पीड़ित दलित बेटी मेरठ को न्याय दिलाने की मांग करने वाले पर जिस तरह S S P और मेरठ पुलिस द्वारा बर्बरतापूर्ण हाथापायी मार-पीट व लाठी चार्ज का नंगा नाच किया गया न केवल मेरठ पुलिस की संवेदनहीनता को दर्शाता है अपितु पुलिसिया गुंडागर्दी का भी एक जीवंत दुष्टान्त है। हद तो तब हो गई जब S S P के नेतृत्व में पुलिस ने गिरफ्तार कर पुलिस वैन में बैठाये गये लोगों की भी जमकर पिटाई की । पुलिस के इस गैर जिम्मेदाराना रवैया को देखते हुए मेरठ S S P के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग करता हूं।
@CMOfficeUP@ChiefSecyUP
#highcourt #supremeCourt
मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट ठाकुर से मिलने के बाद बिंद समाज की इस बेटी के दर्द को सुनिए।
दलित पिछड़ा समाज के प्रति ठाकुर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ बिष्ट की नफरती सोच जगजाहिर हो चुकी है।
प्रभु श्रीराम के मंदिर में एक और महालूट का मामला सामने आया है।
117 बिस्वा जमीन जिसकी कीमत 9 करोड़ थी, चंपत राय गैंग ने 55 करोड़ 47 लाख रुपये में आलोक बंसल से ख़रीदी।
हैरान करने वाली बात ये है की इससे पहले के गाँव बरेहटा में सरकार ने किसानों से 4 लाख 40 हज़ार में ज़मीन ख़रीदी।
जबकि चंपत ने ट्रस्ट के लिए 47 लाख रू प्रति बिस्वा में ज़मीन ख़रीदी।
ED पार्टी और RSS ने लूट का माल कहाँ रखा है?
आख़िर अब तक किसी चंदा चोर की गिरफ़्तारी क्यों नही हुई?
@RahulGandhi अखिलेश जी AC में बैठकर समस्या उठाने वाले एकमात्र दूसरे नेता हैं उत्तर प्रदेश के
पहले नम्बर पर अभी भी बहन जी हैं
लेकिन अब जनता उनसे उम्मीद छोड़ चुकी है
एक रिपोर्ट में आया है कि गड़करी के रोज रोज के झमेलों से कन्फ्यूज 43% लोगों ने नई गाड़ी खरीदने से मना कर दिया है
PM पद की आस लगाए @nitin_gadkari की साख पे एथेनॉल ने तगड़ी चोट लगा दी है.. देशभर में चर्चा है कि गडकरी अपने बेटों के कारोबार को फायदा पहुंचाने के लिए ये सब कर रहे हैं
"नृपेन्द्र मिश्रा ने गोली चलवाई थी मुलायमसिंह के समय में कारसेवकों के ऊपर, अब वहां बैठकर मंदिर बनवा रहा है. जिसने गोली चलवाई हमारे कारसेवकों के ऊपर.. हमारे भाई मारे गये. उसे मंदिर परिसर में देखकर खून खौलता है हम लोगों का."
- शंकराचार्य स्वामी श्रीअविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी महाराज
📍शामली, उत्तरप्रदेश
जिधर जाते हैं सब, जाना उधर अच्छा नहीं लगता,
मुझे पामाल रास्तों का सफ़र अच्छा नहीं लगता।
ग़लत बातों को ख़ामोशी से सुनना, हामी भर लेना,
बहुत हैं फ़ायदे इसमें मगर सच्चा नहीं लगता।
ताली बजा दूँ हर बड़े चेहरे पर, ये मुझसे हो नहीं सकता,
सच दिख रहा हो आँखों को तो फिर अच्छा नहीं लगता।
भीड़ के साथ चलूँ, सवाल करना छोड़ दूँ,
शायद आसान हो मगर अच्छा नहीं लगता।
जो सच है, वो सच है, चाहे अपने खिलाफ़ ही क्यों न हो,
झूठ को सच कह देना मुझे अच्छा नहीं लगता।
ग़लत बातों पर चुप रहकर सम्मान मिल जाए,
ऐसा सम्मान मुझे अच्छा नहीं लगता||
जब आदिवासी, दलित, महिलाओं के मानवाधिकारों का खुलेआम हनन होता है और महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं होती, तब सवाल उठना स्वाभाविक है कि महिला आयोग और मानवाधिकार आयोग आखिर किसके लिए हैं?
मेरठ पुलिस के SP सिटी विनायक भोसले जी खुद बिना हेलमेट मोटरसाइकिल पर अपने दरोगाओं के साथ चलते नजर आ रहे हैं
जबकि साथ चल रहे पुलिसकर्मियों ने भी हेलमेट नहीं लगाया है।
जब एक IPS अधिकारी ही यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते दिखाई दें, तो आम जनता से नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जाए?
क्या यातायात नियम सिर्फ जनता के लिए हैं या पुलिस अधिकारियों पर भी समान रूप से लागू होते हैं?