#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
God Kabir In 4Yugas
द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया था। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी:
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
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कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
#परमात्मा_चारों_युगमें_आतेहैं
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कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
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कबीर साहेब चारों युगों में अलग-अलग नामों से प्रकट होते हैं। सतयुग में कबीर परमेश्वर, विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरुड़ से मिले और उन्हें वास्तविक ज्ञान से परिचित कराया:
ज्ञानी गरुड़ है दास तुम्हारा, तुम बिन नाहीं जीव निस्तारा।
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द्वापरयुग में 'करुणामय' रूप में आए कबीर साहेब ने रानी इन्द्रमती और उनके पति चंद्रविजय को अपनी शरण में लिया था। जब सर्प ने रानी इन्द्रमती को डसा, तब कबीर साहेब ने उनके गुरु रूप में प्रकट होकर उनकी रक्षा की थी:
#किसको_मिले_कबीरभगवान
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गुरु नानक देव जी को कबीर परमात्मा बेई नदी के किनारे 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले थे और उन्हें सचखंड (सतलोक) का साक्षात्कार कराया था। इसके बाद गुरु नानक जी ने कबीर प्रभु के विषय में कहा:
यक अर्ज गुफतम पेश तो दर गोश कुन करतार।
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संत नामदेव जी से कबीर परमात्मा एक संत के रूप में पंढरपुर में मिले और उनके साथ अनेक लीलाएँ कीं। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
मूंज अरू बांस सर खूब चोखे लिये, नामदेव की छांन तहां खूब छाई।
पातशाह मस्क जद बांध नामा लिया,
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कबीर परमात्मा, इस्लाम धर्म के प्रवर्तक पैगंबर हज़रत मुहम्मद जी से भी मिले थे। इस विषय में संत गरीबदास जी ने कहा है:
होते नबी मुहम्मद पीरा। जाकूँ मुर्शिद मिले कबीरा।। - अमरग्रन्थ साहिब, पृष्ठ 569
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कबीर परमेश्वर, सतगुरु के रूप में विश्नोई पंथ के संस्थापक संत जम्भेश्वर जी को समराथल (राजस्थान) में मिले थे। जम्भसागर (शब्द 90) में उल्लेख है:
जां जां पवन आसण, पाणी आसण, चंद आसण।
सूर (सूर्य) आसण गुरू आसण संमरा थले।
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कबीर परमात्मा के दर्शन गरुड़ जी को हुए थे, कबीर सागर में 11वां अध्याय ‘‘गरूड़ बोध‘‘ पृष्ठ 65 (625) पर प्रमाण है कि परमेश्वर कबीर जी ने धर्मदास जी को बताया कि मैंने विष्णु जी के वाहन पक्षीराज गरूड़ जी को उपदेश दिया,
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तैमूर लंग को कबीर परमात्मा ने 'जिंदा महात्मा' के रूप में तब दर्शन दिए थे, जब वह भेड़-बकरियाँ चरा रहा था। संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, तैमूरलंग को तालिब मिले, एक रोटी की चाहय।
जिंदा रूप कबीर धरहीं, सुनी तैमूरलंग की माय।।
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भाई बाले वाली जन्म साखी के पृष्ठ 198 पर, काज़ी रुक्नुद्दीन के प्रश्न का उत्तर देते हुए श्री नानक देव जी ने कबीर साहेब की महिमा में कहा है:
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संत गरीबदास जी (गाँव- छुड़ानी, जिला- झज्जर,हरियाणा)को कबीर परमेश्वर सन् 1727 में खेतों में 'जिंदा महात्मा' के रूप में मिले और उन्हें सतलोक का साक्षात्कार कराया। इस पर संत गरीबदास जी ने कहा है:
गरीब, परमेश्वर एक कबीर है, दूजा नहीं आधार।
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संत गरीबदास जी महाराज को सन् 1727 में 10 वर्ष की आयु में गांव छुड़ानी के नला नामक स्थान पर कबीर परमेश्वर जिंदा महात्मा के वेश में मिले। तत्वज्ञान से परिचित कराकर सतलोक दर्शन करवाकर साक्षी बनाया।
अजब नगर में ले गए, हमको सतगुरु आन।