ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात लेखक विनोद कुमार शुक्ल जी के निधन से अत्यंत दुख हुआ है। हिन्दी साहित्य जगत में अपने अमूल्य योगदान के लिए वे हमेशा स्मरणीय रहेंगे। शोक की इस घड़ी में मेरी संवेद���ाएं उनके परिजनों और प्रशंसकों के साथ हैं। ओम शांति।
लोकतान्त्रिक व्यवस्था का सम्मान कैसे किया जाता है अटल जी की इस स्पीच से सीखना चाहिए। आजकल इमरान खान भारत की दुहाई देते हैं। लेकिन लोकतंत्र के प्रति भारतीय समर्पण को नहीं सुनना चाहते। एक वोट से अटल जी की सरकार गिर गयी थी। उन्होंने संख्याबल के समक्ष शीश झुकाया। इस्तीफ़ा दे दिया था।
एकात्म मानववाद के प्रणेता, जनसंघ के संस्थापक सदस्य, कुशल संगठनकर्ता और हमारे पथ प्रदर्शक श्रद्धेय पंडित दीनदयाल उपाध्याय जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन। राष्ट्रनिर्माण हेतु अपना संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले दीनदयाल जी के विचार हम सभी के लिए प्रेरणादायी है।