Prepaid Recharge Customers के साथ हो रही लूट का मुद्दा आज मैंने Parliament में उठाया।
(a) अगर आपका recharge खत्म हो जाए तो Outgoing Calls बंद होना समझ में आता है, लेकिन Incoming Calls बंद करना मनमानी है।रिचार्ज खत्म होते ही न कोई आपसे संपर्क कर सकता है और न ही आपके फोन पर OTP जैसे जरूरी मैसेज आ पाते हैं। Emergency के हालातों में व्यक्ति बेसहारा हो जाता है।
(b) 28 दिन का Recharge plan एक scam है। साल में महीने 12 होते हैं लेकिन रिचार्ज 13 बार करवाना पड़ता है (28 days x 13 times = 364 days).
Recharge plan की वैधता calender months (30–31 दिन) के हिसाब से होनी चाहिए, क्योंकि 28 दिन के चक्कर में लोगों को साल भर में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।
मोबाइल आज के समय में Luxury नहीं, बल्कि आम नागरिक की Necessity बन चुका है।
इसलिए टेलीकॉम कंपनियों को उपभोक्ताओं के साथ Fair और Transparent रवैया रखना चाहिए।
अगर न्यूनतम #पांच साल की नौकरी की है तो #resign करने के बाद भी ₹gratuity पाने का अधिकार होगा।
सुप्रीम कोर्ट ने Payment of Gratuity Act, 1972, क़ानून की व्याख्या करते हुए कहा।
भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में 22 भाषाओं को शामिल किया गया है, जिसमें से नेपाली और सिंधी भाषाएं विदेशी मूल की मानी जाती हैं। लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य की प्रमुख भाषा छत्तीसगढ़ी, जो लाखों लोगों द्वारा बोली जाती है और राज्य की सांस्कृतिक पहचान है, इसे अब तक इस अनु��ूची में शामिल नहीं किया गया है।
यह सवाल उठता है कि जिस भाषा को राज्य सरकार ने आधिकारिक मान्यता दी है और जो साहित्य, शिक्षा और संचार में गहराई से रची-बसी है, उसे क्यों दरकिनार किया जा रहा है। क्या यह भाषाई राजनीति का नतीजा है, या छत्तीसगढ़ी के प्रति राष्ट्रीय स्तर पर उदासीनता का संकेत? केंद्र सरकार को इस विषय पर ध्यान देना चाहिए।
#Chhattisgarh
गजब मिठाथे रे संगी, मोर छत्तीसगढ़ के बासी.
ईही हमर बर तिरिथ गंगा, ईही हमर बर मथरा कासी.
उठथन बिहनिया करथन मुखारी, अउ झडक थन बासी.
दिन भर करथन काम बुता , पेट नई होवय खाली.
दार दरहन के कामे नईये, नई लगाय साग तरकारी.
दही मही संग नुन मिर्चा, गोन्दली येकर सन्ग्वारी.
के दिन ले बनाबो माल पुआ, के दिन ले बनाबो तसमई पुरी.
कतका ला बिसाबो सेव डालीया , के दिन ले खाबो सोहारी.
समोसा, जलेबी, पोहा, खोआ, रसगुल्ला नइ मिठावय हमला.
नई खाए सकन होटल के रोज, तेलहा, फुलहा भजिया.
सहरिया मन के ��कल जो करबो, होजाहि जग हासि.
सबले सस्ता सबले बढिया , मोर छत्तीसगढ के बासी .
""जय छत्तीसगढ""
राज्य भाषा दिवस के बधाई!
#Chhattisgarh
कौन कहता है आसमान में सुराख नहीं हो सकता,
एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों!
दो महीनों में सरकार को अपने कदम पीछे लेने पड़े,
सौ यूनिट फ्री से दो सौ यूनिट तक बिजली बिल हाफ की हुई घोषणा,
पर ये जीत अधूरी है जब तक सरकार पुरानी सब्सिडी लागू नहीं करती है।
@rpsinghraipur@CGVOICE00777
सर्दी में नौकरी पाने का सपना लेकर परीक्षा देने जा रहे युवाओं पर व्यापमं ने ऐसा फरमान थोप दिया है, मानो कमी किसी और की नहीं, खुद परीक्षार्थियों की हो। 21वीं सदी में, जब तकनीक हर कदम पर सुरक्षा के आधुनिक साधन देती है CCTV, स्कैनर, मेटल डिटेक्टर, बॉडी स्कैनर ऐसे समय में जेब वाले स्वेटर, जैकेट और गर्म कपड़ों पर रोक लगाना खुद की नाकामी को उम्मीदवारों पर थोपने जैसा है।सवाल यह है कि क्या व्यापमं सुरक्षा जांच की आधुनिक तकनीक पर भरोसा नहीं करता? क्या हर बार परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमजोरी छुपाने का सबसे आसान तरीका बस छात्रों के कपड़े बदलवा देना ही रह गया है?
