पत्रकारिता करते लगभग 30 साल हो गए। सरकारें आयीं गयीं लेकिन वामपंथियों का ऐसा रवैया कभी नहीं दिखा। पुरस्कार वापसी से लेकर लब्धप्रतिष्ठ लोगों तक की ग़ैरज़िम्मेदाराना हरकत निराश करती है।क्या लोकतंत्र में जनादेश की ऐसी अवहेलना हितकर है? ये कैसी असहिष्णुता है आख़िर!
गुजरात में वल्लभ यूथ ऑर्गनाइजेशन की ओर से स्थापित 9 ऑक्सीजन प्लांट का वर्चुअली लोकार्पण करते हुए गृह मंत्री अमित शाह ने ये भी कहा कि 'भारत में, सरकार के साथ-साथ, 135 करोड़ नागरिकों ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह लड़ाई लड़ी. हमारी सफलता का यही कारण है.'
मुझसे मेरे होने की पहचान नहीं ले सकते हो
जब तक रब ना चाहे मेरी जान नहीं ले सकते हो !
मेरी सांसों में जलती बारूदें तो भर सकते हो,
लेकिन तुम मुझसे मेरा ईमान नहीं ले सकते हो !
~इमरान प्रतापगढ़ी