मो���ब्बत का आखिरी खत हमेशा सूखे कागज पर लिखा जाता है। क्योंकि दिल की नमी तो पहले ही आंखों ने सोख ली होती है।
कल राजस्थान विधानसभा की 75 बरस की विधायी यात्रा के मौके पर जो जल��ा लगा मैं उसमें टकटकी लगाकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ को देख रहा था। मैं सोच रहा था कि आज राठौड़ साहब क्या बोलेंगे ? कैसा बोलेंगे ?
तो क्या वे राजस्थान की विधानसभा के नाम अपना आखिरी खत पढ़ रहे थे ? एक आशिक के लिए सबसे बड़ा दर्द होता है अपनी मोहब्बत के नाम आखिरी खत पर दस्तखत करना।
एक वाकया याद आता है, जब बीती गहलोत सरकार में सिर्फ एक दिन के लिए विधानसभा का सत्र बुलाया गया था। उसमें म��नेसर कांड के बाद गहलोत सरकार को विश्वास मत हासिल करना था। राठौड़ साहब को तभी परदेस से एक न्योता मिला और मान - मनोव्वल चल रही थी कि कैसे भी करके राठौड़ साहब हामी भर दें। लेकिन बात नहीं बनी और राठौड़ साहब ने कहा कि 35 साल की विधायकी में कभी विधानसभा से छुट्टी नहीं ली है। दो दिन परदेस जाने के लोभ में विधानसभा का एक दिन खराब नहीं करूंगा। राठौड़ साहब ने तब विदेश ना जाना चुना और विधानसभा पहुंच गए। यह बात इसलिए लिख रहा हूँ ताकि हमारी 75 बरस की शानदार विधायी यात्रा को शानदार बनाने वाली ऐसी कहानियां लिपिबद्ध हो सकें। सियासत तो सब नेताओं की मुहब्बत होती है, सियासत से कौन दूर होना चाहता है। लेकिन पार्लियामेंट्री पॉलिटिक्स को पसंद करने वाले लोग हर दौर में चुनिंदा ही ह���ए हैं। राठौड़ साहब में ये हसरत हिलोरें मारती थी।
राठौड़ साहब कल पुराने नेताओं के भाषणों का जिक्र कर रहे थे। शायद इस उम्मीद के साथ की एक दिन उनके लिए ऐसे नग़मे कोई दूसरा शख्स यहां खड़े होकर कहेगा।
राजस्थान की विधानसभा को सबसे ज्यादा खूबसूरत लिबास मोहनलाल सुखाड़िया, भैंरोसिंह शेखावत और निरंजन नाथ आचार्य ने पहनाया है। राजेन्द्र राठौड़ ने उस लिबास को अब तक मैला नहीं होने दिया था। अच्छा बोल लेने में और सलीकेदार बोल लेने में बड़ा अंतर होता है। राठौड़ साहब विधानसभा के सलीकेदार वक्ता हुआ करते थे। सलीका सीखकर आता है और सीखा उस्तादों से जाता है। जिन्हें जिस दर्जे के उस्ताद मिले उसे वही सलीका नसीब हुआ। डॉ सीपी जोशी के उस्ताद मोहनलाल सुखाड़िया थे और राजेन्द्र राठौड़ के भैंरोसिंह शेखावत ल���हाजा दोनों को वैसा ही सलीका मिला।
वो तेरे नसीब की बारिशें
किसी और की छत कर बरस गईं
आदमी जिंदगी भर बूँद - बूँद जमा करके सलीका बुनता है और नसीब की दीवार से टकराकर सिर फोड़ लेता है। ठीक इसी के इर्द - गिर्द पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे कल अपना वक्तव्य सुना रही थीं।
लियोनेल मेसी अब बार्सिलोना क्लब के नहीं खेलते लेकिन फुटबॉल के दीवाने इस उम्मीद के साथ बने हुए हैं कि एक दिन मेसी बार्सिलोना लौट��ंगे उस विदाई के लिए जो बार्सिलोना में उन्हें बतौर खिलाड़ी नहीं मिली है। मेसी के बिना बार्सिलोना में एक वीरानी पसरी है क्योंकि बार्सिलोना है तो मेसी है।
कहानी इस उम्मीद के साथ खत्म होती है कि एक दिन राजेन्द्र राठौड़ राजस्थान की विधानसभा में लौटेंगे उस विदाई के लिए जो बतौर पार्लियामेंट्रियन उन्हें नहीं मिली।
@Rajendra4BJP
OPERATION SINDOOR
Indian Army Pulverizes Terrorist Launchpads
As a response to Pakistan's misadventures of attempted drone strikes on the night of 08 and 09 May 2025 in multiple cities of Jammu & Kashmir and Punjab, the #Indian Army conducted a coordinated fire assault on terrorist launchpads, pulverizing & razing them to cinders.
The terrorist launchpads, located close to the Line of Control, were a hub for planning and executing terror attacks against Indian civilians and security forces in the past. The Indian Army's swift and decisive action has dealt a significant blow to terrorist infrastructure and capabilities.
#IndianArmy
#PahalgamTerrorAttack
#JusticeServed
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