"विकास के नाम पर विनाश का रास्ता"
भारत की सबसे प्राचीन पर्वतमाला अरावली आज अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी लड़ाई लड़ रही है। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश के बाद 100 मीटर से कम ऊँचाई वाली पहाड़ियों को “पहाड़” न मानने की व्याख्या सामने आई है, जिसने अरावली के विशाल भूभाग को कानूनी संरक्षण से बाहर करने का खतरा पैदा कर दिया है। यह केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी परिणाम राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और पूरे उत्तर-पश्चिम भारत के पर्यावरणीय भविष्य को ��ीधे प्रभावित करने वाले हैं।
अरावली पर्वतमाला लगभग 692 किलोमीटर तक गुजरात से लेकर दिल्ली तक फैली है और इसे लगभग तीन अरब वर्ष पुरानी पर्वत श्रृंखला माना जाता है। इसका दो-तिहाई हिस्सा राजस्थान में स्थित है, जहाँ यह जलवायु संतुलन, वर्षा चक्र और भूजल रिचार्ज की रीढ़ के रूप में कार्य करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि अरावली न होती, तो पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत का बड़ा भूभाग रेगिस्तान में बदल च��का होता। ऐसे में इस प्राकृतिक ढाल को कमजोर करना दीर्घकालिक पर्यावरणीय आत्मघात से कम नहीं है।
फॉरेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया के आँकड़े इस संकट की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। देश में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से केवल 1,048 यानी महज 8.7 प्रतिशत ही 100 मीटर की ��ँचाई के मानक पर खरी उतरती हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि अरावली का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा इस नई व्याख्या के बाद कानूनी सुरक्षा खो सकता है। यह स्थिति खनन, रियल एस्टेट और निजी परियोजनाओं के लिए रास्ता खोलती है, जबकि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के लिए यह विनाश का संकेत है।
अरावली केवल पहाड़ियों की श्रृंखला नहीं है। यह 300 से अधिक जीव-जंतुओं और पक्षियों का प्राकृतिक आवास है, लाखों पशुपालकों के लिए ��ारागाह है और बनास, साबरमती तथा लूणी जैसी नदियों का उद्गम स्थल भी है। इसकी चट्टानी संरचना वर्षा जल को रोककर उसे जमीन के भीतर पहुँचाती है, जिससे पूरे क्षेत्र में भूजल रिचार्ज होता है। पहले से ही जल संकट से जूझ रहे पश्चिमी राजस्थान के लिए अरावली का कमजोर होना सूखे को स्थायी बना देने जैसा होगा।
सरकार की पर्यावरण नीति की वास्तविक तस्वीर जोजरी नदी की उपेक्षा और खेजड़ी वृक्षों के साथ हो रहे व्यवहार से भी साफ होती है। खेजड़ी, जिसे राजस्थान का राज्य वृक्ष माना जाता है और जो रेगिस्तानी पारिस्थितिकी तंत्र की जीवनरेखा है, आज योजनाबद्ध कटाई का शिकार बन रहा है। सरकारी आँकड़ों और जमीनी आकलनों के अनुसार, सोलर परियोजनाओं और औद्योगिक लीज़ के नाम पर अब तक लगभग 26 लाख खेजड़ी पेड़ काटे जा चुके हैं, जबकि आने वाले समय में करीब 50 लाख और खेजड़ी पेड़ों की कटाई की तैयारी की ज��� रही है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि एक पूर्ण विकसित खेजड़ी पेड़ के साथ अन्य पेड़ो को तैयार होने में लगभग 100 वर्ष लगते हैं, जिससे मरुस्थल के इस अनमोल पारिस्थितिकी तंत्र पर दीर्घकालिक और गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
