बी एन राव बहुत अच्छी ���ाय बनाते थे । चायपत्ती और चीनी के साथ अदरख और ईलाईची डालकर बनाई हुई उनकी चाय पीकर बाबा साहब फ्रेश फील करते थे और ताबङतोङ संविधान का चार-छह पेज एक सीटिंग में लिख देते थे ।
बाबा साहब के ��िजी सचिव नानक चंद रत्तू ने एक मुलाकात में मेरे दादाजी को बताया था कि भी एन राव नारियल तेल में कपूर डालकर सोने से पहले बाबा साहब के पैरों की मालिश करते थे । उनके हाथों में तो जैसे जादू था ।
देश बी एन राव का ऋणी रहेगा । इतना अच्छा नौकर नसीब वालों को मिलता है।
बोधगया। विश्व धरोहर महाबोधि मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था एक बार फिर दान के रूप में देखने को मिली। मंदिर के दान पात्रों में प्राप्त राशि की छह दिनों तक चली गिनती गुरुवार को पूरी हुई।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस बार मंदिर को करीब दो करोड़ रुपये का दान प्राप्त हुआ है, जिस��ें लगभग 1.50 करोड़ रुपये भारतीय मुद्रा और करीब 50 लाख रुपये मूल्य की विदेशी मुद्रा शामिल है।
दान राशि की गणना पारदर्शिता के साथ नजारथ उप समाहर्ता, बोधगया मंदिर प्रबंधन समिति (बीटीएमसी) के सचिव, समिति के सदस्यों और मंदिर के पुजारियों की मौजूदगी में की गई।
6 दिनों तक चली गिनती
दान की गिनती का कार्य लगातार छह दिनों तक चला। इसके बाद पूरी राशि को भारतीय स्टेट बैंक, बोधगया शाखा में बीटीएमसी के अधिकृ�� खाते में जमा करा दिया गया।
विदेशी भक्तों ने खोला दिल
सूत्रों के अनुसार, इस वर्ष भी बड़ी संख्या में विदेशी श्रद्धालुओं ने उदारतापूर्वक दान दिया। विशेष रूप से म्यांमार, थाईलैंड और वियतनाम सहित कई बौद्ध देशों के श्रद्धालुओं की ओर से विदेशी मुद्रा में उल्लेखनीय योगदान प्राप्त हुआ।
मंदिर को कई अन्य देशों की मुद्राएं भी दान स्वरूप मिली हैं, जिन्हें नियमानुसार बैंकिंग प्रक्रिया के तहत जमा कराया जाएगा।
#JagranNews #MahabodhiTemple
"सभी नागरिकों को भारत सरकार का गुलाम बनाया जा रहा है, वे विरोध-प्रदर्शन नहीं कर सकते....."
◆ एक मामले की सुनवाई करते हुए बम्बई उच्च न्यायालय के जस्टिस माधव जामदार ने कहा
#JusticeMadhavJamdar | Bombay High Court | Justice Madhav Jamdar
Uttarakhand: 'ऊंची जाति' की लड़की से प्रेम की सज़ा? दलित लड़के को पीटा, पैर में ठोक दी कील; मामले में पुलिस और Chandrashekhar Azad क्यों भीड़े?
#uttarakhand#dalit
"देश का दल, बजरंग दल",
चढ़ावा चोरी पर चुप क्यों है?
क्या उनका काम सिर्फ 14 फरवरी को कपल्स की हड्डियां तोड़ना है?
RSS का प्रदर्शन नहीं हुआ? VHP का प्रदर्शन नहीं हुआ?
ऐसा क्यों?
