@archeohistories@sanjayuvacha How come choonmangi (Joshi) has gone out of India … her community who claims they are representation of all 3Cr god in India…in their vedas and puranas (religious books) has been clearly told not to cross any sea.
सुनने में आया है कि इस दलित अधिकारी तुकाराम मुंडे ने मिलावटखोरों की पुंगी बजा दी है, परजीवी समाज में गहरा रोष व्याप्त है 🔥🔥
में लिख कर देता हूं मनुवादी अधिकारी इसकी ईमानदारी से घबराकर कोई गलत कदम उठाएंगे, या तो इस अधिकारी का ट्रांसफर करेंगे, या बदनाम करेंगे,
Wait and watch 🔥
इसका नाम शुभम अग्रवाल है ये फर्जी विकलांग सर्टिफिकेट बनाकर 2019 में विकलांग कोटे से यूपी में नायाब तहसीलदार बन गया ।
अब सोचिए जब ये जनरल केटेगरी वाले विकलांगो की सीट हड़प ले रहे है तो क्या ये दलित-पिछडो को उनका हक देंगे ??
आरक्षण इसीलिए दिया जाता है ताकि सभी वर्ग को प्रतिनिधित्व मिल सके वरना इनका बस चले तो ये सबका हक डकार जाए ।
नेहा जाटव ने 92000 की स्कूटी किसी तरह EMI पर खरीदी ��िसमें दिया गया टैक्स कुछ इस प्रकार है
GST - 25760
Road tax - 5500
Insurance GST - 2000
Loan processing Fees GST- 5000
अब नेहा कायस्थ आकर कहेगी कि नेहा जाटव टैक्स नहीं देती।
बाइक खरीद ली इसलिए आरक्षण भी मत दो।
विदेशों में रहने वाले किसी भी ब्राह्मण ने कभी कोई अभियान नहीं चलाया की मंदिरों में लिए पुजारी आरक्षण हटाओ या 3 पीढ़ी बाद छीन लो जबकि वो हज़ार सालों से आरक्षण लिए हुए है, न ही कभी ये आंदोलन चलाया कि जाति खत्म करो या तीन पीढ़ी बाद का ब्राह्मण अब ब्राह्मण नहीं रहेगा ताकि भेदभाव खतम हो और समानता आए ताकि सभी क�� बराबर अवसर मिल सके।
उल्टे फर्जी कास्ट सर्टिफिकेट बनाकर स्कालरशिप हड़प लिए विदेश में पढ़ाई के नाम पर(रिफरेन्स संलग्न है)
ब्राह्मणों को अच्छे से पता है कि उनके वर्चस्व का राज ब्राह्मणवाद है जिससे वो कभी समझौता नहीं करते लेकिन कई बहुजन छत पर चढ़े नहीं कि सीढ़ी तोड़ो भाई सीढ़ी तोड़ो बहुत चढ़ गए ऊपर ।
आख़िर ब्राह्मणों ने बहुजनों पर हज़ार साल से डोमिनेट ऐसे ही थोड़े किए है इसके लिए जिम्मदार स��र्फ़ वही है?
अजब व्यवस्था है,सफाई कर्मी सरकारी वेतन लेता है और सफाई कोई दूसरा करता है।
अगर किसी व्यक्ति की नियुक्ति सफाई कर्मी के पद पर हुई है, तो क्या उसे सफाई का काम करने की ट्रेनिंग नहीं दी गई?
जब सरकार उसे बाकायदा तनख्वाह दे रही है, तो फिर वह अपने काम के लिए ₹300 देकर मजदूर क्यों लगाता है?
गांव में हाल यह है कि सफाई कर्मी आता है, हाथ ब��ंधकर खड़ा रहता है और गांव के ही किसी मजदूर को ₹300 देकर नाली साफ करवा देता है, झाड़ू लगवा देता है और खुद अपनी ड��यूटी पूरी मानकर चला जाता है।
सफाई कोई और करे, गंदगी कोई और साफ करे और सरकारी वेतन कोई और उठाए यह कैसी व्यवस्था है?
सरकार से सीधा सवाल है।
अगर कोई व्यक्ति अपने पद का मूल काम ही नहीं कर सकता या नहीं करना चाहता, तो उसे सफाई कर्मी के पद पर नियुक्त रखने का क्या औचित्य है?
सरकार को चाहिए कि सफाई कर्मियों की जवाबदेही तय करे और नियमित निरीक्षण कराए। जो व्यक्ति वास्तव में सफाई का काम करता है, उसे ही इस प��� पर रखा जाए।