एक पेड़ औसतन 1,200 किलोलीटर ऑक्सीजन प्रतिवर्ष देता है। इस आधार पर, जो 26 लाख पेड़ काटे गए, वे हर साल लगभग 25 करोड़ किलोलीटर ऑक्सीजन प्रदान करते थे जो अब पूरी तरह बंद हो चुकी है। पेड़ों के कट��े और बड़े पैमाने पर ऊर्जा प���ियोजनाओं की स्थापना के कारण तापमान में 3 से 4 डिग्री तक वृद्धि दर्ज की गई है। पर्यावरणविदों के अनुसार, पश्चिमी राजस्थान में बारिश कम होने का यह एक प्रमुख कारण बन गया है। तापमान बढ़ने और आवास नष्ट होने के चलते रेगिस्तान के कई छोटे जीव भी विलुप्ति के कगार पर पहुँच गए हैं। जबकि यही पारिस्थितिकी तंत्र है जो न्यूनतम पानी में पनपता है, मिट्टी को बाँधकर मरुस्थलीकरण को रोकता है, पशुओं के लिए चारा देत��� है और स्थानीय ग्रामीण अर्थव्यवस्था का आधार है।
विडंबना यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीत में अरावली की रक्षा के लिए ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। 1990 के दशक से लेकर एम.सी. मेहता बनाम यूनियन ऑफ इंडिया जैसे मामलों में कोर्ट ने राजस्थान और हरियाणा में अनियंत्रित खनन पर रोक लगाई और यह स्वीकार किया कि इससे होने वाला पर्यावरणीय नुकसान अपूरणीय है। ऐसे में आज उसी अरावली को कमजोर करने वाली व्याख्या सामने आना न केवल चिंताजनक है, बल्कि न्यायिक परंपरा के भी विपरीत प्रतीत होता है।
"��ोदी का दूसरा प्रहार आ रहा है, धारा 30 समाप्त हो सकती है!"
मोदी ने हिंदुओं के साथ नेहरू द्वारा किए गए विश्वासघात को सुधारने के लिए पूरी तैयारी कर ली है।
क्या आपने "धारा 30" के बारे में सुना है?
क्या आप जानते हैं कि धारा 30 का मतलब क्या है?
'धारा 30' एक हिंदू-विरोधी कानून है,
जिसे नेहरू ने अन्यायपूर्ण तरीके से संविधान में शामिल किया था!
जब नेहरू ने इस कानून को संविधान में शामिल करने का प्रयास किया,
तो सरदार वल्लभभाई पटेल ने इसका कड़ा विरोध किया।
सरदार पटेल ने कहा था,
"यह कानून हिंदुओं के साथ विश्वासघात है;
अगर यह कानून संविधान में लाया गया तो मैं मंत्रिमंडल और कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा!"
आखिरकार, नेहरू को सरदार पटेल के प्रतिरोध के सामने झुकना पड़ा।
लेकिन दुर्भाग्यवश, इस घटना के कुछ समय बाद ही सरदार वल्लभभाई पटेल का अचानक निधन हो गया...!!
पटेल की मृत्यु के बाद नेहरू ने तुरंत इ�� कानून को संविधान में शामिल कर दिया!
अब जानिए धारा 30 की विशेषताएँ 👇
इस कानून के अनुसार,
हिंदू अपने 'सनातन धर्म' की शिक्षा स्कूलों और कॉलेजों में न तो दे सकते हैं और न ही ले सकते हैं!
क्या यह अजीब नहीं लगता?
"धारा 30" के तहत, मुसलमान और ईसाई अपने धर्म की शिक्षा देने के लिए इस्लामिक (मदरसा) और ईसाई (कॉन्वेंट) स्कूल चला सकते हैं,
लेकिन हिंदू अपने गुरुकुल या वैदिक शिक्षा पर आधारित पारंपरिक स्कूल नहीं चला सकते,
जो देश के मुख्य धर्म सनातन या हिंदू धर्म और संस्कृति को संरक्षित कर सके।
यदि वे ऐसा करते हैं,
तो उन्���ें इस कानून के तहत दंडित किया जाएगा!
साथ ही, मस्जिदों और चर्चों में दान से जमा सारा पैसा और सोना केवल उन्हीं का होता है।
वे उस संपत्ति का उपयोग अपने अनुयायियों को बढ़ावा देने और अशिक्षित या कम शिक्षित हिंदुओं को धन के लालच में धर्मांतरण के लिए करते हैं।
लेकिन हिंदू मंदिरों में जमा धन और सोने पर सरकार का नियंत्रण होता है!
