सत्य निकेतन की ध्वस्त इमारत के बेसमेंट में ज़िंदा बचे लोग भी तो हो सकते हैं! बेसमेंट की खुदाई क्यों नहीं हो रही? सरकार ये मानकर क्यों चल रही है क�� मलबे के नीचे दबे सारे लोग मर चुके हैं! अगर ऐसा हुआ भी है तो क्या मृतकों की सम्माजनक अंत्येष्टि नहीं की जानी चाहिए?
@narendramodi @gupta_rekha
प्रयागराज के आस पास व प्रदेश के तमाम बेरोजगार युवा अपने हक व अधिकार की खातिर प्रयागराज में पहुंचकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन का सहयोग करें,
प्रशासन को अपना काम करने दे,
हमे अपने मुद्दे स��� नहीं भटकना है,
हमारा लक्ष्य एक ही है - शिक्षक भर्ती
हम छात्रों के साथ खड़े हैं।
: CJP
उत्तर प्रदेश में पिछले 8 वर्षों से शिक्षक भर्ती नहीं आई है,
इसी सिलसिले में आज बेरोजगार युवाओं का प्रयागराज में प्रदर्शन है,
पर उत्तर प्रदेश की पुलिस जबरन छात्रों की आवाज का दमन करने की कोशिश कर रही है,
ये गलत है,
हम छात्रों के साथ मजबूती से खड़े है जरूरत पड़ी तो हम भी आयेंगे।
दिल्ली में जो हादसा हुआ और जिसमें तमाम बच्चे उसमें मारे गए वहां पर भाजपाई अत्याचार और तांडव शुरू हो गया है, बच्चों को डराया धमकाया और मीडिया से बात करने से रोका जा रहा है, इस प्रकार की तानाशाही देश ने कभी पहले नहीं देखी
एक तो भाजपा सरकार बच्चों की हत्यारी है और अब बच्चों को आवाज उठाने से रोका जा रहा है, यह बे��द शर्मनाक है, इस अहंकारी अत्याचारी और हत्यारी भाजपा सरकार को सत्ता से हटना ही होगा
गुजरात पुलिस हत्या के आरोपी फैजल को क्राइम सीन क्रिएट कराने ले गई है -
इस दौरान पुलिस ने बर्बरता से आरोपी को डंडो से
पीटा है..कई अलग अलग स्थानों के वीडियो
वायरल हैं..!
मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूं कि क्या अब न्यायालय अथ��ा जेलों की आवश्यकता नहीं बची...?
ऐसे तमाम वीडियो वायरल है..मैं हैरान हूं मानवाधिकार आरोप न जाने कहां सो रहा है..!
एक प्रश्न और क्या ऐसी सजा देने से अपराध पर नियंत्रण लगेगा..?
4400 करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क रामवनगमन उद्घाटन से पहले ही धंस गई
पत्रकार @ravirajprayagi भ्रष्टाचार को दिखाने गए तो उनके साथ कुछ लोग बदतमीजी करने लगे
ऐसे साहसी पत्रकारों को नमन है जो जान की बाज़ी लगाकर सच दिखाते है 🫡
“जो सच बोलेंगे, मारे जाएँगे…”
राजेश जोशी की इस कविता को शायद उत्तर प्रदेश में अब यूँ पढ़ना पड़े—
“जो सच बोलेंगे, FIR के शिकार हो जाएँगे!”
‘ज़मीनी खबर’ के पत्रकार @amityadavbharat पर हुई FIR इसी डरावनी प्रवृत्ति की एक और मिसाल है। सवाल यह है कि आख़िर उनका गुनाह क्या है? सरकारी स्कूलों की ख़स्ताहाल स्थिति कैमरे पर दिखा देना? बच्चों की शिक्षा और बदहाल व्यवस्था पर सवाल उठा देना? या फिर क़लम, किताब और सच की बात करना?