सर्दी में बिना जेब वाले कपड़े पहनकर घंटों परीक्षा देना किसी भी युवा के लिए यातना से कम नहीं�� जबकि सरकारी तंत्र चाहे तो परीक्षा केंद्रों की चेकिंग व्यवस्था को मजबूत बनाकर पारदर्शिता सुनिश्चित कर सकता है। लेकिन यहां एक बार फिर वही रास्ता सरल समाधान छोड़कर सारा बोझ छात्रों पर डाल देना। तकनीक से लैस देश की बात करते हैं, डिजिटल इंडिया का दावा करते हैं, और दूसरी ओर परीक्षा केंद्रों पर इतना अविश्वास कि कपड़ों तक पर निर्देश जारी करने पड़ें? यह कैसी व्यवस्था है जिसमें सुरक्षा इंतज़ाम मजबूत करने की बजाय छात्रों के पहनावे को ही संदिग्ध मान लिया जाता है?
व्यापमं को समझना होगा कि पारदर्शी परीक्षा व्यवस्था कपड़ों से नहीं, नीयत और तकनीक से मजबूत होती है। परीक्षार्थियों को बोझ मत बनाइए, अपनी जिम्मेदारी निभाइए।
#Chhattisgarh
जोहार छत्तीसगढ़🙏
माननीय श्री अमित बघेल जी के समर्थन में रायपुर में सर्व छत्तीसगढ़िया समाज के बैठक सम्पन्न ।
सब्बो छत्तीसगढ़िया समाज ला एक देखे के सपना ��ूरा होवत हे 🙏🙏🫂🫂🫂
जात पात के करो बिदाई, छत्तीसगढ़िया छत्तीसगढ़िया भाई भाई 🫂🙏
#जागव_छत्तीसगढ़िया_जागव
छत्तीसगढ़ में 1932 की ख़तियान (जमाबंदी) लागू करने का समय आ गया है जरूरी है ��ि अब क्षेत्र में उस वर्ष तक जिन परिवारों या व्यक्तियों के नाम भूमि अभिलेख (ख़तियान) में दर्ज हैं। उन्हें ही उस क्षेत्र का “मूल निवासी” या “स्थानीय निवासी” माना जाए।
#Chhattisgarh
पुरखा के सुरता
जनकवि #लक्ष्मण_मस्तुरिया ल अमर होए सात बछर होगे. बरसी के मउका म पुरखा ल सादर नमन. आगी अउ बागी कवि मस्तुरिया जी कहे हें-
एक न एक दिन ये पीरा ह रार मचाही रे
नरी कटाही बइरीमन के नवा सुरुज फेर आही रे
#जय_छत्तीसगढ़_महतारी#मोर_चिन्हारी_छत्तीस��ढ़ी
#छत्तीसगढ़ के प्रति आपका प्रेम अद्भुत और अविस्मरणीय है महाराज जी
छत्तीसगढ़ महतारी का अपमान — हम सबका अपमान!
रायपुर के VIP चौक पर छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा को तोड़ा जाना सिर्फ एक मूर्ति तोड़ने की घटना नहीं है
यह हमारे ग��रव, अस्मिता और संस्कारों पर हमला है
जहाँ हमारी माँ की प्रतिमा सुरक्षित नहीं, वहाँ जनता की सुरक्षा की क्या उम्मीद की जाए
का छत्तीसगढ़ म बस राष्ट्रवाद के फार्मूला लागू होही?
कर्नाटक के कन्नड़ भासा ल छत्तीसगढ़ म कोन पढ़थे जेन स्कूल के आघू म कन्नड़ म लिखाय हे।
का होगे हे इंहां के परबुधिया नेता मनला के छत्तीसगढ़ के अस्मिता के धियान नई रख सक�� हे।
#छत्तीसगढ़
सोशल मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा इस तस्वीर में “जवाहर नवोदय विद्यालय, रायपुर” के बोर्ड पर हिंदी, अंग्रेजी और कन्नड़ भाषा में नाम लिखा गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ी का कोई निशान नहीं। यही तो छत्तीसगढ़ की सच्चाई है अपने ही घर में पराई भाषा को सम्मान और अपनी भाषा को भुला देना। यह विडंबना नहीं तो और क्या है कि @RaipurDistrict जैसे शहर में, जहाँ छत्तीसगढ़ी बोलने वाले हर कोने में मिलते हैं, वहाँ सरकारी शिक्षा संस्थान के बोर्ड पर स्थानीय भाषा की जगह नहीं मिलती��� “वोकल फॉर लोकल” का नारा सिर्फ भाषणों में गूंजता है, दीवारों पर नहीं दिखता। यह सवाल सिर्फ एक स्कूल का नहीं, प���री सोच का है जब अपनी मिट्टी की जुबान को पहचान नहीं देंगे, तो “छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया” का अर्थ ही क्या रह जाएगा?
#Chhattisgarh