थे(जिसका अर्थ है- जिम्मेदार लोग सोए हुए थे, लापरवाह थे, या जानबूझकर आँखें बंद किए हुए थे)
अत्यंत दुखद। 💔
14-15 मासूम बच्चों का इस तरह असमय चले जाना केवल एक हादसा नहीं, हमारी सामूहिक विफलता का आईना है।
लेकिन जिन घरों के चिराग बुझ गए, उन्हें कौन लौटाएगा?
ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्र��ान करें और शोकाकुल परिवारों को यह असहनीय दुःख सहने की शक्ति दें।
ॐ शांति। 🕯️🙏
@abhinaymaths That's understandable PR for the government's actions and inactions, but what the opposition is doing is really horrible. There is no opposition and that's what this government has achieved so far and that's the reason Government doesn't even care about the common people
💔 आज देश का बड़ा संकट ये नहीं है कि भ्रष्टाचार के आरोप सामने नहीं आते, मंत्री या मुख्यमंत्री Exposed नहीं होते। बल्कि कुछ ही घंटों बाद इतनी बड़ी PR active हो जाती है कि पूरा narrative बदल जाता है।
किसी पर बड़ा आरोप लगता है, कोई मामला सामने आता है, कुछ तथ्य निकलते हैं... लेकिन 4–5 घंटे भी नहीं बीतते कि सोशल मीडिया पर इतनी PR , इतना propaganda और इतना शोर खड़ा कर दिया जाता है कि लोगों को लगने लगता है- शायद पहले जो बताया गया था, वही गलत था।
आज सही और गलत का फैसला अदालत से पहले सोशल मीडिया की PR मशीनें देती हैं।
सच कहीं पीछे छूट गया है। खेल सिर्फ़ इतना है कि एक झूठ को बार-बार दोहराओ, उसे इतना फैलाओ कि वही सच जैसा दिखने लगे।
सबसे बड़ा नुकसान देश का हो रहा है। जब हर मुद्दे को मैनेज कर दो। हर सवाल को ट्रेंड से दबा दो और हर आरोप को narrative बदलकर धुं��ला कर दो और फिर जवाबदेही खत्म।
एक पीड़ा इस बात की है कि जिन लोगों से आवाज़ उठाने की उम्मीद थी, उनमें से बहुत से लोग चुप हैं और जो विपक्ष में हैं, उनका विरोध भी इतना हल्का होता है कि लगता है जैसे वे भी पूरी ताकत से लड़ना नहीं चाहते। शायद उन्हें भी डर है कि कहीं उनके अपने पुराने काले कारनामे सामने न आ जाएँ।
और अब हालत ये है कि बड़े-बड़े भ्रष्टाचार भी धीरे-धीरे सामान्य लगने लगे हैं।यही किसी भी लोकतं��्र के लिए सबसे खतरनाक स्थिति है- जब जनता सवाल पूछना छोड़ दे और narrative ही सच लगने लगे।
इसका सबसे बड़ा नुकसान आज नहीं, आने वाली पीढ़ियाँ भुगतेंगी।धीरे-धीरे समाज सवाल पूछना छोड़ देगा। भ्रष्टाचार सामान्य लगने लगेगा। लोग सोचेंगे- सब चलता है, इससे लड़कर भी क्या होगा? यही किसी राष्ट्र की सबसे ख़तरनाक हार है, जिस देश की जनता सच और झूठ में फर्क करना छोड़ दे ।
आज सच बिना PR के लगभग शून्य हो गया है झूठ PR के सहार��� सच में बदलता हुआ दिखने लग रहा है।💔
"Dharmendra Pradhan is saying that student protesters are a B team of terrorists "
If we are the B Team, then are you the A Team of Terrorists"
Abhinay Sir roasts Dharmendra Pradhan and his loose talk.
कुछ ज़ख्म शरीर पर नहीं, भविष्य पर लगते हैं।
कुछ दर्द शब्दों में नहीं समाते, बस आँखों से बह निकलते हैं।
please listen- लाखों सपनों की चीख है, टूटते हुए सपनों की गवाही है,एक पीढ़ी की पीड़ा है।
रत्ती भर भी लज्जा नहीं आई ये ट्वीट लिखते हुए? कब तक इस पतित को बचाते रहोगे? कौन सी विवशता है सिवाय इस ईगो बैटल के कि जनता के दवाब में तो नहीं हटाऊँगा?
समाज में इस व्यक्ति को ले कर जो भाव हैं, और @narendramodi का जो यह इंडोर्समेंट है, वह बताता है कि इस सरकार ने शिक्षा को अपनी अंतिम प्राथमिकता बना रखा है।
माननीय प्रधानमंत्री जी,
जन्मदिन की शुभकामनाएँ अपनी जगह हैं, लेकिन शिक्षा मंत्रालय का मूल्यांकन शुभकामनाओं से नहीं, परिणामों से होगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का पूरा क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ है।
अगर राष्���्रीय शिक्षा नीति इतनी सफलतापूर्वक लागू हो रही है, तो फिर बार-बार पेपर लीक क्यों हो रहे हैं? भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताएँ क्यों हैं? लाखों युवा वर्षों तक परिणाम और नियुक्ति का इंतज़ार क्यों कर रहे हैं? सरकारी स्कूलों और उच्च शिक्षा की चुनौतियाँ आज भी जस की तस क्यों हैं?