अगर स्कूलों की तस्वीर अच्छी है, तो कैमरे से डर कैसा? और अगर तस्वीर ख़राब है, तो उसे दिखाने वाले पत्रकार पर FIR क्यों?
लोकतंत्र में पत्रकार का काम सरकार की वाहवाही करना नहीं, सत्ता से सवाल करना है। सच दिखाने वाले कैमरे और सवाल पूछने वाली क़लम पर मुक़दमे दर्ज होने लगें, तो यह केवल एक पत्रकार को डराने की कोशिश नहीं होत���—यह हर उस आवाज़ के लिए संदेश होता है जो सत्ता से असहज सवाल पूछने की हिम्मत करती है।
स्कूलों की बदहाली छिपाने से शिक्षा नहीं सुधरेगी। FIR से सवाल ख़त्म नहीं होंगे।
मोदी सरकार या फिर अनपढ़ सरकार..
ये लोग Foreign Exchange बचाने के लिए गन्ने से Ethanol बना रहे थे। अब देश में चीनी की कमी हो गई है और सिर्फ 17 दिनों में दाम ₹20 बढ़ गए हैं।
अब हालात ऐसे हो गए हैं कि वही Foreign Exchange फूंक कर चीनी Import करने की नौबत आ गई है। ये सरकार है या मज़ाक?
देश का भविष्य गड्ढों से होकर स्कूल पहुँचेगा, तो विकास के दावों पर सवाल उठेंगे ही।
यह वीडियो नासिक का बताया जा रहा है, जहाँ बच्चे स्कूल तक अच्छी सड़क की माँग को लेकर अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं।
देश में इन दिनों एक अ��ग ही हवा दिखाई दे रही है। इस हवा में हिम्मत है, हौसला है और अपने हक़ के लिए सवाल पूछने का साहस है। कहीं छात्र शिक्षा और रोज़गार के लिए खड़े हैं, तो कहीं छोटे-छोटे बच्चे स्कूल तक सड़क के लिए आवाज़ उठा रहे हैं।
नई पीढ़ी अब खामोशी को अपनी नियति मानने के लिए तैयार नहीं है। यही हिम्मत लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताक़त है।
आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेज़ों से लड़ने का मौका संघ ने जाने दिया। कोई बात नहीं, इतिहास कभी-कभी दूसरा मौका देता है। चीन सामने है - इस बार अपनी देशभक्ति नारों में नहीं, सीमा पर साबित कर दीजिए। शायद इतिहास के पुराने पन्नों पर लगा ���ाग़ कुछ हल्का हो जाए।
बाक़ी, अरुणाचल प्रदेश के इस नौजवान को सुनिए -
“Goodbye India, See You in China”
ये कहना है अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले लोगों का,
अगर ये सच है तो बेहद ही भयावह व गंभीर चिंता का विषय है,
यह देश से जुड़ा गंभीर विषय है,
मेरा सरकार से मांग है इसको लेकर अरुणाचल प्रदेश से संबंधित एक क्लियर स्टेटमेंट ज��री है,
आखिर वर्तमान में अरुणाचल प्रदेश की क्या स्थिति है,
क्या वाकई में चीन हमारे प्रदेश को धीरे धीरे कब्जा कर है?
सरकार बताए।
देश का सबसे बड़ा मज़ाक देखिए -
एक तरफ़ लाखों B.Ed., D.El.Ed. और TET पास युवा भर्ती का इंतज़ार कर रहे हैं, दूसरी तरफ़ सरकारी स्कूलों में शिक्षक ही नहीं हैं। कहीं बच्चे धरने पर हैं, तो कहीं चपरासी बच्चों को पढ़ाने पर मजबूर है।
अब यह साफ़ होता जा रहा है कि भाजपा सुनियोजित तरीके से सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को कमज़ोर करके बंद कराने की दिशा में बढ़ रही है, ताकि देश की वंचित और शोषित आब��दी पढ़-लिख ही न पाए।