नेहरू ने यह सब उस कुटिल गांधी के साथ मिलकर किया ताकि मुसलमानों और ईसा��यों को ��िंदुओं के धर्मांतरण में सुविधा हो सके।
"धारा 30" हिंदुओं के खिलाफ एक जानबूझकर किया गया विश्वासघात है!
मुस्लिम बच्चों के लिए अपनी धार्मिक पुस्तक,
कुरान पढ़ना और सीखना अनिवार्य है,
और यही नियम ईसाइयों पर लागू होता है! लेकिन हमारे हिंदुओं के बारे में क्या? हमें अपने एकमात्र धर्म,
जो इस प्राचीन विज्ञान पर आधारित है,
की सही समझ भी नहीं है!
आइए 👇
हम सभी सनातन धर्म की रक्षा करें। इस लेख को पढ़ें, ���मझें और नेहरू और कुटिल गांधी द्वारा किए गए इस अन्याय के बारे में हर जगह जागरूकता फैलाएँ।
क्योंकि धारा 30 के कारण,
हम अपने स्कूलों और कॉलेजों में भगवद गीता नहीं पढ़ा सकते हैं,
जबकि यह हमारा सनातन धर्म देश है।
यदि आप इस लेख को पढ़कर इसे पसंद करते हैं और सनातन धर्म में विश्वास और स्नेह रखते हैं,
तो कृपया इसे जितना संभव हो सके उतना साझा करें!
जय भारत 🇮🇳
21 अक्टूबर 1943, आज़ाद भारत के पहले प्रधानमंत्री नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, इस स्वतंत्रता और नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को विश्व के नों देशों ने मान्यता दी!
जयहिंद
@garrywalia_ Medam yahi vo manniye the jinhone bhagwan ki mandir pr kuch kha tha tab toh aapne kuch nhi bola oor jab unke imege par baat aayi toh aapka muh khul gya mandir k baat pe aapne ye q nhi bola ki aapne pure desh ka apman kiya he
विश्व का आठव��ं आश्चर्य “भारत” में हैं
“नेहरू” से पहले न कोई “नेहरू” था और न “नेहरू” के बाद कोई “नेहरू” हुआ !!समस्त इतिहास में धरती पर मात्र दो नेहरू पैदा हुए मोतीलाल और जवाहरलालकिन्तु “नेहरू” वंश का कोई भी लड़का या लड़की चाहे क��सी से भी “शादी” करें वो “गांधी” को ही जन्म देते ह
इस्लामिक लोगों का एजेंडा क्लियर है वो अपना कार्य पूरी ईमानदारी निष्ठा से कर रहे हैं कमी हिंदुओं में है हम अपना कार्य नहीं करते हम ईमानदार नहीं है हम पक्के हिंदू नहीं है !
@VoxShadabKhan Arre arre vo jo pathar fekte h vo toh samvidhan ki bhasa h sayad h na
Suno mahasy jisko jo bhasa smj aati h usko usi bhasa me smjna padta h
Big Big Breaking🚨
UN में पाकिस्तान की इज्जत की धज्जियां उड़ा दी
भारत के विदेशमंत्री जय शंकर ने पाकिस्तान को
आतंकवाद का वैश्विक केंद्र कहा
तो पूरी संयुक्त राष्ट्र महासभा तालियों से गूंज उठी
जो कांग्रेस 70 साल में न कह पाई
जयशंकर ने एक झटके में बोल दिया
जयशंकर फायर है 🔥🔥
भारत को मिली बड़ी कामयाबी!
पहली बार भारत ने हासिल की ये सफलता।
चलती ट्रेन से छूटी अग्नि-प्राइम मिस���इल, 2000 KM की है रेंज, जद में पूरा पाकिस्तान।
DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर से रेल मोबाइल लॉन्चर से इसे दागा।
कर्नाटक में Gen Z युवा सड़को पर हैं !
ख़ाली पदो पर भर्ती के लिए प्रदर्शन कर रहे है !
कर्नाटक में कांग्रेस पार्टी की ही सरकार है। 🚨🚨
ओर राहुल गांधी आजकल हर वक्त
Gen Z, युवा, बेरोजगार शब्द रटे हुए हैं !
तो क्या राहुल गांधी अब इन Gen Z युवाओ का समर्थन करेंगे ?