दो क्षण का विराम किसी भी प्रत्युत���तर के पूर्व, प्रत्युत्तर के प्रभाव को बढ़ा देता है।
ज्ञानी के लिए निमिष ही पर्याप्त होता है और अज्ञानी के लिए कल्प भी अपर्याप्त।
हर जीव अपनी बुद्धिमत्ता के अनुसार सत्य देखता है, तभी एक का सत्य दूसरे के सत्य से भिन्न होता है।
परम सत्य को देखने का प्रयास करें, विवेक में वृद्धि होगी।