लाठी खाई, शर्ट फटी, अपमान सहा, पुलिस प्रशासन से टकराव हुआ और अंत में केतन लाल के परिवार से मुलाक़ात हो गई, 🔥🔥
याद रहे केतन लाल की हत्या सुवर्णो ने इसलिए कर दी क्योंकि उसकी दोस्ती एक सुवर्ण समुदाय के लड़के से हो गई थी,
केतन लाल के पैरों में कील ठोंकी गई थी, उसे इतना बेरहमी से मारा की शरीर के अंदर सारी हड्डियां फैक्चर हो गई थी, तड़पते हुए उसकी दर्दनाक मौत हो गई,
कुछ लोगों को लगता है रील बाजी कर रहा है, लेकिन हक़ीक़त यह है कि अपनों के साथ खड़ा होने के लिए शेर का कलेजा चाहिए,
चंद्रशेखर शेर का कलेजा लेकर पैदा हुआ है, उसकी बराबरी सोने का चमचा लेकर पैदा हुए और महलों से आंदोलन चलाने वाले नहीं कर पाएंगे 🔥🔥
एक बात तो माननी पड़ेगी कि चंद्रशेखर रावण काफी ज्यादा मेहनती और संघर्ष करने वाले व्यक्ति हैं
वो अलग बात है कि थोड़ी सी आलोचना पर मुझे ब्लॉक किए हैं लेकिन फिर भी मुझे अच्छा लगता है जब ये किसी को न्याय दिलाने के लिए दिल से लग जाते हैं।
देश और प्रदेश में अभी वर्तमान में बहुत ही कम नेता बचे हैं जो सड़कों पर लोगों के लिए लड़ते हैं
आज चंद्रशेखर आजाद उत्तराखण्ड केतन के घर पहुंचे जहां कुछ दिनों पहले उसकी हत्या कर दी गई थी।
उसकी गलती सिर्फ इतनी थी कि केतन दलित था और सर्वण लड़की से प्रेम कर बैठा था।
सोचिए,
उत्तराखंड से चंद्रशेखर को कोई वोट नहीं मिलेगा लेकिन ये बंदा बिना किसी स्वार्थ के अपने समाज के बच्चे के न्याय के लिए लड़ रहा है।
कल SSC GD की परीक्षा के लिए एक केंद्र पर 800 लोगों को बुला लिया गया, लेकिन बैठने की व्यवस्था सिर्फ 250 लोगों के लिए ही थी।
कितना दुखद है कि मोदी सरकार ठीक से एक परीक्षा भी नहीं करवा पा रही है।
हालात ये हैं कि जब एक 17 साल का छात्��� CBSE से जुड़ी समस्याओं पर गुहार लगाता है, तो अपनी रीढ़ की हड्डी खो चुके कुछ पत्रकार उसे देशद्रोही बताने लगते हैं।
जो प्रधानमंत्री परीक्षा से पहले 'परीक्षा पे चर्चा' करते हैं, वही प्रधानमंत्री पेपर लीक होने पर एक शब्द नहीं बोलते।
पहले NEET के पेपर लीक की खबरें आने लगी, उसके बाद CBSE का मामला सामने आ गया।
आखिर नरेंद्र मोदी की क्या मजबूरी है कि उन्होंने एक अयोग्य व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बना दिया है।
: @nsui के प्रभारी @kanhaiyakumar जी
📍 दिल्ली
🇮🇳क्रिकेट एलीट का खेल, बाकी खेलों का सफर ई-रिक्शा पर! 🔥🔥🔥
देव कुमार मीणा (ST) और कुलदीप कुमार (SC) ने 5.45 मीटर की छलांग लगाकर नेशनल रिकॉर्ड बनाया, कॉमनवेल्थ 2026 के लिए क्वालीफाई किया।
लेकिन कुछ घंटे बाद ही अपनी पोल���स ई-रिक्शा में खुद ढोते नजर आए। भारत में क्रिकेट सिर्फ एलीट लोगों का खेल है सरकार उस पर अरबों खर्च करती है, प्रायोजक, सुविधाएँ, मीडिया कवरेज सब कुछ। लेकिन दूसरे खेलों को कोई बड़ा सपोर्ट नहीं देता।
मेरिट भ्रम है भाई।
जब हमारे लोगों को मौका मिलता है, तो वे हर जगह झंडा गाड़ देते हैं रिकॉर्ड तोड़ते हैं, देश का नाम रोशन करते हैं। फिर भी उन्हें बुनियादी सम्मान और सुविधाएँ नहीं मिलतीं।
ABP न्यूज़ की महान पत्रकार @chitraaum के अनुसार पेट्रोल के बढ़े दामों से आपकी जेब पर सिर्फ 441 ₹ का अतिरिक्त भार पड़ेगा
कोई चित्रा त्रिपाठी जी को बताओ पेट्रोल की बढ़ी हुई कीमतों का प्रभाव एक सुई से लेकर हवाई जहाज और किचन से लेकर 5 स्टार होटल तक भी पड़ता है
विश���व की सबसे घटिया मीडिया में से एक होने की सभी कसौटिय���ं पर खरा उतर रहा है हमारा मीडिया और उसके विश्व स्तरीय पत्रकार...!!
