@Nildeepsinh1973@OfficialGsrtc આજ પરિસ્થિતિ લીંબડી અને લીંબડી હાઇ વે છે. અમદાવાદ રાજકોટ ઇન્ટર સીટી લીંબડી હાઇ વે સર્કલ પર પેસેન્જર ઉતારે છે પણ અમુક ડ્રાઇવર એક બે પેસેંજર હોય તો ઓવર બ્રિજ પર ઉતારી નીકળી જાય છે અને કહે છે કે ગાડી નીચે નથી ચાલતી. જ્યારે લીંબડી હાઇ વે એટલે સર્કલ અને ખાલી લીંબડી એટલે ડેપો
@dave_janak વરસાદ પડે એટલે બધે પાણી ભરાયા છે વરસાદ બંધ થાય પછી કેટલા સમય પાણીની નિકાલ અને રોડ ની હાલત ના વિડિયો પણ બતાઓ, આપડે વરસાદ બંધ થયા પછી ના જ વિડિયો હોય છે.
Poll Tracker Survey OF MOOD OF INDIA 2026
⚫️ युवा अपने भविष्य के लिए किसे अपना नेता मानते हैं?
▪️नरेंद्र मोदी - 23
▪️राहुल गांधी - 69
▪️क्षेत्रीय नेता - 2
▪️कोई अन्य नेता - 6
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@DChaurasia2312 अंध भक्त लोग अब सरकार के खिलाफ है, लोग ज्यादा से ज्यादा contents इस पर ही बना रहे हैं इसलिए अल्गोरिद्म वहीं पकड रहा है और मिलियन मे व्यू हो रहे हैं, अब मोदी जी के जुमले कोई सुनना नहीं चाहता इसलिए अल्गोरिद्म उसे नहीं बता रहा ।
पंडित नेहरू ने 1956 में LIC की स्थापना की थी। मात्र 5 करोड़ में। आज इस कंपनी का मार्केट कैप 5 लाख 42 हजार करोड़ से ज्यादा है। आम जनता के पैसे और मेहनत से चलने वाला यह संस्थान कभी घाटे में नहीं रहा और देश में लाखों करोड़ का योगदान दिया।
नरेंद्र मोदी सरकार ने LIC की 6.5% हिस्सेदारी बेचने का फैसला किया है। कल से ऑफर फॉर सेल शुरू होगा।
आपको वॉट्सएप पर फॉरवर्ड करना है : कांग्रेस ने 70 साल में कुछ नहीं किया।
जब मैंने पत्रकारिता शुरू की, अखबारों में सरकार की आलोचना में भर-भर पेज लेख लिखे। हमसे 30 साल, 40 साल सीनियर संपादकीय लिखवाते थे। हम खुलकर लिखते थे। छपता था। लेकिन कभी किसी ने नहीं रोका। किसी सीनियर ने इतना भी नहीं कहा कि सीधा प्रधानमंत्री से सवाल करने से पहले कुछ पढ़-लिख लो, उस लायक बन जाओ। जो हमें ठीक लगा, तार्किक लगा, वह सब लिखा। खाली दिनों में कई अखबारों में भी लेख लिखे, किसी संपादक ने कुछ छापने से मना नहीं किया कि इसे हम नहीं ले सकते क्योंकि यह सरकार के खिलाफ है।
आज यह हालत है कि पत्रकारों को फर्जी आरोपों में जेल में डाल दिया जाता है। फर्जी आरोप में न्यूजक्लिक जैसे संस्थान को बर्बाद कर दिया गया। द वायर जैसे अच्छे पोर्टल पर इतने केस लादे गए कि वह किसी तरह बस चल रहा है। जिस भी पत्रकार ने सरकार की आलोचना की, उसे ही पत्रकारिता से निकाल कर बाहर कर दिया गया। सवाल पूछने वाले दर्जनों दर्जन पत्रकारों से उनकी जीविका तक छीन ली गई। पत्रकारों पर गुंडे और ट्रोल छोड़े जाते हैं।
जो लोग सत्ता में बैठकर ये कृत्य कर रहे हैं, वही लोग आपातकाल का रोना रोते हैं। घोषित आपातकाल ज्यादा बुरा था, या अघोषित आपातकाल जो पूरे देश को, यहां तक कि पीढ़ियों को गुलाम बना लेने की जिद पर अड़ा हुआ है?
EVM से आसानी से चुनाव जीत सकते हैं, लेकिन उससे लोकतंत्र का भ्रम टूट जाएगा. ऐसे में हार-जीत का खेल खेलते रहना है.
अपने हिसाब से - दलितों का नेता, मुसलमानों का नेता, जनरल कास्ट, पिछड़ों, युवाओं का नेता खड़ा कर दो.
ये सब लोकतंत्र का भ्रम बनाए रखेंगे, काम चलता रहेगा.
@AshokShrivasta6 सरकार आप जैसे पत्रकारों के जरिए उसका विज्ञापन दिखाती है, विपक्ष जो दिखता है वो जनता की आवाज होती है जिसे आप लोग नहीं दिखा सकते। #godimedia#jantarmanatar