जो भी मजबूर, असहाय और व��यवस्था के सताए लोगों की निंदा कर रहे हैं, इसे भी इतिहास में लिखा जाएगा...और एक दिन आएगा जब आपको या आपकी किसी पीढ़ी को आपके इस वक्तव्य के लिए अफसोस होगा...लिख कर रख लीजिए...
कुमार विश्वास आप तो एक धार्मिक कथावाचक है, और आपके लिए कॉकरोच भी ईश्वर की बनाई इस सृष्टि का हिस्सा होना चाहिए था...आपको तो समभाव ही रखना था...आप क्यों बहक गए...आश्चर्य कि आपने यह तक समझने का प्रयास नहीं किया कि किसने किसे कॉकरोच कहा है...!!
आप जैसे लोगों के कारण त्याज्य तो शबरी और अहिल्या भी थी @DrKumarVishwas पर राम ने उन्हें सम्मान दिया, आपने राम की केवल कथा कही पैसे के लिए उन्हें आचरण में नहीं उतार पाए |
राजकीय कवि कुमार विश्वास ने युवाओं के सटायर मूवमेंट कॉकरोच जनता पार्टी का अपमानजनक टिप्पणी की है.
कुमार विश्वास ने मीडिया से बातचीत में कहा, कॉकरोच की उत्पत्ति हो रही है तो HIT का भी आविष्कार हुआ है.
कुमार विश्वास कहना चाहते हैं कॉकरोच मूवमेंट को कुचल देना चाहिए.
कॉकरोच जनता पार्टी की आइडेंटिटी पर बहस हो सकती है, लेकिन जो पार्टी जनता से जुड़े हुए जरूरी मुद्दे उठा रही है.
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके दलित समाज से हैं इसी कारण पंडित विश्वास कुमार शर्मा का पेट पीरा रहा है. जबकि यह आदमी खुद अन्ना आंदोलन के समय रामलीला मैदान में बने मंच पर डांस और ताली बजाकर फेमस हुआ, नही तो यह 500 रुपए वाला हस्य कवि था.
“सखी, सैंया तो ख़ूब ही कमात है…
महंगाई डायन खायत जात है…”
जनगीत इसलिए अमर होते हैं क्योंकि वे सत्ता नहीं, समाज का सच बोलते हैं। देश केवल सरकारों से नहीं, जनता की चेतना से बनता है। जब लोग सवाल छोड़कर सिर्फ़ जय-जयकार में लग जाते हैं, तब लोकतंत्र भीतर से कमज़ोर होने लगता है।
आज मेहनत बढ़ रही है, लेकिन आम आदमी की थाली, पढ़ाई और इलाज लगातार महँगे होते जा रहे हैं। फिर भी सबसे ज़्यादा शोर मुद्दों पर नहीं, चेहरों पर है। इतिहास गवाह है - किसी भी राष्ट्र को सिर्फ़ बुरे शासकों ने नहीं, अंध-समर्थकों ने भी नुकसान पहुँचाया है।
इसलिए ज़रूरी है कि हम संवेदनशील नागरिक बनें, क्योंकि देशभक्ति का मतलब सत्ता से प्रेम नहीं, समाज के दुख को समझना भी होता है।